रतलाम/सैलाना। ग्राम पंचायत सासर के अंतर्गत आने वाले मजरों में सड़क निर्माण एवं उन्हें राजस्व ग्राम घोषित किए जाने की मांग को लेकर सोमवार को ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्याएं रखीं। ग्रामीणों ने एसडीएम सैलाना सुनील जायसवाल के नाम तहसीलदार मनीष जैन को ज्ञापन सौंपकर वर्षों से चली आ रही समस्याओं के तत्काल निराकरण की मांग की।
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत सासर की कुल आबादी करीब 4000 है और पंचायत का क्षेत्र लगभग 5 किलोमीटर तक फैला हुआ है। वर्तमान में पंचायत के अंतर्गत सासर ही राजस्व ग्राम है जबकि अन्य करीब सात गांवों को मजरे का दर्जा दिया गया है। इनमें पीपलीपाड़ा पागड्रियामोवड़ी मन्याबारी नया टापरा केदारगढ़ देवरुंडा और दौलतपुरा सहित अन्य मजरे शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन मजरों में प्रत्येक स्थान पर लगभग 400 से 700 तक की आबादी निवास करती है। पर्याप्त जनसंख्या होने के बावजूद आजादी के करीब 80 वर्ष बाद भी ग्रामीणों को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि सामान्य दिनों में भी कच्चे रास्तों से आवागमन करना मुश्किल रहता है लेकिन बारिश के मौसम में समस्या और गंभीर हो जाती है। रास्ते कीचड़ से भर जाते हैं और कई स्थानों पर आवागमन बंद होने की स्थिति बन जाती है। बीमार व्यक्ति गर्भवती महिलाएं और प्रसूताएं सबसे अधिक परेशान होती हैं। खराब रास्तों के कारण कई बार एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में मरीजों को मुख्य मार्ग तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को अतिरिक्त प्रयास करना पड़ता है।
इसके अलावा ग्रामीणों को बाजार से खाद्यान्न घरेलू उपयोग की सामग्री कृषि संबंधी सामान और अन्य जरूरी वस्तुएं लाने ले जाने में भी परेशानी होती है। खराब रास्तों के कारण ग्रामीणों का समय और धन दोनों खर्च होता है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि तीन दिन में राजस्व ग्राम और सड़क निर्माण के संबंध में ठोस जवाब नहीं मिला तो चौथे दिन आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों ने सैलाना शिवगढ़ रोड पर चक्काजाम करने की चेतावनी दी है। साथ ही छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ग्रामीणों के भूख हड़ताल पर बैठने की बात कही गई है।
ग्रामीणों ने मांग की कि सभी मजरों का प्रशासनिक स्तर पर तत्काल सर्वे कराया जाए और सड़क निर्माण अथवा डामरीकरण के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृति दी जाए। इसके साथ ही जिन मजरों में राजस्व ग्राम घोषित किए जाने के मापदंड पूरे होते हैं उनकी प्रक्रिया जल्द पूरी कर उन्हें राजस्व ग्राम का दर्जा दिया जाए।
विधायक कमलेश्वर डोडियार सै इस मामले को लेकर चर्चा की तो कहा कि ग्राम पंचायत सासर के मजरों में आजादी के इतने वर्षों बाद भी पक्की सड़क न होना और एंबुलेंस तक का नहीं पहुंच पाना बेहद चिंताजनक है। ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं और शासकीय योजनाओं का पूरा लाभ दिलाने के लिए इन मजरों को राजस्व ग्राम का दर्जा मिलना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरे मामले को गंभीरता से लिया है और प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर सड़क निर्माण की स्वीकृति की मांग की है। क्षेत्र की जनता के इस हक की लड़ाई को विधानसभा से लेकर शासन स्तर तक प्रमुखता से उठाया जाएगा।
तहसीलदार मनीष जैन ने कहा कि ग्राम पंचायत सासर के विभिन्न मजरों के ग्रामीणों द्वारा सड़क निर्माण और राजस्व ग्राम घोषित करने के संबंध में आवेदन प्राप्त हुआ है। बारिश के मौसम में आवागमन में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए मामले को प्राथमिकता पर लिया गया है। संबंधित पटवारी और राजस्व टीम को मौके पर जाकर त्वरित सर्वे करने के निर्देश जारी किए जा रहे हैं। नियमानुसार आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को प्रेषित की जाएगी ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
ज्ञापन सौंपने के दौरान सरपंच कुंवरी मईडा सरपंच प्रतिनिधि राजेश मईडा जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशुभाई निनामा पूर्व सरपंच कमजी मईडा वसीग गामड़ ईश्वर चरपोटा धन्नालाल झोड़िया बद्री मईडा कैलाश मईडा राकेश कटारा शंकर कटारा बापू भगत कटारा ईश्वर खराड़ी गणेश भगोरा विक्रम प्रदीप गजेंद्र बदा पटेल गुड्डा कालू झोड़िया राजू संतोष सूजन गौतम और पुनाजी सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग किसी राजनीतिक लाभ की नहीं बल्कि सड़क स्वास्थ्य सुविधा सुगम आवागमन और प्रशासनिक पहचान जैसी मूलभूत जरूरतों से जुड़ी है। अब सभी की निगाहें तहसीलदार द्वारा तीन दिन में दिए जाने वाले जवाब और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
रिपोर्टर — जितेन्द्र कुमावत