जीरन (नीमच)। जीरन की धरती आज उस पल की गवाह बनी, जिसने हर आंख को नम और हर दिल को भारी कर दिया। सीआरपीएफ नीमच में पदस्थ जांबाज जवान संजय पाटीदार (सगवारिया) के आकस्मिक निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। महज 35 वर्ष की उम्र में देशसेवा करते हुए उनका यूं चले जाना मानो खुशियों पर ग्रहण लग जाना जैसा रहा।
तिरंगे में लिपटे वीर सपूत की पार्थिव देह जैसे ही गणपति मंदिर चौराहे पर पहुंची, पूरा नगर उमड़ पड़ा। भारत माता के जयकारों और “जब तक सूरज चांद रहेगा, संजय तेरा नाम रहेगा” के नारों से वातावरण गूंज उठा। उस पल ऐसा लगा मानो पत्थर दिल भी पिघल जाए। हर आंख नम थी और हर चेहरा कह रहा था कि आज एक घर नहीं, पूरा नगर रो पड़ा।
सुबह लोहिया नगर स्थित निवास से निकली अंतिम यात्रा मुक्तिधाम पहुंची, जहां राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई। सीआरपीएफ अधिकारियों ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और जवान को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया। यह वह क्षण था जब सीना गर्व से चौड़ा भी था और दिल दर्द से भरा भी।
मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के दौरान पिता प्रेमनारायण पाटीदार, परिजनों और मासूम पुत्र वैदिक ने मुखाग्नि दी। यह दृश्य ऐसा था जिसने वहां मौजूद लोगों की आंखें छलका दीं और कलेजा मुंह को ला दिया। बेटे की विदाई में पिता की खामोशी बहुत कुछ कह रही थी।
जीरन का यह वीर सपूत आज पंचतत्व में विलीन हो गया, लेकिन उसकी कर्तव्यनिष्ठा, देशभक्ति और सेवा की मिसाल हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी।
कहते हैं — “वीर शरीर से जाते हैं, लेकिन अपने कर्मों से अमर हो जाते हैं।”
SSE न्यूज वीर सपूत संजय पाटीदार को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
विनोद सांवला हरवार