रतलाम/सैलाना। ग्राम पंचायत बेड़दा के ग्राम देवडूंगरा स्थित छात्रावास में बच्चों के साथ कथित मारपीट और अव्यवस्थाओं का मामला सामने आने के बाद सोमवार को हड़कंप मच गया। छात्रावास में परेशानियों और अधीक्षक की कथित मनमानी से नाराज छात्र पैदल ही करीब 70 किलोमीटर दूर रतलाम कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्याएं बताने के लिए निकल पड़े। छात्र करीब 10 किलोमीटर तक पैदल चल चुके थे। इसी दौरान मामले की जानकारी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को मिली।
जानकारी मिलते ही जिला शिक्षा समिति अध्यक्ष एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशु निनामा तथा जिला पंचायत सदस्य चंदू मईड़ा मौके पर पहुंचे और रास्ते में छात्रों को रोककर उनकी समस्याएं सुनीं। बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि भी मौके पर जमा हो गए। प्रशासन को सूचना मिलते ही एसडीएम सैलाना सुनील जायसवाल और तहसीलदार मनीष जैन सहित प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ।
बताया गया कि छात्रों ने छात्रावास अधीक्षक जीवराम मईड़ा पर बच्चों के साथ मारपीट और प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। छात्रों के अनुसार गत 16 अगस्त को एक छात्र के साथ चांटे मारने की घटना सामने आई थी। इसके बाद छात्रों में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने अपनी शिकायत सीधे जिला प्रशासन तक पहुंचाने का निर्णय लिया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रावास का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान छात्रावास में कई अव्यवस्थाएं सामने आने की बात कही गई। छात्रों को मीनू के अनुसार भोजन नहीं मिलने, साफ-सफाई की कमी तथा बाथरूम के नल, दरवाजे और खिड़कियां टूटे होने जैसी समस्याएं सामने आईं। भोजन व्यवस्था में हरी सब्जियां और फल सहित निर्धारित मीनू का पालन कराने के निर्देश दिए गए।
निरीक्षण के दौरान एसी ट्राइबल प्रियंका, पटवारी सहित अन्य प्रशासनिक कर्मचारी मौजूद रहे। बाद में एसडीएम सुनील जायसवाल ने भी मौके पर पहुंचकर छात्रों और ग्रामीणों से चर्चा की तथा पूरी स्थिति की जानकारी ली।
प्रशासन की ओर से छात्रावास की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए तत्काल निर्देश दिए गए हैं। साथ ही वर्तमान अधीक्षक को हटाने की कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने अगले दो दिनों में भोजन, साफ-सफाई और आवश्यक मरम्मत व्यवस्था दुरुस्त कराने का आश्वासन दिया है। मामले का विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर जिला मुख्यालय भेजे जाने की बात भी सामने आई है।
छात्रों के पैदल रतलाम जाने की सूचना के बाद प्रशासन की सक्रियता से मामला मौके पर ही संभाल लिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि छात्रावास में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा और बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित होना बेहद जरूरी है। वहीं प्रशासन की जांच के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लापरवाही के आरोपों पर आगे क्या कार्रवाई होती है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत