सुसनेर: सालरिया में चल रहे श्री कामधेनु गो अभयारण्य द्वारा आयोजित एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 335वें दिन रविवार को संतों ने गौसेवा और सनातन संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला। स्वामी गोपालानंद सरस्वती ने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान ने हमें गाय माता इसलिए दी है कि हम प्राकृतिक खेती करें और गोमूत्र व गोबर का उपयोग कर जैविक उर्वरक बनाएं। उन्होंने किसानों को रासायनिक खाद और कीटनाशकों से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति आगाह किया और कहा कि इनका उपयोग करने से अनेकों जीवों की हानि होती है, जिससे सनातन कमजोर हो रहा है और विधर्मी शक्तियां मजबूत हो रही हैं। उन्होंने आह्वान किया कि हर व्यक्ति अपने घर में एक गाय पालकर गौसेवा का संकल्प लें। संत कमल किशोर नागर ने इस गो-अभयारण्य की महिमा का बखान करते हुए कहा कि यहां आकर उन्हें स्वर्ग और गोलोक की अनुभूति हो रही है। उन्होंने उन लोगों की आलोचना की जो गौसेवा का विरोध कर रहे हैं और कहा कि जो राम और रावण दोनों का मुखौटा पहनकर गौमाता की सेवा में बाधा डालते हैं। उन्हें एक बार इस पवित्र स्थल पर आकर गौसेवा का अनुभव करना चाहिए।
सत्ता और समाज को गौमाता के सम्मान के लिए आगे आना होगा:-
संत नागर ने राजनीति और सामाजिक संस्थाओं को चेताते हुए कहा कि कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि जो राम को मानते हैं, वे रावण की भूमिका न निभाएं और गौमाता को उसका उचित सम्मान दिलाने के लिए प्रयास करें। उन्होंने यह भी कहा कि आज की युवा पीढ़ी मोबाइल के कारण अपने माता-पिता का अनादर करने लगी है। उन्होंने समाज के माता-पिता से अनुरोध किया कि वे अपनी संतान को गौसेवा में लगाएं, क्योंकि गौसेवा करने वाले सौभाग्यशाली होते हैं।
बेटी सुधरेगी तो बहू भी अच्छी बनेगी:-
नागर ने सामाजिक मूल्यों पर भी जोर देते हुए कहा कि लोग बहू को सुधारने की बात करते हैं लेकिन असल में जरूरत बेटियों को अच्छे संस्कार देने की है। यदि बेटियों को सही शिक्षा और संस्कार मिलेंगे, तो वे भविष्य में एक आदर्श बहू बनेंगी और परिवार को सशक्त करेंगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में गौभक्त, संत महात्मा और श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में गौसेवा का संकल्प लिया गया और समाज को गौमाता के संरक्षण व संवर्धन का संदेश दिया गया।
देश : राम और रावण दोनों का मुखौटा पहनकर गौसेवा का विरोध न करें – संत कमल किशोर नागर
सुसनेर: सालरिया में चल रहे श्री कामधेनु गो अभयारण्य द्वारा आयोजित एक वर्षीय वेदलक्षणा गो आराधना महामहोत्सव के 335वें दिन रविवार को संतों ने गौसेवा और सनातन संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला। स्वामी गोपालानंद सरस्वती ने अपने प्रवचन में कहा कि भगवान ने हमें गाय माता इसलिए दी है कि हम प्राकृतिक खेती करें और गोमूत्र व गोबर का उपयोग कर जैविक उर्वरक बनाएं। उन्होंने किसानों को रासायनिक खाद और कीटनाशकों से होने वाले दुष्प्रभावों के प्रति आगाह किया और कहा कि इनका उपयोग करने से अनेकों जीवों की हानि होती है, जिससे सनातन कमजोर हो रहा है और विधर्मी शक्तियां मजबूत हो रही हैं। उन्होंने आह्वान किया कि हर व्यक्ति अपने घर में एक गाय पालकर गौसेवा का संकल्प लें। संत कमल किशोर नागर ने इस गो-अभयारण्य की महिमा का बखान करते हुए कहा कि यहां आकर उन्हें स्वर्ग और गोलोक की अनुभूति हो रही है। उन्होंने उन लोगों की आलोचना की जो गौसेवा का विरोध कर रहे हैं और कहा कि जो राम और रावण दोनों का मुखौटा पहनकर गौमाता की सेवा में बाधा डालते हैं। उन्हें एक बार इस पवित्र स्थल पर आकर गौसेवा का अनुभव करना चाहिए।
सत्ता और समाज को गौमाता के सम्मान के लिए आगे आना होगा:-
संत नागर ने राजनीति और सामाजिक संस्थाओं को चेताते हुए कहा कि कथनी और करनी में अंतर नहीं होना चाहिए। उन्होंने आग्रह किया कि जो राम को मानते हैं, वे रावण की भूमिका न निभाएं और गौमाता को उसका उचित सम्मान दिलाने के लिए प्रयास करें। उन्होंने यह भी कहा कि आज की युवा पीढ़ी मोबाइल के कारण अपने माता-पिता का अनादर करने लगी है। उन्होंने समाज के माता-पिता से अनुरोध किया कि वे अपनी संतान को गौसेवा में लगाएं, क्योंकि गौसेवा करने वाले सौभाग्यशाली होते हैं।
बेटी सुधरेगी तो बहू भी अच्छी बनेगी:-
नागर ने सामाजिक मूल्यों पर भी जोर देते हुए कहा कि लोग बहू को सुधारने की बात करते हैं लेकिन असल में जरूरत बेटियों को अच्छे संस्कार देने की है। यदि बेटियों को सही शिक्षा और संस्कार मिलेंगे, तो वे भविष्य में एक आदर्श बहू बनेंगी और परिवार को सशक्त करेंगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में गौभक्त, संत महात्मा और श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में गौसेवा का संकल्प लिया गया और समाज को गौमाता के संरक्षण व संवर्धन का संदेश दिया गया।