रतलाम । जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर रतलाम की समाजसेवी रेणुका पोरवाल ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मुख्यमंत्री, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष तथा जिला कलेक्टर रतलाम को पत्र भेजकर पी.ओ.पी. (प्लास्टर ऑफ पेरिस) से निर्मित प्रतिमाओं के निर्माण, विक्रय और प्राकृतिक जल स्रोतों में विसर्जन पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
रेणुका पोरवाल ने अपने पत्र में कहा है कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा वर्तमान में “जल गंगा संवर्धन अभियान” के माध्यम से जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, नदियों के पुनर्जीवन, तालाबों के गहरीकरण एवं स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। ऐसे समय में पीओपी निर्मित प्रतिमाओं का नदियों, तालाबों और अन्य प्राकृतिक जल स्रोतों में विसर्जन इन प्रयासों को प्रभावित करता है और पर्यावरण संरक्षण की भावना के विपरीत है।
उन्होंने बताया कि पीओपी एक ऐसी सामग्री है जो पानी में आसानी से नहीं घुलती। इसके अलावा प्रतिमाओं में उपयोग किए जाने वाले रासायनिक रंग, पेंट एवं अन्य कृत्रिम पदार्थ जल स्रोतों को प्रदूषित करते हैं। इससे जल की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जलीय जीव-जंतुओं के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा पर्यावरणीय संतुलन भी बिगड़ता है। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर प्रतिमा विसर्जन के बाद जलाशयों में लंबे समय तक अवशेष पड़े रहते हैं, जिससे स्वच्छता और जल संरक्षण के प्रयासों को नुकसान पहुंचता है।
समाजसेवी रेणुका पोरवाल ने यह भी उल्लेख किया कि मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में जिला प्रशासन द्वारा पीओपी प्रतिमाओं पर प्रतिबंध लगाने और पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमाओं को बढ़ावा देने की दिशा में पहल की जा चुकी है। इसी तर्ज पर पूरे प्रदेश में एक समान नीति लागू की जानी चाहिए।
उन्होंने शासन से मांग की है कि मिट्टी, गोबर एवं अन्य प्राकृतिक सामग्री से निर्मित पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमाओं को प्रोत्साहित किया जाए तथा स्थानीय प्रतिमा निर्माताओं और विक्रेताओं को प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि उनकी आजीविका प्रभावित हुए बिना पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य भी प्राप्त किया जा सके।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत