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चीताखेड़ा । चीताखेड़ा से 14 किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा की ओर मध्य प्रदेश की सीमा से लगा राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के केशरपुरा ग्राम पंचायत के अंतर्गत मेरियाखेड़ी और खोरिया गांव के बीच दुर्गम इलाकों में स्थित घने जंगलों के बीच जमीन की सतह से 400 फीट नीचे सुरम्य पहाड़ियों की गोद में विराजमान मिनी वैष्णो देवी कहा जाने वाला अतिप्राचीन कामाख्या (कामाता) देवी के नाम से जाना जाता है। यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की यात्रा को यादगार बना देता है। मां के प्रति अगाध श्रद्धा रखने वाले प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहां आदिवासी जीवन शैली भी देखने को मिलती हैं। घसुण्डी जागीर से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कामाख्या देवी है। अगर इस मार्ग से होकर जाते है तो यहां पहुंचने के लिए रास्ता सुगम नहीं है,पहुंचने के लिए राह जरुर कठिन है लेकिन लोगों की आस्था इस कठिनाई के आगे कुछ नहीं है। लोग बड़ी बड़ी चट्टानों और घना जंगल पारकर यहां पहुंचते हैं। यहां की वादियां प्राकृतिक सुंदरता का अहसास करवाती हैं। अरावली की पहाड़ियों से 400 फीट नीचे सतह पर सुरम्य वादियों की गोद में विराजमान हैं, विशालकाय पहाड़ियों पर प्राकृतिक सुंदरता और हवा मन को शांति देती है। प्रकृति का ऐसा दृश्य पेश करती है कि मन लगातार निहारने को करता है। यहां 120 फीट ऊंचाई से गिरते झरने के नीचे जब पर्यटन और श्रद्धालु अठखेलियां करते हैं तो शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं के जीवन की भागदौड़ और तनाव गायब हो जाता है। चारों ओर हरियाली से घिरे इस स्थान पर आपको प्रकृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यह स्थान यहां आने वाले श्रद्धालुओं की यात्रा को और समृद्ध बना देता है।बारिश में झरने के पास सुकून भरे कुछ पल बिताने के लिए बैठने की भी व्यवस्था भी है। यहां चारों ओर हरियाली और ताजगी से भरी ठंडी हवाएं मानों थके हुए मन को नया जीवन दे देती हैं। अप्रैल, मई माह की भीषण गर्मी में भी बहता है पानी*- यहां पर कामांक्षा देवी की ऐसी असीम कृपा है कि अप्रैल और मई माह की भीषण गर्मी में भी गुफा है जिसमें बांस की लकड़ी हिलाने से पानी आता है जिससे श्रद्धालु अपनी प्यास बुझाते हैं। गुफा से बहने वाले पानी को श्रद्धालु कामांक्षा देवी का चमत्कार मानते हैं। सावन अमावस्या 12 अगस्त को लगेगा भव्य मेला*- यहां कामाख्या देवी स्थल पर इस वर्ष 12 अगस्त 2026 बुधवार को एक दिवसीय भव्य मेला लगेगा। यहां वर्ष भर में एक दिन सावन माह की अमावस्या को ग्राम पंचायत केशरपुरा और मंदिर समिति के संयुक्त तत्वावधान में विशाल मेले का आयोजन होता है जिसमें राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात के कई जिलों से हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है।मेले में बड़ी संख्या में महिलाओं की श्रृंगारित मनिहारी, खाने-पीने की चटपटी चीजों एवं खिलोनों की दुकानें सझती है। आने वाले मेलार्थी जमकर खरीदारी करते हैं। वैसे भी यहां बारह महीने श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और कामांक्षा देवी के दिव्य दर्शन लाभ लेते हैं। आज भी कामाख्या देवी का यह मंदिर विकास की बाट जोह रहा है यह देवी मां का स्थान विकास की बाट जोह रहा है। जिला प्रतापगढ़ के किसी भी विभाग ने विकास की ओर ध्यान कतई नहीं दिया है। अगर प्रशासन विभाग के मामले में हस्तक्षेप करले तो निश्चित रूप से जोरदार पर्यटन स्थलों में शुमार हो सकता है। 20 फीट गहरी सुरंगनुमा गुफा है इस गुफा में बांस की लकड़ी हिलाने से पानी आता है। 130 फीट ऊंचे पहाड़ों से गिरता है पानी का झरना*- बारिश के दिनों में 130 फीट ऊंचे पहाड़ों से निचे गिरता है पानी का झरना यहां आने वाले श्रद्धालुओं का मन मोह इस ओर खिंच आता है,जो यहां पर आकर्षण का केंद्र बना हुआ रहता है। यहां ताजुब है कि अधिकृत पुजारी कोई नहीं अतिप्राचीन कामाख्या देवी मंदिर विद्यमान है पर यहां माताजी की पूजा अर्चना करने के लिए कोई पुजारी अधिकृत नहीं है। यहां जो भी श्रद्धालु आते हैं सीधे तौर पर स्वयं पुजा करते हैं। *इन कंदराओं में कभी-कभी हिंसक जीव आते हैं कामाख्या देवी मंदिर की इन कंदराओं में अक्सर हिंसक जीवों का आना-जाना लगा रहता है जिससे यहां आने वाले श्रद्धालु शाम ढलने से पूर्व ही चले जाते हैं। सुर्यास्त के बाद यह स्थान पूरी तरह से सन्नाटे में बदल जाता है। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |