इंदौर :
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मालवा प्रांत में व्यापक संगठनात्मक बदलाव की तैयारी तेज हो गई है। संघ अब मालवा प्रांत को दो अलग-अलग संभागों—इंदौर संभाग और उज्जैन संभाग—में विभाजित करने जा रहा है। इस नई संरचना के तहत दोनों संभागों की अलग-अलग कार्यकारिणी (एक्जीक्यूटिव कमेटी) बनाई जाएगी, जिससे संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत एवं सक्रिय बनाया जा सके।
इंदौर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मालवा प्रांत प्रचार प्रमुख जयशंकर शर्मा और विनीत नवाथे ने इस महत्वपूर्ण निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह नई व्यवस्था मार्च 2027 से प्रभावी होगी। तब तक वर्तमान प्रांत प्रचारक की व्यवस्था जारी रहेगी, लेकिन मार्च 2027 के बाद प्रांत प्रचारक का पद पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। संघ के इस फैसले को संगठनात्मक ढांचे में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
जयशंकर शर्मा ने स्पष्ट किया कि अधिक विकेंद्रीकरण और लोगों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह बदलाव किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि संघ का फोकस अब छोटे-छोटे प्रशासनिक इकाइयों के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक प्रभावी ढंग से पहुंच बनाने पर है। यह कदम संघ के व्यापक संगठनात्मक सुधार अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत देश के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के बदलावों पर विचार किया जा रहा है।
मालवा प्रांत में आरएसएस की गतिविधियां पहले से ही काफी मजबूत और व्यापक हैं। यहां 5,000 से अधिक शाखाएं संचालित हो रही हैं और प्रांत के सभी 12,246 गांवों तक संपर्क स्थापित किया जा चुका है। हाल ही में आयोजित विजयदशमी उत्सव में 4 लाख से अधिक स्वयंसेवकों की भागीदारी दर्ज की गई। इसके अलावा विभिन्न हिंदू सम्मेलनों के तहत 3,762 प्रभात फेरियां निकाली गईं, 1,355 मंडलों और 940 बस्तियों में कार्यक्रम आयोजित हुए, जिनमें 70 लाख से अधिक लोगों की सहभागिता रही।
युवा वर्ग में भी संघ की पकड़ मजबूत होती दिख रही है। युवा महोत्सव, युवा संसद और युवा शिविर जैसे आयोजनों में अब तक 1 लाख 88 हजार से अधिक युवाओं ने भाग लिया है। वहीं टोलियों के माध्यम से 82 हजार कार्यकर्ताओं ने करीब 32 लाख परिवारों तक संपर्क स्थापित किया है।
इन सभी आंकड़ों और बदलावों को देखते हुए स्पष्ट है कि संघ अब अपनी कार्यप्रणाली को और अधिक विकेंद्रीकृत, प्रभावी और समाज के हर स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से नए ढांचे की ओर बढ़ रहा है। यह बदलाव भविष्य में संगठन की रणनीति और कार्यशैली में बड़ा परिवर्तन साबित हो सकता है।
रिपोर्टर जितेंद्र कुमावत