कानड़ /आगर मालवा आखिरकार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डाॅ. मोहन यादव ने 25 साल से चली आ रही पेंशनरों की मांग को मान लिया और उन्होंने पेंशनरों को देय मंहगाई राहत में वृद्धि के संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य से सहमति लेने की प्रचलित परंपरा को खत्म कर दिया। अब मध्यप्रदेश के और छत्तीसगढ़ राज्य के पेंशनरों को राज्य शासन द्वारा बढ़ाई गई महंगाई राहत तुरंत मिल सकेगी। इस निर्णय में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की भी अहम भूमिका है।
मध्यप्रदेश के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनीष रस्तोगी और छत्तीसगढ़ राज्य के वित्त विभाग के सचिव डाॅ. रोहित यादव द्वारा संयुक्त रूप से जारी आदेश में कहा गया है कि मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्य के पेंशनरों को देय महंगाई राहत में वृद्धि के संबंध में वर्तमान में प्रचलित पारस्परिक सहमति की प्रक्रिया है। उक्त प्रक्रिया पर मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पुनर्विचार किया गया तथा प्रशासनिक सुगमता एवं पेंशनरों के हित को ध्यान में रखते हुए निम्नलिखित निर्णय लिए हंै-
(क) महंगाई राहत घोषित करने हेतु दूसरे राज्य की सहमति प्राप्त करने की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए। (ख) पेशनरों को देय पेंशन राहत में वृद्धि हेतु विधायी संशोधन के स्थान पर दोनों राज्यांे द्वारा सीधे कार्यकारी आदेश जारी करेंगे। (ग) राज्यों के आदेश से वृद्धि के फलस्वरूप पड़ने वाले वित्तीय भार के संबंध में मध्यप्रदेश/छत्तीसगढ़ शासन को सूचना हेतु पत्र प्रेषित किया जायेगा। (घ) कोई भी राज्य केन्द्र सरकार द्वारा घोषित मंहगाई राहत की दरों से अणिक दर घोषित नहीं करेगा। उक्त आदेश जारी होने की दिनांक से प्रभावशील रहेगा।
मध्यप्रदेश शासन के वित्त विभाग द्वारा उक्त आदेश 17 जुलाई 2026 को जारी किया गया। इस आदेश के दूरगामी परिणाम होंगे। पहले दोनों राज्य सरकार जब भी अपने कर्मचारियों के लिए महंगााई भत्ता घोषित करती थी तो आदेश के दिनांक से कर्मचारियों को मंहगाई भत्ते का लाभ मिल जाया करता था। किन्तु पेंशनरों की महंगाई राहत की दरों में वृद्धि के लिए मध्यप्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ सरकार से सहमति मांगती थी। इसमें कई महीनों का समय लग जाता था। और जब भी छत्तीसगढ़ सरकार से सहमति प्राप्त होती थी, उस दिनांक से मध्यप्रदेश सरकार मंहगाई राहत का आदेश जारी करती थी। इसमें होता यह था कि जब भी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता मिलता था तो उसके कई महीनों बाद पेशनरों को महंगाई राहत मिल पाती थी। इससे पेंशनरों का काफी आर्थिक नुकसान होता था। यह नाइंसाफी पिछले कई सालों से चल रही थी।
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्य सरकारों ने मध्यप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49(6) को समाप्त या विलोपित नहीं किया है। कोई भी राज्य सरकार केन्द्र सरकार द्वारा बनाए गए अधिनियम को समाप्त या विलोपित नहीं कर सकती। यह अधिकार केन्द्र सरकार को ही है। इसलिए दोनों राज्य सरकारों ने बीच का रास्ता निकाला और उक्त आदेश के (ख) के द्वारा पेंशनरों को देय महंगाई राहत में वृद्धि हेतु विधायी संशोधन के स्थान पर दोनों राज्यों द्वारा सीधे कार्यकारी आदेश जारी किए गए।
मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों की सदाशयता से दोनों राज्यों के लाखों पेंशनरों को बड़ी राहत मिली है। इससे पेंशनरों की और पेंशनर संगठनों की 25 साल से चली आ रही मांग को दोनों राज्य सरकारों ने मानकर पेंशनरों को महंगाई राहत देने का आखिरकार रास्ता निकाल ही लिया। यदि दोनों राज्य सरकारें पेंशनरों के हित में मध्यप्रदेश पुनर्गठन 2000 की धारा 49 (6) को समाप्त करने संबंधी प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को भेजती तो इसमें कितना समय लगता ? इसकी कोई ग्यारंटी नहीं थी। इसलिए बहुत सोच समझकर दोनों राज्य सरकारों ने बीच का रास्ता निकालकर पेंशनरों के लिए सराहनीय कार्य किया है। इसके लिए दोनों राज्य सरकारों और मुख्यमंत्रियों को साधुवाद !