जनसुनवाई पहुंचा मामला, पीड़ित ने पूछा भाई का मकान निजी मेरा सरकारी कैसे...?
मंदसौर। मल्हारगढ़ के ग्राम गरनाई से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। वर्षों से अपने पैतृक मकान में रह रहे एक परिवार को सरकारी रिकॉर्ड की कथित त्रुटि ने कागज़ों में ही बेघर बना दिया है। पीड़ित मदनलाल पिता श्यामलाल नाई का आरोप है कि उनके पास शासन द्वारा जारी सभी वैध दस्तावेज़ मौजूद हैं इसके बावजूद कम्प्यूटरीकृत खसरे में उनके मकान की भूमि को शासकीय भूमि दर्ज कर दिया गया है।
मदनलाल के अनुसार 08 फरवरी 2013 को न्यायालय तहसीलदार मल्हारगढ़ द्वारा प्रकरण क्रमांक 35/2011-12 में ग्राम गरनाई के आबादी खसरा क्रमांक 1010 में 30 वर्ग मीटर भूखंड का भूमिस्वामी अधिकार प्रमाण-पत्र जारी किया गया था। हैरानी की बात यह है कि ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में मकान क्रमांक 181, वार्ड क्रमांक 07 के रूप में उनका मकान दर्ज है, जबकि नवीन कम्प्यूटरीकृत खसरे में ब्लॉक क्रमांक 1010 प्लॉट क्रमांक 286 पर उनका नाम हटाकर भूमि को शासकीय दर्शा दिया गया है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि मदनलाल के सगे भाई रामप्रसाद का ठीक बगल में स्थित मकान निजी भूमि के रूप में सही दर्ज है, लेकिन मदनलाल की भूमि सरकारी कैसे हो गई? यदि एक ही क्षेत्र के अन्य रिकॉर्ड सही हैं तो केवल एक व्यक्ति के रिकॉर्ड में ऐसी गंभीर त्रुटि कैसे हो गई?
इस कथित गड़बड़ी के सामने आने के बाद पीड़ित ने 04 अगस्त 2026 को मंदसौर कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत को जन शिकायत क्रमांक 738035 के तहत दर्ज करते हुए आवश्यक कार्रवाई के लिए तहसील कार्यालय मल्हारगढ़ भेजा गया है।
पीड़ित मदनलाल का कहना है कि उनके पास तहसीलदार द्वारा जारी भूमिस्वामी अधिकार प्रमाण-पत्र, ग्राम पंचायत की अनुमति तथा वर्षों से निवास कर रहे है। इसके बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में हुई इस कथित लिपिकीय या डिजिटल त्रुटि के कारण उनका परिवार मानसिक तनाव और भविष्य की कानूनी परेशानियों का सामना कर रहा है।
अब इस मामले ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। जब शासन स्वयं भूमिस्वामी अधिकार प्रमाण-पत्र जारी करता है और पंचायत मकान निर्माण की अनुमति देती है, तो आखिर डिजिटल खसरे में भूमि को शासकीय किस आधार पर दर्ज किया गया? क्या यह गंभीर लापरवाही है या रिकॉर्ड संधारण में बड़ी चूक?
फिलहाल पूरे मामले पर निगाहें तहसील प्रशासन और राजस्व विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि दस्तावेज़ों की जांच में पीड़ित के दावे सही पाए जाते हैं तो संबंधित रिकॉर्ड में तत्काल संशोधन के साथ जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय किए जाने की मांग उठ सकती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस परिवार को समय रहते न्याय दिला पाता है या सरकारी रिकॉर्ड की यह कथित गलती एक परिवार के अधिकारों पर भारी पड़ती रहेगी।
रिपोर्ट: कमलेश शर्मा, जिला संवाददाता