रतलाम / बाजना। बाजना क्षेत्र के किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने और लंबे रेशे वाले उच्च गुणवत्ता के कपास के उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से CITI-CDRA एवं टेक्सप्रोसिल के संयुक्त तत्वावधान में कस्तूरी कॉटन भारत किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में बाजना तहसील के चयनित गांवों से बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती, गुणवत्ता मानकों, ट्रेसबिलिटी तथा फार्म से फाइबर की संपूर्ण प्रक्रिया से जोड़कर भारतीय कपास को वैश्विक स्तर पर कस्तूरी कॉटन भारत के रूप में नई पहचान दिलाना रहा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तहसीलदार देवेन्द्र कुमार दानगढ़ ने किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत अपनी फसलों का बीमा कराने तथा प्रत्येक किसान को फार्मर आईडी बनवाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि फार्मर आईडी के माध्यम से किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ सीधे, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से प्राप्त होगा।
SADO बाजना श्री जगदीश अलावा ने कहा कि बाजना क्षेत्र का लंबे रेशे वाला कपास अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता के कारण कस्तूरी कॉटन भारत के मानकों पर खरा उतरता है। यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति से इसकी खेती करें तो उत्पादन, गुणवत्ता और बाजार मूल्य तीनों में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
RAEO कृषि विभाग के अमूल चौधरी ने किसानों को कपास के साथ मक्का, उड़द, मूंग एवं सोयाबीन जैसी मिश्रित फसलों की खेती अपनाने की सलाह देते हुए बताया कि इससे अतिरिक्त आय के साथ कीट एवं रोगों का प्रकोप कम होता है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है। उन्होंने संतुलित उर्वरक प्रबंधन एवं जैविक खेती के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
CITI-CDRA के परियोजना अधिकारी राकेश पाटीदार ने कपास में लगने वाले प्रमुख कीट एवं रोगों के वैज्ञानिक प्रबंधन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फसल की 90 से 140 दिन की अवस्था में टॉपिंग (शीर्ष छंटाई), जिंक सल्फेट, बोरॉन एवं पोटाश का संतुलित उपयोग, यूरिया का सीमित प्रयोग, समय पर कीट नियंत्रण तथा नीम आधारित उत्पादों के उपयोग से कपास की गुणवत्ता और उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है।
जन अभियान परिषद बाजना के निर्मल अमलियार ने किसानों से जैविक खेती अपनाने, देशी गोबर एवं जैविक खादों के उपयोग को बढ़ावा देने और नशा मुक्ति जैसे सामाजिक अभियानों से जुड़ने का आह्वान किया। वहीं CITI-CDRA के गजेंद्र सिंह चौहान ने जीवामृत एवं दशपर्णी अर्क तैयार करने और उनके प्रभावी उपयोग की विधि समझाई। वागधारा संस्था के मोहनलाल भूरिया ने किसानों को फल, फूल एवं सब्जी उत्पादन को खेती से जोड़कर अतिरिक्त आय के नए स्रोत विकसित करने के सुझाव दिए।
कार्यक्रम का संचालन REO कृषि विभाग के मांगीलाल खराड़ी ने किया। उन्होंने किसानों को कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए उनका अधिकतम लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। अंत में CITI-CDRA के बालाराम चरपोटा ने सभी अतिथियों, अधिकारियों एवं किसानों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर गोविंद निनामा, बेनर सिंह मचार, रमेश निनामा राजेंद्र डामर, कन्हैयालाल भाभर सहित बड़ी संख्या में किसान एवं कृषि कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों, गुणवत्ता आधारित उत्पादन और ट्रेसबिलिटी प्रणाली की जानकारी प्राप्त कर लंबे रेशे वाले कपास की वैज्ञानिक खेती को अपनाने का संकल्प लिया।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत