मन्नत का धागा बांधते ही भक्त से बंध जाती है ये देवी, देती है मनचाहा वरदान...!!

Bhopal 11-04-2019 Devotional

नवरात्रि..धर्म..विशेष...

जबलपुर। वैसे तो देवी दरबारों में मन्नत मांगने का सबका अपना अपना तरीका होता है या उन दरबारों के अपने नियम होते हैं। ऐसे में हर भक्त माता को प्रसन्न करने और उनसे मनचाहा वरदान पाने की चाहत लेकर देवी दरबार में पहुंचता है।

हम आज एक ऐसे देवी मंदिर से आपको रूबरू करा रहे हैं, जहां मन्नत के धागे बांधने से स्वयं देवी मां भक्तों के प्रेम में बंध जाती हैं। सच्चे मन से बांधा गया धागा माता को अपने बच्चों से बंधने को विवश कर देता है। क्योंकि भक्ति में ही वो शक्ति है जो देवी देवताओं को भक्तों के वश में कर देती है। संगीत और विद्या की देवी मां शारदा की मप्र में बहुत बड़ी कृपा है। उनकी प्रमुख पीठ मप्र के मैहर जिले में स्थित है। वहीं अन्य जिलों में भी माता के सिद्ध दरबार हैं जो भक्तों की हर मुराद को पूरा करने के लिए जाने जाते हैं।

*बरेला में 400 फुट ऊंची पहाड़ी पर है मां शारदा मंदिर*

*रक्षा सूत्र बांधकर भक्त लगाते हैं अर्जी*

*पहाड़ी पर विराजीं मां शारदा भवानी*

शहर से 21 किमी दूर बरेला की ऊंची पहाडिय़ों में बने शारदा मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए दूर दराज के लोग पहुंचते हैं। भक्त 400 फुट ऊंची और करीब एक किमी लम्बी पैदल यात्रा कर भगवती के दरबार में नतमस्तक होते हैं। 

नवरात्र में मंदिर में नित्य विशेष अनुष्ठान व आरती की जा रही है। भजन कीर्तन और सुबह से शाम तक भंडारे के प्रसाद वितरित किए जा रहे हैं। शारदा मंदिर बरेला में खम्भे में रक्षा सूत्र बंधे हुए दिखते हैं। मान्यता अनुसार मनोकामना पूर्ति के लिए लोग रक्षा सूत्र बांधते हैं। कार्य सिद्ध होने पर आस्था पूर्वक अनुष्ठान करने पहुंचते हैं। नवरात्र में मंदिर जाने वाली सडक़ को बंद कर दिया गया है। इस दौरान श्रद्धालु मुख्य मार्ग से पहाडिय़ों से होते हुए करीब 700 मीटर दूरी तय कर मंदिर पहुंच रहे हैं, अन्य दिनों में 1.6 किमी चलना पड़ता है। जबकि, सडक़ से मंदिर की सीधी दूरी महज आधा किमी है। शारदा मंदिर के व्यवस्थापक आशीष शुक्ला ने बताया, पहले मप्र में परिवहन निगम था। निगम के चालक स्व. श्रवण शुक्ला मढिय़ा में पूजन अर्चन करने जाते थे। इस मढिय़ा में आजादी के पहले की प्रतिमा है, मंदिर में उसी प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई है। शक्ति के उपासक पुजारी ने 1974 स्वेच्छिक सेवानिवृत्ति ली और मंदिर का निर्माण कराया। शक्ति के इस सिद्ध स्थल में भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जबलपुर, मंडला सहित अन्य जिलों के भक्त आते हैं। मंदिर में रक्षा सूत्र बांधकर लोग अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए भगवती से प्रार्थना करते हैं।

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