रतलाम / सैलाना। मध्यप्रदेश में डिजिटल सेवाओं को सरल और पारदर्शी बनाने के दावे किए जाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीकी और प्रशासनिक देरी कई प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के भविष्य पर भारी पड़ रही है। ताजा मामला रतलाम जिले के सैलाना निवासी हर्ष बैरागी का सामने आया है जिन्होंने NEET परीक्षा उत्तीर्ण कर चिकित्सा शिक्षा की दिशा में कदम बढ़ाया है लेकिन समग्र आईडी का KYC समय पर सत्यापित नहीं होने के कारण वे आय प्रमाण पत्र नहीं बनवा पा रहे हैं। इसका सीधा असर MBBS BAMS BHMS सहित अन्य मेडिकल कोर्सों की ऑनलाइन काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया पर पड़ रहा है।
प्रार्थी हर्ष बैरागी ने प्रशासन को दिए आवेदन में बताया कि उनके पिता मुकेश कुमार बैरागी की समग्र आईडी का KYC लगभग दो माह पहले कराया गया था लेकिन आज तक उसका वेरिफिकेशन लंबित है। नगर परिषद सैलाना में जानकारी लेने पर उन्हें बताया गया कि समग्र आईडी का सत्यापन कलेक्टर कार्यालय के ई-गवर्नेंस स्तर से लंबित है। सत्यापन नहीं होने के कारण आय प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहा है जिससे मेडिकल प्रवेश का ऑनलाइन आवेदन भरना मुश्किल हो गया है।
हर्ष का कहना है कि यदि प्रवेश प्रक्रिया की अंतिम तिथि निकल गई तो उनका एक पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद हो सकता है। एक छात्र जिसने कठिन परिश्रम से देश की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक NEET पास की हो उसे तकनीकी प्रक्रिया के कारण अपने भविष्य के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
यह मामला केवल एक छात्र तक सीमित नहीं माना जा सकता।
प्रदेशभर में अनेक विद्यार्थी समग्र आईडी KYC वेरिफिकेशन आय प्रमाण पत्र जाति प्रमाण पत्र मूल निवासी और अन्य आवश्यक दस्तावेज समय पर नहीं बनने की समस्या से जूझते हैं। उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में निर्धारित समय सीमा के कारण ऐसी प्रशासनिक देरी सीधे विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समग्र पोर्टल पर KYC सत्यापन की प्रक्रिया समयबद्ध और पूरी तरह जवाबदेह बनाई जाए तथा लंबित मामलों के लिए जिला स्तर पर विशेष हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएं तो हजारों विद्यार्थियों को राहत मिल सकती है। प्रवेश और छात्रवृत्ति जैसी प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाना भी आवश्यक है।
अब सवाल यह है कि जब सरकार युवाओं को डॉक्टर इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी बनने के लिए प्रोत्साहित कर रही है तो क्या केवल एक लंबित डिजिटल सत्यापन उनके सपनों पर ताला लगा देगा? प्रशासन से अपेक्षा है कि ऐसे मामलों का तत्काल निराकरण कर विद्यार्थियों का भविष्य सुरक्षित किया जाए ताकि किसी भी प्रतिभाशाली छात्र का एक वर्ष केवल फाइलों और पोर्टलों की देरी की भेंट न चढ़े।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत