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  • धर्म : बीजा नगरी में प्राचीनकाल से प्रज्वलित है आस्था की अखंड ज्योत - श्री हरसिद्धि माता मंदिर

    SSE NEWS NETWORK   - आगर मालवा
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    धर्म   - आगर मालवा[13-10-2026]
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  • शारदीय नवरात्रि विशेष 

    आगर जिले का धार्मिक पर्यटन स्थल (बीजानगरी)


    आगर-मालवा जिले के बड़ौद विकासखंड से 18 किलोमीटर दूर तथा जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर ग्राम बीजानगरी में श्री हरसिद्धि माता का प्राचीन मंदिर स्थित है। यह मंदिर उज्जैन की प्रसिद्ध हरसिद्धि माता का द्वितीय स्वरूप एवं छोटी बहन के रूप में पूजित है तथा राज्य शासन द्वारा राज्य संरक्षित स्मारक घोषित है।
    पौराणिक महत्व एवं स्थापत्य
     पुरातत्व विभाग, भोपाल के बोर्ड के अनुसार मंदिर के बाह्य मुख पर लगे शिलालेख से ज्ञात होता है कि यह मंदिर भूमिज शैली में निर्मित है तथा घट-पल्लव आकृतियों से सुसज्जित है। आधार योजना में गर्भगृह, मंडप, जंघा, कटि, स्कन्ध, शिखर एवं कलश इसकी विशेषता हैं। परिसर में वामन, शेषशायी विष्णु, ब्रह्मा, लक्ष्मीनारायण, गणेश, कार्तिकेय, शिव-उमा-महेश्वर आदि की प्राचीन प्रतिमाओं के अवशेष प्राप्त हुए हैं, जो यह सिद्ध करते हैं कि यहाँ पूर्व में अत्यंत भव्य एवं विशाल मंदिर रहा होगा। इतिहासकारों के अनुसार यह मंदिर मध्यकालीन 10वीं शताब्दी में निर्मित है।
     शास्त्रों के अनुसार उज्जैन में माता सती के दाहिने हाथ की कोहनी गिरी थी, जहाँ हरसिद्धि शक्तिपीठ बना। स्थानीय इतिहास राजा विक्रमादित्य के भानजे राजा विजय सिंह से जुड़ा है, जिन्होंने 12 वर्ष की साधना के बाद माता के स्वप्न आदेश पर नदी तट पर मंदिर बनवाया। राजा ने पूर्वमुखी मंदिर बनवाया था, पर प्रातः उसका द्वार स्वतः पश्चिममुखी हो गया।
    मान्यताएँ एवं परंपराएँ
      क्षेत्र के श्रद्धालुओं के अनुसार मंदिर में प्राचीनकाल से ही अखंड ज्योत प्रज्वलित है, जो तेज आंधी में भी नहीं बुझती। माता की प्रतिमा दिन में तीन रूप बदलती है - प्रातः बाल रूप, दोपहर युवा रूप एवं सायं वृद्धा रूप। यह वैष्णव मंदिर है, पूजा सात्विक है।
    मंदिर की दो विशेष परंपराएँ हैं -
     मनोकामना हेतु प्रांगण में गोबर की सातियों को उल्टा रखना और पूर्ण होने पर सीधा करना, तथा नवरात्रि में घट स्थापना से अष्टमी तक नारियल न फोड़ना। अखंड ज्योत हेतु सामान्य दिनों में डेढ़ क्विंटल तथा नवरात्रि में 10 से 25 क्विंटल तेल लगता है।

    जन सहयोग के प्रमाण - शिलालेख जन आस्था के साक्षी हैं -
      स्व. श्री कमलाबाई जिनकी कोई संतान नहीं थी, उनकी इच्छानुसार लसुड़िया केलवा स्थित ससुराल की जमीन बेचकर प्राप्त राशि ₹ 3,61,000 से 17-12-2020 को मंदिर मार्ग पर भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण बीजानगरी के वसूली पटेल ठा. जसवंत सिंह की राय से व भतीजे सरदार सिंह, हरि सिंह लोहार के सहयोग से कराया गया है। 
            मंदिर के मुख्य पुजारी श्री कालूराम जी व्यास एवं श्री रामचंद्र जी व्यास हैं, जिनका परिवार स्थापना काल से ही पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा करता आ रहा है। वर्तमान पुजारी पं. मोहन व्यास एवं पं.सोनू व्यास ने बताया कि पूरे ग्रामवासी मिलकर अखंड ज्योति जलाते हैं तथा माता के जल से रोगियों के स्वस्थ होने की मान्यता है। 
           चौमेला राजस्‍थान से आएं दर्शनार्थी श्री नरेश निगम ने बताया कि माता की उनके परिवार पर असीम कृपा रही है। उनकी बेटी को माताजी के आशीर्वाद से ही संतान सुख मिला है। उन्‍होंने कहा कि जब उनकी बेटी को संतान के रूप में बेटे का जन्‍म हुआ, तो लखनउ के चिकित्‍सकों ने शिशु के दिल में छेद होने के बारे में बताया। फिर उन्‍होंने ने माता हरसिद्धी  से जच्‍चा-बच्‍चा के स्‍वस्‍थ्‍य होने की प्रार्थना की और माताजी के आशीर्वाद से ही कुछ दिनों बाद शिशु की पुन: जांच करवाई तो वह स्‍वस्‍थ्‍य पाया गया। आज मॉं-बेटा दोनों स्‍वस्‍थ्‍य है। 
    जैसा कि मंदिर के पूजारी पंडित मोहनलाल व्‍यास एवं सोनू व्‍यास ने बताया।

    ✍.... जगदीश चंद्र मालवीय, 
    आगर मालवा







  • धर्म : बीजा नगरी में प्राचीनकाल से प्रज्वलित है आस्था की अखंड ज्योत - श्री हरसिद्धि माता मंदिर

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    धर्म   - आगर मालवा[13-10-2026]
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    शारदीय नवरात्रि विशेष 

    आगर जिले का धार्मिक पर्यटन स्थल (बीजानगरी)


    आगर-मालवा जिले के बड़ौद विकासखंड से 18 किलोमीटर दूर तथा जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर ग्राम बीजानगरी में श्री हरसिद्धि माता का प्राचीन मंदिर स्थित है। यह मंदिर उज्जैन की प्रसिद्ध हरसिद्धि माता का द्वितीय स्वरूप एवं छोटी बहन के रूप में पूजित है तथा राज्य शासन द्वारा राज्य संरक्षित स्मारक घोषित है।
    पौराणिक महत्व एवं स्थापत्य
     पुरातत्व विभाग, भोपाल के बोर्ड के अनुसार मंदिर के बाह्य मुख पर लगे शिलालेख से ज्ञात होता है कि यह मंदिर भूमिज शैली में निर्मित है तथा घट-पल्लव आकृतियों से सुसज्जित है। आधार योजना में गर्भगृह, मंडप, जंघा, कटि, स्कन्ध, शिखर एवं कलश इसकी विशेषता हैं। परिसर में वामन, शेषशायी विष्णु, ब्रह्मा, लक्ष्मीनारायण, गणेश, कार्तिकेय, शिव-उमा-महेश्वर आदि की प्राचीन प्रतिमाओं के अवशेष प्राप्त हुए हैं, जो यह सिद्ध करते हैं कि यहाँ पूर्व में अत्यंत भव्य एवं विशाल मंदिर रहा होगा। इतिहासकारों के अनुसार यह मंदिर मध्यकालीन 10वीं शताब्दी में निर्मित है।
     शास्त्रों के अनुसार उज्जैन में माता सती के दाहिने हाथ की कोहनी गिरी थी, जहाँ हरसिद्धि शक्तिपीठ बना। स्थानीय इतिहास राजा विक्रमादित्य के भानजे राजा विजय सिंह से जुड़ा है, जिन्होंने 12 वर्ष की साधना के बाद माता के स्वप्न आदेश पर नदी तट पर मंदिर बनवाया। राजा ने पूर्वमुखी मंदिर बनवाया था, पर प्रातः उसका द्वार स्वतः पश्चिममुखी हो गया।
    मान्यताएँ एवं परंपराएँ
      क्षेत्र के श्रद्धालुओं के अनुसार मंदिर में प्राचीनकाल से ही अखंड ज्योत प्रज्वलित है, जो तेज आंधी में भी नहीं बुझती। माता की प्रतिमा दिन में तीन रूप बदलती है - प्रातः बाल रूप, दोपहर युवा रूप एवं सायं वृद्धा रूप। यह वैष्णव मंदिर है, पूजा सात्विक है।
    मंदिर की दो विशेष परंपराएँ हैं -
     मनोकामना हेतु प्रांगण में गोबर की सातियों को उल्टा रखना और पूर्ण होने पर सीधा करना, तथा नवरात्रि में घट स्थापना से अष्टमी तक नारियल न फोड़ना। अखंड ज्योत हेतु सामान्य दिनों में डेढ़ क्विंटल तथा नवरात्रि में 10 से 25 क्विंटल तेल लगता है।

    जन सहयोग के प्रमाण - शिलालेख जन आस्था के साक्षी हैं -
      स्व. श्री कमलाबाई जिनकी कोई संतान नहीं थी, उनकी इच्छानुसार लसुड़िया केलवा स्थित ससुराल की जमीन बेचकर प्राप्त राशि ₹ 3,61,000 से 17-12-2020 को मंदिर मार्ग पर भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण बीजानगरी के वसूली पटेल ठा. जसवंत सिंह की राय से व भतीजे सरदार सिंह, हरि सिंह लोहार के सहयोग से कराया गया है। 
            मंदिर के मुख्य पुजारी श्री कालूराम जी व्यास एवं श्री रामचंद्र जी व्यास हैं, जिनका परिवार स्थापना काल से ही पीढ़ी-दर-पीढ़ी पूजा करता आ रहा है। वर्तमान पुजारी पं. मोहन व्यास एवं पं.सोनू व्यास ने बताया कि पूरे ग्रामवासी मिलकर अखंड ज्योति जलाते हैं तथा माता के जल से रोगियों के स्वस्थ होने की मान्यता है। 
           चौमेला राजस्‍थान से आएं दर्शनार्थी श्री नरेश निगम ने बताया कि माता की उनके परिवार पर असीम कृपा रही है। उनकी बेटी को माताजी के आशीर्वाद से ही संतान सुख मिला है। उन्‍होंने कहा कि जब उनकी बेटी को संतान के रूप में बेटे का जन्‍म हुआ, तो लखनउ के चिकित्‍सकों ने शिशु के दिल में छेद होने के बारे में बताया। फिर उन्‍होंने ने माता हरसिद्धी  से जच्‍चा-बच्‍चा के स्‍वस्‍थ्‍य होने की प्रार्थना की और माताजी के आशीर्वाद से ही कुछ दिनों बाद शिशु की पुन: जांच करवाई तो वह स्‍वस्‍थ्‍य पाया गया। आज मॉं-बेटा दोनों स्‍वस्‍थ्‍य है। 
    जैसा कि मंदिर के पूजारी पंडित मोहनलाल व्‍यास एवं सोनू व्‍यास ने बताया।

    ✍.... जगदीश चंद्र मालवीय, 
    आगर मालवा





  • धर्म: आगर-मालवा की आस्था का केंद्र है, माँ तुलजा भवानी मंदिर गुफा बर्डा ...आगर मालवा की पहाड़ियों में छुपा आस्था का चमत्कार....दिन में तीन रूप बदलने वाली माँ तुलजा भवानी.....उज्जैन तक जाती रहस्यमयी गुफा की गाथा

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    धर्म   - आगर मालवा[12-10-2026]
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  • धर्म: आगर-मालवा की आस्था का केंद्र है, माँ तुलजा भवानी मंदिर गुफा बर्डा ...आगर मालवा की पहाड़ियों में छुपा आस्था का चमत्कार....दिन में तीन रूप बदलने वाली माँ तुलजा भवानी.....उज्जैन तक जाती रहस्यमयी गुफा की गाथा

    आगर-मालवा की आस्था का केंद्र है, माँ तुलजा भवानी मंदिर गुफा बर्डा ...आगर मालवा की पहाड़ियों में छुपा आस्था का चमत्कार....दिन में तीन रूप बदलने वाली माँ तुलजा भवानी.....उज्जैन तक जाती रहस्यमयी गुफा की गाथा
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  • शारदीय नवरात्रि विशेष : माँ पीताम्बरा की सिद्धस्थली: विश्वविख्यात माँ बगलामुखी धाम, नलखेड़ा

    शारदीय नवरात्रि विशेष :
    धर्म   - आगर मालवा[09-10-2026]
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  • शारदीय नवरात्रि विशेष : माँ पीताम्बरा की सिद्धस्थली: विश्वविख्यात माँ बगलामुखी धाम, नलखेड़ा

       माँ पीताम्बरा की सिद्धस्थली: विश्वविख्यात माँ बगलामुखी धाम, नलखेड़ा
    धर्म   - आगर मालवा[09-10-2026]
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  • धर्म: व्हीलचेयर पर आते हैं लकवा पीड़ित, मां भादवा की कृपा से पैदल लौटने की आस्था.....धर्म, आस्था और विश्वास की त्रिवेणी है महामाया मां भादवा माता धाम

    धर्म:
    धर्म   - नीमच[08-10-2026]
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  • धर्म: व्हीलचेयर पर आते हैं लकवा पीड़ित, मां भादवा की कृपा से पैदल लौटने की आस्था.....धर्म, आस्था और विश्वास की त्रिवेणी है महामाया मां भादवा माता धाम

    व्हीलचेयर पर आते हैं लकवा पीड़ित, मां भादवा की कृपा से पैदल लौटने की आस्था.....धर्म, आस्था और विश्वास की त्रिवेणी है महामाया मां भादवा माता धाम
    धर्म   - नीमच[08-10-2026]
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  • आगर : चमत्कारों की नगरी - जहाँ स्वयं बाबा बैजनाथ ने लड़ा भक्त का मुकदमा.......बाबा बैजनाथ धाम की पावन धरा पर घटित अलौकिक घटना आज भी है आस्था का जीवंत प्रमाण

    आगर :
    धर्म   - आगर मालवा[04-10-2026]
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  • आगर : चमत्कारों की नगरी - जहाँ स्वयं बाबा बैजनाथ ने लड़ा भक्त का मुकदमा.......बाबा बैजनाथ धाम की पावन धरा पर घटित अलौकिक घटना आज भी है आस्था का जीवंत प्रमाण

     चमत्कारों की नगरी - जहाँ स्वयं बाबा बैजनाथ ने लड़ा भक्त का मुकदमा.......बाबा बैजनाथ धाम की पावन धरा पर घटित अलौकिक घटना आज भी है आस्था का जीवंत प्रमाण
    धर्म   - आगर मालवा[04-10-2026]
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  • धर्म: 10 दिनों बाद गौरी पुत्र गणेश कुछ स्थानों से आज लोटें तो कुछ स्थानों से कल शनिवार को लोटेंगे अपने धाम

    धर्म:
    धर्म   - नीमच[25-09-2026]
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  • धर्म: 10 दिनों बाद गौरी पुत्र गणेश कुछ स्थानों से आज लोटें तो कुछ स्थानों से कल शनिवार को लोटेंगे अपने धाम

    10 दिनों बाद गौरी पुत्र गणेश कुछ स्थानों से आज लोटें तो कुछ स्थानों से कल शनिवार को लोटेंगे अपने धाम
    धर्म   - नीमच[25-09-2026]
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  • धर्म: लोकदेवता भगवान वीर तेजाजी के जन्मोत्सव पर भड़क सनावदा गांव में उमड़ी भक्ति.....सुख समृद्धि की प्रार्थना की

    धर्म:
    धर्म   - नीमच[20-09-2026]
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  • धर्म: लोकदेवता भगवान वीर तेजाजी के जन्मोत्सव पर भड़क सनावदा गांव में उमड़ी भक्ति.....सुख समृद्धि की प्रार्थना की

    लोकदेवता भगवान वीर तेजाजी के जन्मोत्सव पर भड़क सनावदा गांव में उमड़ी भक्ति.....सुख समृद्धि की प्रार्थना की
    धर्म   - नीमच[20-09-2026]
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  • धर्म: हरवार में गूंजा जय श्री देवनारायण का जयघोष

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    धर्म   - नीमच[17-09-2026]
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  • धर्म: हरवार में गूंजा जय श्री देवनारायण का जयघोष

    हरवार में गूंजा जय श्री देवनारायण का जयघोष
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  • धर्म: हरतालिका तीज पर चीताखेड़ा में उमड़ा आस्था का सैलाब, पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली की मांगी मन्नत

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    धर्म   - नीमच[15-09-2026]
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  • धर्म: हरतालिका तीज पर चीताखेड़ा में उमड़ा आस्था का सैलाब, पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली की मांगी मन्नत

    हरतालिका तीज पर चीताखेड़ा में उमड़ा आस्था का सैलाब, पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली की मांगी मन्नत
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  • धर्म: जन्मोत्सव......त्रिशला नंदन वीर की जय बोलो महावीर की, जयकारों से गूंजी चीताखेड़ा की गलियां, बैण्ड बाजों से निकाला प्रभु का वरघोड़ा

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    धर्म   - नीमच[12-09-2026]
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    जन्मोत्सव......त्रिशला नंदन  वीर की जय बोलो महावीर की, जयकारों से गूंजी चीताखेड़ा की गलियां, बैण्ड बाजों से निकाला प्रभु का वरघोड़ा
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  • धर्म: पर्युषण महापर्व पर चीताखेड़ा में गूंज रहा अहिंसा परमो धर्म का जयघोष

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    धर्म   - नीमच[11-09-2026]
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  • धर्म: पर्युषण महापर्व पर चीताखेड़ा में गूंज रहा अहिंसा परमो धर्म का जयघोष

    पर्युषण महापर्व पर चीताखेड़ा में गूंज रहा अहिंसा परमो धर्म का जयघोष
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  • धर्म: क्रेनें लगीं, इंजीनियर जुटे… फिर भी नहीं हिले 170 साल पुराने खड़े हनुमान!

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    धर्म   - उज्जैन[09-09-2026]
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    क्रेनें लगीं, इंजीनियर जुटे… फिर भी नहीं हिले 170 साल पुराने खड़े हनुमान!
    धर्म   - उज्जैन[09-09-2026]
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  • धर्म: बाबा रामदेव मंदिर का 2 दिवसीय भादवी बीज का भव्य मेला शनिवार से, दुकानदारों को दुकान हेतु प्लाट वितरण कल होंगे

    धर्म:
    धर्म   - नीमच[09-09-2026]
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  • धर्म: बाबा रामदेव मंदिर का 2 दिवसीय भादवी बीज का भव्य मेला शनिवार से, दुकानदारों को दुकान हेतु प्लाट वितरण कल होंगे

    बाबा रामदेव मंदिर का 2 दिवसीय भादवी बीज का भव्य मेला शनिवार से, दुकानदारों को दुकान हेतु प्लाट वितरण कल होंगे
    धर्म   - नीमच[09-09-2026]
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  • धर्म: राधा-रुक्मणी विवाह के साथ श्रीमद् भागवत गीता कथा का षष्टम दिवस सम्पन्न, पंडाल में उमड़ा जनसैलाब

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    धर्म   - नीमच[06-09-2026]
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    राधा-रुक्मणी विवाह के साथ श्रीमद् भागवत गीता कथा का षष्टम दिवस सम्पन्न, पंडाल में उमड़ा जनसैलाब
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  • धर्म: कान्हा के रंग में रंगा आंगनवाड़ी परिसर, गूंजे जय श्री कृष्ण के जयकारे

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    धर्म   - नीमच[04-09-2026]
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  • धर्म: मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना के तहत हरिद्वार एवं ऋषिकेश की निःशुल्क तीर्थ यात्रा के लिए आवेदन आमंत्रित....9 सितंबर तक किए जा सकेंगे आवेदन

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    धर्म   - आगर मालवा[01-09-2026]
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  • धर्म: मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना के तहत हरिद्वार एवं ऋषिकेश की निःशुल्क तीर्थ यात्रा के लिए आवेदन आमंत्रित....9 सितंबर तक किए जा सकेंगे आवेदन

    मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना के तहत हरिद्वार एवं ऋषिकेश की निःशुल्क तीर्थ यात्रा  के लिए आवेदन आमंत्रित....9 सितंबर तक किए जा सकेंगे आवेदन
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