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चीताखेड़ा। चीताखेड़ा-धामनिया-जीरन मार्ग की बदहाली अब इस हद तक पहुंच गई है कि संबंधित विभाग के कर्मचारी भी दुर्घटनाओं का शिकार होने लगे हैं। पिछले दो वर्षों से जर्जर हालत में पड़ी इस सड़क पर आए दिन वाहन चालक हादसों में घायल हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है। यह मार्ग झाझरवाड़ा इंडस्ट्रियल एरिया को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। भारी वाहनों की आवाजाही और ग्रामीण क्षेत्र के हजारों लोगों के आवागमन का मुख्य साधन होने के बावजूद सड़क बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। कई स्थानों पर डामर पूरी तरह उखड़ गया है तथा सड़क के किनारे बने शोल्डर भी गहरे हो जाने से दुर्घटना का खतरा लगातार बढ़ गया है। पीडब्ल्यूडी कर्मचारी हुआ घायल रविवार सुबह पीडब्ल्यूडी विभाग में कार्यरत रामरतन जाटव बाइक से नीमच से चीताखेड़ा लौट रहे थे। इसी दौरान उनकी बाइक एक गहरे गड्ढे में फंस गई और वे सड़क पर गिरकर घायल हो गए। घायल कर्मचारी रामरतन जाटव ने बताया कि पूरी सड़क गड्ढों से भरी हुई है। अचानक बाइक गड्ढे में धंसने से वे दूर जाकर गिरे, जिससे हाथ और पैर में गंभीर चोटें आईं। उन्होंने कहा कि जब विभाग के कर्मचारी ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम जनता की स्थिति सहज ही समझी जा सकती है। कलेक्टर के निर्देश भी बेअसर जानकारी के अनुसार कलेक्टर डॉ. हिमांशु चंद्रा द्वारा सड़क सुधार को लेकर संबंधित विभाग को दो बार निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक स्थायी सुधार कार्य शुरू नहीं हो पाया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निचले स्तर पर अधिकारियों की उदासीनता के कारण आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। मेगा हाईवे परियोजना अटकी स्थानीय विधायक के प्रयासों से इस मार्ग को मेगा हाईवे परियोजना में शामिल किया गया था। झाझरवाड़ा से मल्हारगढ़ तक प्रस्तावित सड़क निर्माण की टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन पिछले चार माह से फाइल शासन स्तर पर लंबित बताई जा रही है। इसके कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। राजनीति गरम, समाधान नहीं सड़क की खराब स्थिति को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा समय-समय पर आंदोलन और विरोध प्रदर्शन की घोषणाएं की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। ग्रामीणों का कहना है कि नेताओं के बयान और विरोध केवल कागजों और सोशल मीडिया तक सीमित रह गए हैं, जबकि सड़क पर सफर करने वाले लोग रोजाना जान जोखिम में डाल रहे हैं। क्या कहती हैं अधिकारी? पीडब्ल्यूडी की एसडीओ नेहा राठौर के अनुसार सड़क का निरीक्षण किया गया है। शोल्डर काफी गहरे हो गए हैं और डामर पूरी तरह उखड़ चुका है। फिलहाल डामर उपलब्ध नहीं होने के कारण गड्ढों और शोल्डर्स को डस्ट (धूल-मिट्टी) से भरकर अस्थायी राहत देने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मेगा हाईवे की फाइल शासन स्तर पर लंबित है और स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। जनता की मांग क्षेत्रवासियों ने प्रशासन और शासन से मांग की है कि मेगा हाईवे परियोजना को शीघ्र स्वीकृति देकर सड़क निर्माण कार्य शुरू कराया जाए तथा तब तक गड्ढों की प्रभावी मरम्मत कर दुर्घटनाओं पर रोक लगाई जाए। लगातार बढ़ते हादसों के बीच लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ तो कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |