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विशेष आलेख नवरात्रि का पावन पर्व आदिशक्ति की आराधना और भक्ति का पर्व है। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मालवा अंचल में स्थित एक ऐसा दिव्य और आस्था का प्रमुख केंद्र श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है, जिसे मालवा की वैष्णो देवी और आरोग्य तीर्थ के नाम से भी जाना जाता है — महामाया मां भादवा माता धाम। नीमच जिला मुख्यालय से लगभग 18 से 20 किलोमीटर दूर भादवा गांव में स्थित यह प्राचीन मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि भादवा गांव में स्थित होने के कारण ही माता का नाम भादवा माता पड़ा। 500 से 800 वर्ष पुराना इतिहास और भील परंपरा की अनूठी विरासत भादवा माता मंदिर का इतिहास लगभग 500 से 800 वर्ष पुराना माना जाता है। प्रचलित किवदंती के अनुसार, मां भादवा ने एक भील भक्त के स्वप्न में प्रकट होकर बताया था कि उनकी प्रतिमा अरणी के पेड़ के नीचे विराजमान है। इसके बाद की गई खुदाई में माता की दिव्य प्रतिमा प्राप्त हुई और यहां मंदिर की स्थापना हुई। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार, मेवाड़ के महाराणा मोकल माता के चमत्कारों से प्रभावित हुए और संवत 1482 में यहां पूजा-अर्चना का अधिकार भील समुदाय को प्रदान किया। यह परंपरा आज भी श्रद्धा और निष्ठा के साथ आगे बढ़ रही है तथा भील परिवार के पुजारी माता की सेवा और पूजा-अर्चना का दायित्व निभा रहे हैं। यह परंपरा सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करती है। मंदिर के गर्भगृह में मां भादवा माता चांदी के सिंहासन पर विराजमान हैं। उनके साथ नवदुर्गा के नौ स्वरूप भी विराजित हैं। गर्भगृह में वर्षों से अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। आरोग्य की देवी और अमृत बावड़ी से जुड़ी आस्था भादवा माता को श्रद्धालु आरोग्य की देवी के रूप में पूजते हैं। मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन बावड़ी को अमृत बावड़ी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस बावड़ी के जल में स्नान करने, आचमन करने तथा रोगग्रस्त अंग पर भस्म का लेपन और धागा या कलावा बांधने से विभिन्न रोगों से मुक्ति मिलती है। इसी आस्था के चलते वर्षभर बड़ी संख्या में रोगों से पीड़ित श्रद्धालु माता के दरबार में पहुंचते हैं और कुछ श्रद्धालु मंदिर परिसर में रहकर अपनी मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं। कई भक्त अमृत बावड़ी का जल बोतलों में भरकर अपने घर भी ले जाते हैं। मंदिर की एक विशेष परंपरा यह भी है कि यहां किसी जीव की बलि नहीं दी जाती। श्रद्धालु माता को हार, फूल, नारियल, चिरौंजी के दाने, लड्डू और मठरी सहित विभिन्न प्रसाद अर्पित करते हैं। नवरात्रि में उमड़ता है आस्था का जनसैलाब शारदीय नवरात्रि के अवसर पर भादवा माता धाम में 10 दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि अष्टमी के अवसर पर यहां आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ता है। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन नीमच द्वारा बिजली, पेयजल, टेंट, सीसीटीवी कैमरे, साफ-सफाई, पार्किंग और स्वास्थ्य सुविधाओं सहित विभिन्न व्यवस्थाएं की जाती हैं। भव्य स्वरूप में विकसित हो रहा भादवा माता धाम मध्यप्रदेश शासन द्वारा भादवा माता तीर्थ को लोक कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्य पर्यटन विकास निगम तथा भादवा माता संस्थान के माध्यम से किए जा रहे हैं। जनभागीदारी और समाजसेवी अरोरा गंगानगर परिवार, नीमच के सहयोग से महामाया मां भादवा माता मंदिर का स्वरूप और अधिक भव्य एवं आकर्षक होता जा रहा है। मंदिर के जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के कार्यों के फलस्वरूप श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने लगी हैं। मंदिर परिसर में जनसुविधाओं के विकास और विस्तार के साथ यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी निरंतर वृद्धि हो रही है। भादवा माता धाम आज न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि मालवा की समृद्ध लोक परंपरा, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है। आस्था के इस पावन धाम को कोटि-कोटि नमन भक्तों के कष्ट हरने और रोगों से मुक्ति की मनोकामना लेकर आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का यह पावन केंद्र सदियों से मां भादवा माता की भक्ति और विश्वास की ज्योति प्रज्ज्वलित किए हुए है। महामाया मां भादवा माताजी को कोटि-कोटि नमन, वंदन एवं प्रणाम। जय माता दी। भक्त — जगदीश चंद्र मालवीय आगर-मालवा |