रतलाम /भोपाल/मालवा
भारतीय सिनेमा अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। दर्शकों की पसंद तेजी से बदल रही है और अब लोग सिर्फ बड़े बजट, विदेशी लोकेशन और चमकदार स्टारकास्ट तक सीमित नहीं रह गए हैं। आज दर्शक अपनी संस्कृति, अपनी भाषा और अपनी मिट्टी से जुड़ी कहानियों को भी उतना ही प्यार दे रहे हैं। यही कारण है कि देशभर में रीजनल सिनेमा का प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
इसी बदलते सिनेमाई माहौल में मध्यप्रदेश के मालवा अंचल से एक नई रचनात्मक क्रांति की शुरुआत होने जा रही है। मालवा टॉकीज़ के फाउंडर एवं फिल्म डायरेक्टर-प्रोड्यूसर राजेंद्र राठौर अब मालवी संस्कृति, लोक जीवन और मध्यप्रदेश की बोलियों को बड़े पर्दे पर नई पहचान दिलाने की तैयारी में जुटे हैं।
राजेंद्र राठौर का मानना है कि आने वाला समय रीजनल सिनेमा का है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत सिर्फ सही मंच और मजबूत प्रस्तुति की है। मालवा की बोली, लोकगीत, परंपराएं और यहां की सादगी देश-दुनिया के दर्शकों को आकर्षित करने की ताकत रखती है।
उन्होंने बताया कि मालवा टॉकीज़ का उद्देश्य सिर्फ फिल्म निर्माण नहीं, बल्कि प्रदेश की संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना है। आने वाले समय में ऐसी फिल्मों और वेब सीरीज पर काम किया जाएगा, जिनमें मालवा की असली आत्मा दिखाई देगी।
राजेंद्र राठौर ने कहा कि जिस तरह दक्षिण भारतीय फिल्मों ने पूरे देश में अपनी मजबूत छाप छोड़ी है, उसी तरह मध्यप्रदेश का रीजनल सिनेमा भी आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। उन्होंने युवाओं से भी फिल्म निर्माण, अभिनय, लेखन और तकनीकी क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।
फिल्म जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि यदि प्रदेश सरकार और निजी संस्थानों का सहयोग मिला, तो मध्यप्रदेश जल्द ही रीजनल फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा केंद्र बन सकता है। मालवा की गलियों से उठ रही यह सिनेमाई आवाज अब बड़े पर्दे पर नई कहानी लिखने को तैयार दिखाई दे रही है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत