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चीताखेडा । माता -पिता ब्रह्म विष्णु और महेश से कम नहीं है, माता - पिता ने ही ऊंगली पकड़कर चलना सिखाया है और खाने पीने को दिया है, शिक्षा दी। इसलिए माता-पिता का दर्जा भगवान से ऊपर है। जिस खेत में बारिश न हो उस खेत में फसल नष्ट हो जाती है और जिस घर में संस्कार न हो उस घर की नस्लें बिगड़ जाती है। जिस घर में माता-पिता के आंसू टपकते हैं वो घर कभी भी आबाद नहीं हो सकता और जिस घर में मां-बाप हंसते हैं वह घर स्वर्ग है। भागवत का श्रवण गंगा समान पूण्य होता है। ज्ञान व भक्ति दोनों ईश्वर की प्राप्ति के साधन है। श्रीमद् भागवत ज्ञान व भक्ति दोनों को प्रदान करने वाला अमृत है, जो भी इस का रसपान करता है उसे ईश्वर की शरण मिलती हैं। सतयुग, त्रेतायुग,द्वापरयुग और कली इन चारों युग भक्ति के प्रमाण हर युग में एक नर और नारी भक्ति की परिक्षा में उत्तीर्ण होकर जगत को दर्शाया है। उक्त वाणी कथा मर्मज्ञ पं.कुलदीप शर्मा बांगरेड ने चीताखेड़ा में शिव मंदिर प्रांगण में घीसालाल माली (पारोलिया) परिवार की मुख्य यजमानी में माली समाज व ग्रामवासियों द्वारा आयोजित साप्ताहिक श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव के अवसर पर प्रथम दिवस शनिवार को कथा पंडाल में उपस्थित श्रोताओं को अपने मुखारविंद से प्रवाहित करते हुए व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मनुष्य जन्म से नहीं कर्मों से महान बनता है।जब- जब भारत भूमि पर संत,ब्राह्मण और गौमाता दुःखी होते हैं उन पर अत्याचार होता है तब - तब देवता अवतार लेते हैं। कथा वाचक कुलदीप शर्मा ने कहा कि मन में होगा छल तो पानी का टेंकर भरकर जल चढ़ाओगे तो कुछ नहीं होना है। निश्छल मन से भोले नाथ को एक लोटा जल चढ़ाओगे तो प्रसन्न हो जाएंगे। लोग खुद गर्म पानी से स्नान करते हैं और भगवान शिव को ठण्डा पानी चढ़ाते हैं। श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा महोत्सव प्रवचन के दौरान कथा मर्मज्ञ पंडित श्री कुलदीप शर्मा द्वारा मुख्य रूप से आत्मदेव, धुंधली, धुंधकारी और गोकर्ण के प्रसंग को विस्तृत रूप से सुनाया गया। **कलश एवं शौभायात्रा के साथ हुआ भागवत कथा का शुभारंभ** श्रीमद भगवान कथा के शुभारंभ में गांव के मध्य स्थित बजरंग मंदिर से प्रातः 9 बजे डीजे एवं ढोल ढमाकों के साथ भव्य कलश एवं शौभायात्रा प्रारंभ हुई। जिसमें महिलाओं ने कलश सिरोधार्य किये हुए थी। कलश एवं पोथी यात्रा में विशेष रूप से मुख्य यजमान घीसालाल माली श्रीमद् भागवत महापुराण एवं चिराग माली अपने सिर पर बाल स्वरूप भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप विग्रह मुखोटे को सिरोधार्य कर चल रहे थे। जगह-जगह धर्मप्रेमियों ने फूलों की बरसात कर स्वागत किया वहीं इस दौरान मुस्लिम भाइयों ने भी जमकर फूल बरसाए और बालकृष्ण के बाल विग्रह को कुंकुम अक्षत से पूजन कर सांप्रदायिकता व सद्भावना का परिचय दिया है। कलशयात्रा गांव के निर्धारित मार्गों से परिभ्रमण करती हुईं चारभुजानाथ मंदिर पहुंची जहां भगवान को वागा वस्त्र भेंट किए गए। तत्पश्चात् पौथी यात्रा शिव मंदिर प्रांगण में कथा पंडाल पहुंची।इसके बाद कथा के मुख्य यजमान घीसालाल माली पारोलिया परिवार के सदस्यों ने कथा शुभारंभ के पूर्व पौथी पूजन कर आरती की। प्रतिदिन श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा साप्ताहिक प्रवचन दोपहर 11:30 बजे से शाम 3:30 बजे तक भागवताचार्य पंडित कुलदीप शर्मा के मुखारविंद से प्रवाहित किए जायेंगे। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |