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चीताखेड़ा । माताकाखेड़ा स्थित आरोग्य देवी महामाया आवरी माताजी मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव के चौथे दिवस कथा वाचक पंडित डॉ. बबलू वैष्णव जलोदिया केलूखेड़ा ने श्रद्धालुओं को भक्ति, दान और सत्संग का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में मोह सबसे बड़ा दुख है और श्रीमद् भागवत का श्रवण अनंत पुण्यों का फल है। शरीर को नौका, भक्ति को सागर और गुरु को केवट बताते हुए उन्होंने कहा कि अनुकूल परिस्थितियां मिलने के बाद भी यदि मनुष्य प्रभु को प्राप्त नहीं कर पाया तो वह आत्मघात के समान है। पं. वैष्णव ने कहा कि बिना किसी लालच के भगवान की भक्ति करना ही परम धर्म है। विपरीत परिस्थितियों में मनुष्य परमात्मा को अधिक याद करता है, इसलिए जीवन में सदैव नंदनंदन श्रीकृष्ण का स्मरण करना चाहिए। दान की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि लेना स्वार्थ है और देना परमार्थ। संग्रह की प्रवृत्ति छोड़कर ईश्वर से संबंध जोड़ना ही सुख-शांति का आधार है। उन्होंने राजा परीक्षित, वामन अवतार और राजा बलि के प्रसंगों के माध्यम से दान और धर्म का महत्व समझाया। कथा के दौरान पं. वैष्णव ने कहा कि सनातन धर्म में गौमाता पूजनीय है और जितनी पवित्रता गौमाता में है उतनी किसी अन्य जीव में नहीं हो सकती। समुद्र मंथन के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने सत्संग और संगति के प्रभाव को भी विस्तार से समझाया। प्रवचन में जड़ भरत, अजामिल, सुखदेव, राजा परीक्षित, समुद्र मंथन, वामन अवतार, कपिल मुनि, राजा सगर, भागीरथ तथा गंगा अवतरण सहित रामचरितमानस के कई प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। प्रतिदिन दोपहर 11:30 बजे से शाम 3 बजे तक चल रहे इस ज्ञान गंगा महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्मलाभ ले रहे हैं। समिति सदस्यों ने अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण करने की अपील की है। कल धूमधाम से मनाया जाएगा भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव के अंतर्गत सोमवार, 25 मई को कथा पंडाल में भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव उत्साह और भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। रिपोर्ट : दशरथ माली |