रतलाम
सैलाना विधानसभा क्षेत्र की विभिन्न जनसमस्याओं, आदिवासी अधिकारों, किसानों की परेशानियों तथा विकास कार्यों में कथित उपेक्षा के विरोध में बुधवार को जिला मुख्यालय रतलाम में बड़ा जनआंदोलन देखने को मिला। भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के नेतृत्व में सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने हजारों ग्रामीणों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के साथ कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर 48 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। प्रदर्शन के दौरान कलेक्टर कार्यालय परिसर और आसपास का क्षेत्र आंदोलनकारियों से पूरी तरह भर गया तथा आदिवासी अस्मिता, जल-जंगल-जमीन और जनअधिकारों के समर्थन में जोरदार नारे लगाए गए।
आंदोलन में सैलाना, बाजना, रावटी, शिवगढ़, सरवन सहित आदिवासी अंचल के अनेक गांवों से बड़ी संख्या में लोग वाहन रैलियों के माध्यम से रतलाम पहुंचे। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों से आए कार्यकर्ता और ग्रामीण मेडिकल कॉलेज परिसर में एकत्रित हुए, जहां से विशाल रैली के रूप में अम्बेडकर चौराहा होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। रैली में शामिल लोगों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की मांग लिखी हुई थी।
धरने को संबोधित करते हुए विधायक कमलेश्वर डोडियार ने कहा कि आदिवासी बाहुल्य सैलाना विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। किसानों को खाद-बीज के लिए परेशान होना पड़ रहा है, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कें जर्जर हैं, स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं और कई विभागों में रिक्त पदों के कारण आमजन को परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
किसानों की समस्याएं रहीं आंदोलन का प्रमुख मुद्दा
ज्ञापन में किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया गया। प्रदर्शनकारियों ने खाद-बीज की कालाबाजारी और अधिक मूल्य वसूली पर रोक लगाने, ई-टोकन एवं फार्मर रजिस्ट्री की जटिलताओं को दूर करने, वर्षों से शासकीय भूमि पर खेती कर रहे गरीब आदिवासी किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराने तथा सरवन, शिवगढ़, बासिन्द्रा और रावटी में नगद उर्वरक विक्रय केंद्र शुरू करने की मांग की। इसके अलावा भूमि सीमांकन और राजस्व प्रकरणों के त्वरित निराकरण की भी मांग उठाई गई।
सड़क, पेयजल और बिजली की समस्याओं पर जताया आक्रोश
धरने में ग्रामीणों ने क्षेत्र की खराब सड़कों, अधूरे निर्माण कार्यों और पेयजल संकट को लेकर भी नाराजगी व्यक्त की। ज्ञापन में शिवगढ़ बायपास निर्माण, रतलाम-बांसवाड़ा मार्ग को फोरलेन करने, बारिश में खराब होने वाले ग्रामीण मार्गों पर ग्रेवल और मुरम डलवाने तथा लंबित सड़क एवं डेम निर्माण कार्य शीघ्र शुरू करने की मांग की गई। साथ ही जिन गांवों में लोग आज भी दूर-दूर से पानी लाने को मजबूर हैं, वहां तत्काल पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग रखी गई। जल जीवन मिशन के कार्यों की उच्च स्तरीय जांच तथा अनावश्यक विद्युत कटौती रोकने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
प्रदर्शनकारियों ने सैलाना अस्पताल भवन के जीर्णोद्धार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण कार्य पूर्ण कराने, नव निर्मित स्वास्थ्य केंद्रों को शुरू करने तथा चिकित्सकों और महिला चिकित्सकों की नियुक्ति की मांग की। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में विद्यालयों में रिक्त शिक्षक पदों को भरने, जर्जर भवनों के निर्माण, महाविद्यालयों में नए संकाय शुरू करने तथा आदिवासी विद्यार्थियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग रखी गई।
रतलाम निवेश क्षेत्र का किया विरोध
धरने के दौरान विधायक डोडियार ने प्रस्तावित ‘रतलाम निवेश क्षेत्र’ का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि यदि अनुसूचित क्षेत्र की आदिवासी भूमि का अधिग्रहण किया जाता है तो संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम और वनाधिकार कानून के प्रावधानों का पूर्ण पालन किया जाना चाहिए। ग्राम सभाओं की सहमति के बिना भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवारों की आजीविका और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
आंदोलन में जिला पंचायत उपाध्यक्ष केशु निनामा, भारत आदिवासी पार्टी के जिला अध्यक्ष रमेश खराड़ी, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि चंदू मईड़ा, राजेश मईड़ा, जिला पंचायत सदस्य शरद कुमार डोडियार सहित अनेक जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी उपस्थित रहे। विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंच, किसान संगठन, युवा संगठन और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया।
प्रशासन से हुई चर्चा
धरना-प्रदर्शन के दौरान कलेक्टर की अनुपस्थिति में एडीएम ने आंदोलनकारियों का ज्ञापन प्राप्त किया। प्रतिनिधिमंडल और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच विभिन्न मांगों को लेकर चर्चा हुई। प्रशासन की ओर से मांगों का परीक्षण कर संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने का आश्वासन दिया गया।
प्रशासन की ओर से धरना-प्रदर्शन को देखते हुए व्यापक सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था की गई थी। कलेक्टर कार्यालय परिसर में एडीएम, एसडीएम एवं एसडीओपी रतलाम सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिले के समस्त थाना प्रभारियों के साथ बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। अधिकारियों ने पूरे कार्यक्रम पर लगातार नजर रखते हुए आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
धरना देर तक जारी रहा और पूरे कार्यक्रम के दौरान आदिवासी समाज की एकजुटता तथा जनसमस्याओं के समाधान को लेकर व्यापक जनसमर्थन देखने को मिला। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि 48 सूत्रीय मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में और बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत