रतलाम
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आयोजित संकल्प से समाधान कार्यक्रम में थैलेसीमिया मुक्त मध्यप्रदेश अभियान को लेकर आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला में रतलाम की उपलब्धियों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. राजेंद्र शुक्ल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर थैलेसीमिया मुक्त मध्यप्रदेश जनजागरण समिति के मार्गदर्शक एवं काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सचिव तथा रतलाम विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष गोविंद काकानी ने प्रदेश को थैलेसीमिया मुक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए।
गोविंद काकानी ने अपने संबोधन में रतलाम मेडिकल कॉलेज में संचालित थैलेसीमिया डे-केयर सेंटर की सुविधाओं का विस्तृत उल्लेख करते हुए बताया कि यहां बच्चों को बेहतर उपचार, नियमित रक्त उपलब्धता, चिकित्सा परामर्श तथा आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने रतलाम मेडिकल कॉलेज में रक्त की उच्च गुणवत्ता एवं संक्रमण की बेहतर जांच सुनिश्चित करने के लिए नेट टेस्टिंग मशीन (NAT Testing Machine) उपलब्ध कराने की मांग भी उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य विभाग के समक्ष रखी।
काकानी ने कहा कि प्रदेश सरकार के लोकप्रिय मंत्री एवं रतलाम विधायक चैतन्य काश्यप के सहयोग, जिला स्वास्थ्य विभाग की सक्रिय भूमिका तथा मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों के समर्पित प्रयासों से रतलाम का डे-केयर सेंटर प्रदेश के लिए एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा है।
उन्होंने शासन द्वारा थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को दी जा रही विभिन्न सुविधाओं की भी विस्तार से जानकारी दी।
गोविंद काकानी के विचारों और सुझावों का उपस्थित विशेषज्ञों एवं अतिथियों ने जोरदार तालियों के साथ स्वागत किया।
कार्यशाला में थैलेसीमिया इंडिया, नई दिल्ली के अध्यक्ष दीपक चोपड़ा, सचिव श्रीमती शोभा तुली, राज्य शासन की प्रभारी डिप्टी डायरेक्टर डॉ. रूबी खान, डॉ. अशोक यादव (मेडिकल कॉलेज इंदौर) सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए चिकित्सा विशेषज्ञों, समाजसेवियों और स्वास्थ्य अधिकारियों ने रतलाम मॉडल की सराहना की।
लगभग छह घंटे तक चली इस कार्यशाला में थैलेसीमिया मुक्त मध्यप्रदेश जनजागरण समिति की ओर से अध्यक्ष विकास शुक्ला, संरक्षक सत्येंद्र राठौर, अजय कुमार घोष दादा, सरबजीत सिंह नारंग सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी वर्षों से किए जा रहे जनजागरण, स्क्रीनिंग, जागरूकता एवं मरीजों की सहायता संबंधी अनुभव साझा किए। सभी ने सामूहिक रूप से प्रदेश को थैलेसीमिया मुक्त बनाने के लिए जनभागीदारी बढ़ाने, समय पर जांच, जागरूकता अभियान और शासन के साथ मिलकर सक्रिय सहयोग का संकल्प दोहराया।
कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि समय रहते जांच, जागरूकता और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था के माध्यम से थैलेसीमिया जैसी गंभीर आनुवंशिक बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
रतलाम के डे-केयर सेंटर की सराहना और गोविंद काकानी द्वारा रखे गए सुझावों को प्रदेशव्यापी अभियान के लिए महत्वपूर्ण पहल माना गया।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत