रतलाम। राजस्थान के वीरशिरोमणि, गौ-रक्षक, सामाजिक समरसता के जनक एवं वाल्मीकि समाज के आराध्य लोकदेवता श्री गोगावीर चौहान का जन्मोत्सव गोगा नवमी पर्व शनिवार, 5 सितंबर को रतलाम में पारंपरिक श्रद्धा, आस्था और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। रियासतकाल से चली आ रही इस ऐतिहासिक धार्मिक एवं सामाजिक परंपरा के तहत शहर में भव्य छड़ी-निशान शोभायात्रा निकाली जाएगी।
वाल्मीकि समाज के नगर पुरोहित पं. शिवपाल छप्री ने बताया कि इस वर्ष शहर के पांचों मोहल्लों से लगभग 20 से 22 छड़ी-निशान शोभायात्रा के रूप में निकलेंगे। वहीं सुभाष नगर एवं नयापुरा बस्ती से आकर्षक, मनमोहक एवं सुंदर सजी-धजी झांकियां भी शोभायात्रा की शोभा बढ़ाएंगी।
पूर्व में सभी छड़ी-निशान डालूमोदी बाजार में एकत्रित होते थे, लेकिन शहर के बढ़ते विस्तार एवं आबादी को देखते हुए अब सभी छड़ियां और निशान दोबत्ती स्थित रतलाम सरकार के घोड़े के पास एकत्रित होंगे। यहां विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं धार्मिक संस्थाओं द्वारा स्वागत मंच बनाए जाएंगे, जहां छड़ीधारी भगतों, उस्तादों एवं खलीफाओं का आत्मीय स्वागत-अभिनंदन किया जाएगा।
शाम 7 बजे पूजा-अर्चना के बाद शुरू होगा कारवां
इस बार सभी छड़ीदार भगतों एवं आयोजन समितियों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया है कि शाम 7 बजे संध्या पूजा, आराधना एवं सेवा-बंदगी के पश्चात सभी छड़ियां अपनी-अपनी मेडियों से निकलकर शोभायात्रा के रूप में शहर के प्रमुख स्वागत स्थल की ओर प्रस्थान करेंगी। इसका उद्देश्य यह है कि रात्रि अधिक होने से पहले शहरवासी इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक उत्सव में शामिल होकर अपनी सहभागिता निभा सकें।
शोभायात्रा के दौरान शहर के विभिन्न स्थानों पर बनाए गए स्वागत मंचों पर सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं द्वारा छड़ी-निशानों का वंदन-अभिनंदन और पुष्पवर्षा कर स्वागत किया जाएगा। धार्मिक जयकारों, पारंपरिक श्रद्धा और आकर्षक झांकियों से शहर का वातावरण भक्तिमय होने की उम्मीद है।
शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से भ्रमण करते हुए कालिका माता मंदिर क्षेत्र एवं झाली तालाब, रतलाम पहुंचेगी, जहां परंपरानुसार छड़ी-निशानों का विसर्जन किया जाएगा।
गोगा नवमी का यह आयोजन केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि रतलाम की वर्षों पुरानी सामाजिक एकता, भाईचारे और समरसता की जीवंत परंपरा का प्रतीक भी है।