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चीताखेड़ा विश्व को सत्य व अहिंसा का संदेश देने वाले आजादी के महानायक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर जीरन में शुक्रवार को स्थापित गांधी जी की प्रतिमा को गांव के वरिष्ठ कांग्रेसीयों व गणमान्यजनों ने दिप प्रज्वलित एवं माल्यार्पण कर गांधी जी को याद किया। सत्य अहिंसा और स्वच्छता के पुजारी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा सादगी ईमानदारी और राष्ट्र सेवा के प्रति पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के इस पावन अवसर पर नगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राकेश मेरावत व मंडलम अध्यक्ष शांतिलाल राठौर, यशवंत सगवारिया, पार्षद पवन शर्मा, मदनलाल प्रजापत, राम प्रहलाद राठौर, मनसुख भूत, जनपद पंचायत सदस्य रामनारायण जाट उर्फ टीपू, ज्ञानेश कुमार जारेरिया, महेश मेरावत जितेन्द्र मेरावत, मुकेश मेडिवाले, कमलेश अहिरवार, बद्रीलाल इंदौर, लीलाधर, जितेंद्र बैरागी,फारुख मंसूरी, प्रेमसुख सगवारिया, मनोज मालवीय, रामप्रसाद अहिरवार,हिरालाल अहिरवार, भेरुलाल अहिरवार सहित कांग्रेस के गणमान्य लोग उपस्थित थे। नगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष राकेश मेरावत ने गांधी जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा की पुरे हिन्दुस्तान में एक मात्र महात्मा गांधी ही एक ऐसे नेता थे जिन्होंने बिना ढाल -खडक और खून बहाएं बिना अग्रेंजो को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। गांधी जी चाहते तो वो भी सूट-बूट पहन सकते थे पर उन्होंने बिना सूट-बूट के एक धोती में ही अहिंसा पूर्वक बिना खून खराबा के अंग्रेजों को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया। गांधी जी का मामना था कि स्कूलों को आत्मनिर्भर होना चाहिए। मंडलम अध्यक्ष शांतिलाल राठौर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गांधीजी मानवता और राजनीति दोनों के लिए अपरिहार्य है। गांधीजी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं के खिलाफ कार्रवाई करके अपने आस-पास की दुनिया को बदलने का दृष्टिकोण रखते थे। पार्षद पवन शर्मा ने गांधीजी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिस समय गांधीजी भारत में सामाजिक क्रांति की बुनियाद खड़ी कर रहे थे उस समय भारत की आंतरिक समस्याओं में ऊंचे- नीच छुआछूत इत्यादि समस्याओं की जड़ें बहुत गहरे में जमी हुई थी। इस अवसर पर गांव के कई नागरिक मौजूद थे। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |