रतलाम। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल कर रोजगार या धन अर्जित करना नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र, संस्कार, विचार और जीवन मूल्यों का निर्माण करना भी है। इसी विचार को केंद्र में रखते हुए आर्ष विद्याकुलम् द्वारा आयोजित महत्वपूर्ण कार्यक्रम ‘शिक्षा संवाद 3.0’ का आयोजन रतलाम स्थित दयाल वाटिका में किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे शिक्षाविदों ने शिक्षा व्यवस्था में मानवीय मूल्यों के समावेश की आवश्यकता पर विस्तार से विचार रखे।
संवाद के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा को केवल आर्थिक सफलता तक सीमित कर देना उसके व्यापक उद्देश्य को छोटा करना है। शिक्षा का प्राथमिक उद्देश्य जीवन निर्माण और व्यक्तित्व विकास होना चाहिए, जबकि धनार्जन उसका गौण उद्देश्य है। यदि शिक्षा में संस्कार, संवेदना, सामाजिक जिम्मेदारी और नैतिक मूल्यों को स्थान दिया जाए तो समाज को अधिक जिम्मेदार और सशक्त नागरिक मिल सकते हैं।
कार्यक्रम में महिला उत्थान, युवाओं को नशे से दूर रखने, चरित्र निर्माण तथा समाज को सकारात्मक दिशा देने में शिक्षा की भूमिका पर भी विशेष चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि युवा पीढ़ी को केवल प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने के बजाय उसे जीवन की चुनौतियों से मुकाबला करने के लिए वैचारिक और नैतिक रूप से मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण कुलपति श्रद्धेय योगेश भारद्वाज रहे। शिक्षा के क्षेत्र में उनके गहन अध्ययन और चिंतन को कार्यक्रम में विशेष महत्व मिला। उपस्थित शिक्षाविदों ने माना कि शिक्षा में जीवन मूल्यों को केंद्र में लाने की दिशा में ऐसे संवाद नई सोच और व्यापक परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री नरेंद्र मुनि एवं श्री जगजीत आर्य ने की। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र एवं मध्यप्रदेश से पहुंची शिक्षाविदों की टीम में आचार्य योगेश वैदिक, आचार्य प्रशांत, डॉ. अमरजीत विद्यार्थी, डॉ. दीप्ति आर्या, विदुषी आर्यवीरा, श्री कृतेश पटेल एवं मोहित गौड़ सहित अन्य प्रमुख व्यक्तित्व शामिल रहे। वहीं गणमान्य आमंत्रित अतिथि श्री तुफैल चतुर्वेदी भी कार्यक्रम के आकर्षण का केंद्र रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में रतलाम, सैलाना, धामनोद, खाचरौद, बूढ़ा, नागदा, उज्जैन सहित विभिन्न स्थानों से पहुंचे कार्यकर्ताओं ने सहयोग प्रदान किया। आयोजन के दौरान शिक्षा को समाज परिवर्तन का माध्यम बनाने की दिशा में निरंतर संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर ‘शिक्षा संवाद 4.0’ के आयोजन की जिम्मेदारी असम को दिए जाने की जानकारी भी साझा की गई। इस तरह रतलाम में हुआ शिक्षा संवाद 3.0 केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा के मूल उद्देश्य को लेकर नई सोच और व्यापक सामाजिक विमर्श की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत