जिला संवाददाता मुकेश बीजापारी कि रिपोर्ट 7697389976 कृषि विज्ञान केन्द्र, आगर मालवा के वरिष्ठ वैज्ञानिको की टीम ने बापचा, कराडिया, मंगवालिया, पिपलिया घाटा, रलायती, बिनायगा आगर, ग्यारसी ओर फरसपुरी आदि ग्रामों में कृषकों के खेतों पर उगी हुई सोयाबीन, उडद, मूंग, मक्का एवं अन्य खरीफ फसलों का निरीक्षण किया। जिसमें कृषक हरि सिंह,भैरू सिंह,श्याम सिंह,दुर्गेश, देवी सिंह, सरदार सिंह एवं मानसिंह इत्यादि के खेतों में जाकर फसलों का अवलोकन किया। भ्रमण के दौरान फसलों में कुछ कृषकों के खेतों में सोयाबीन फसल में पोटाश एवं फास्फोरस पोषक तत्व की कमी के लक्षण दिखाई दिये जिस कारण पत्तियां कही-कही पर पीली पड रही थी। कुछ खेतों में हरीअर्धकुंडल ईल्ली, तम्बाकू की इल्ली, फली छेदक ईल्ली, सफेद मक्खी एवं गर्डल बीटल इत्यादि कीटों का आंशिक प्रकोप पाया गया। साथ ही एन्थ्रेकनोज रोग का प्रकोप भी देखा गया। दल के कीट वैज्ञानिक डॉ. मनीष कुमार ने पत्तीयों और फलीयों को खाने एवं रस चूसक कीट सफेद मक्खी कीटों से बचाव के लिए थायोमिथोक्सम 12.60 प्रतिशत + लेम्बडा सायहेलोथ्रिन 9.50 प्रतिशत, जेड सी. 125 एमएल प्रति हेक्टेयर अथवा इंडोक्साकार्ब 15.8 ईसी 333 एमएल प्रति हेक्टेयर अथवा इमामेक्टीन बेन्जोएट 1.9 प्रतिशत 425 एमएल प्रति हेक्टेयर अथवा क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 9.3 प्रतिशत + लेम्बडा सायहेलोथ्रिन 4.60 प्रतिशत जेड सी. 200 एमएल प्रति हेक्टेयर अथवा क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 18.5 एस.सी. 150 एमएल प्रति हेक्टेयर के छिडकाव की अनुशंसा की है, साथ ही फफूंदजनित रोगों के प्रकोप से सुरक्षा हेतु कार्बेन्डाजिम 12 + मेंकोजेब 63 प्रतिशत डब्ल्यूपी 1250 ग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा टेबुकोनाजोल 25.9 ईसी 625 मिली प्रति हेक्टेयर अथवा टेबुकोनाजाल 10 प्रतिशत + सल्फर 65 प्रतिशत डब्ल्यूजी 1250 ग्राम प्रति हेक्टेयर अथवा पायरोक्लोस्ट्रोबीन + इपोक्कोसीकोनाजोल 750 एमएल प्रति हेक्टेयर/600 लीटर पानी में मिलाकर अनुशंसित फफूंदनाशकों के छिडकाव की सलाह दी है। पोषक तत्व की कमी को पूरा करने हेतु 0:52:34 एनपीके अथवा 0:0:50 घुलनशील पोटाश का 2.5 किलों ग्राम प्रति हेक्टेयर छिडकाव करना भी लाभदायक रहेगा। उक्त जानकारी कृषि विज्ञान केंद्र आगर से प्राप्त हुई है।
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