रतलाम
रतलाम जिले में मंगलवार को करणी सेना परिवार के प्रमुख जीवन सिंह शेरपुर के नेतृत्व में जनहित के 11 सूत्रीय मुद्दों को लेकर विशाल प्रदर्शन और कलेक्टर कार्यालय घेराव का प्रयास किया गया। जावरा, नामली, रिंगनोद सहित आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में लोग—जिनमें महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चों को गोद में लिए माताएं भी शामिल थीं—रतलाम की ओर कूच करते नजर आए। हालांकि प्रशासन ने पहले से ही कड़े सुरक्षा इंतजाम करते हुए प्रदर्शनकारियों को शहर में प्रवेश से पहले ही सेजावता फंटा (फोरलेन) पर रोक दिया।
महू-नीमच फोरलेन सहित शहर के सभी प्रमुख एंट्री पॉइंट्स पर भारी बैरिकेडिंग, लोहे के अवरोध और बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई। हालात ऐसे बन गए कि पूरा इलाका छावनी में तब्दील नजर आया। प्रदर्शनकारियों को कलेक्टर कार्यालय से लगभग 4 किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया, जिसके बाद वहीं धरना शुरू हो गया। शाम तक यह आंदोलन 6 से 7 घंटे से अधिक समय तक जारी रहा, लेकिन कोई निर्णायक समाधान सामने नहीं आया।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जीवन सिंह शेरपुर ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जनता अपने हक और अधिकार की बात करने आई है, लेकिन उसे बैरिकेडिंग लगाकर रोका जा रहा है। यह लोकतंत्र की आवाज को दबाने की कोशिश है। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग रखी कि कलेक्टर स्वयं मौके पर आकर ज्ञापन लें। शेरपुर ने कहा कि जब तक कलेक्टर बाहर आकर बात नहीं करेंगी, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
इस दौरान मानवीय स्थिति भी चिंता का विषय बनी रही। तेज धूप और लंबे इंतजार के चलते कई लोग असहज हो गए। एक महिला के बेहोश होने की खबर सामने आई, जिसे तुरंत उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया। कई महिलाएं छोटे बच्चों के साथ धरना स्थल पर डटी रहीं। स्थिति को देखते हुए शेरपुर द्वारा पीने के पानी की व्यवस्था भी करवाई गई, जिससे प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ पुलिसकर्मियों को भी राहत मिली।
इस पूरे आंदोलन की जड़ में खनिज विभाग द्वारा ठेकेदार आयुष शर्मा के डंपरों की जब्ती का मामला बताया जा रहा है। शेरपुर का आरोप है कि खाली डंपरों पर अवैध उत्खनन का झूठा आरोप लगाकर कार्रवाई की गई। इस मुद्दे को लेकर पहले रिंगनोद थाने पर भी धरना दिया गया था। अब इस प्रकरण के साथ किसानों की समस्याएं, स्थानीय अव्यवस्थाएं, प्रशासनिक अनियमितताएं और अन्य जनहित के कुल 11 मुद्दों को जोड़कर व्यापक आंदोलन खड़ा किया गया है।
मौके पर प्रशासन की ओर से एसडीएम आर्ची हरित, तहसीलदार ऋषभ ठाकुर, एसडीओपी किशोर पाटनवाला, सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया, नीलम बघेल (पुलिस अधिकारी) तथा टीआई गायत्री सोनी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन की पूर्व अनुमति नहीं होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों द्वारा ज्ञापन लेने का प्रयास भी किया गया, लेकिन प्रदर्शनकारी कलेक्टर से आमने-सामने बातचीत की मांग पर अड़े रहे।
सोशल मीडिया पर भी यह आंदोलन लगातार चर्चा में बना हुआ है। जीवन सिंह शेरपुर के आधिकारिक अकाउंट्स से लाइव अपडेट, वीडियो और तस्वीरें साझा की जा रही हैं। समर्थकों द्वारा बड़ी संख्या में पोस्ट कर आंदोलन को समर्थन दिया जा रहा है और इसे जनता बनाम प्रशासन की लड़ाई के रूप में पेश किया जा रहा है।
फिलहाल रतलाम में हालात पूरी तरह संवेदनशील बने हुए हैं। एक ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सतर्क है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे। अब सभी की नजरें कलेक्टर के अगले कदम और संभावित वार्ता पर टिकी हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह आंदोलन आने वाले समय में और बड़ा तथा उग्र रूप ले सकता है।
आगे की अपडेट जारी....
क्राइम रिपोर्टर जितेंद्र कुमावत