रतलाम/बाजना ! बाजना की पावन धरा पर तप, त्याग, संयम और गुरु भक्ति की मिसाल बनीं आगमोद्धारक सागरानंद सूरीश्वरजी महाराजा के समुदायवर्तिनी, मालवदेश दीपिका मनोहर श्रीजी म.सा. की शिष्या, मालवज्योति गुरुवर्या इंदु श्रीजी म.सा. की शिष्या एवं मालव के वरिष्ठ वात्सल्यवारिधि पूज्य हेमेन्द्र श्रीजी म.सा. की लघु भगिनी, प्रवचन प्रभाविका परम पूज्य साध्वीवर्या सौम्ययशा श्रीजी म.सा. की देह पंचतत्व में विलीन हो गई। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में गुरु भक्त, सकल जैन श्वेतांबर समाज, श्री संघ बाजना तथा सुश्रावक-सुश्राविका गण शामिल हुए और नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
पूज्य गुरुमाता की अंतिम यात्रा ने बाजना में गुरु भक्ति का ऐसा दृश्य प्रस्तुत किया, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा। बाजना के इतिहास में पहली बार सकल ग्रामवासियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर वात्सल्यवारिधि गुरुमाता को श्रद्धांजलि अर्पित की। अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब गुरु भक्ति की सीमाएं लांघ गया। हर आंख नम थी और वातावरण में “गुरुदेव, हमें आपका आशीर्वाद मिले” जैसे जयकारे गूंजते रहे।
पूज्य गुरुमाता ने अपने जप-तप, संयम और समाधिपूर्वक उपवास की तपस्या के माध्यम से बाजना की धरा को धन्य किया। उनकी अंतिम क्रियाओं से पूर्व परम पूज्य सा. श्री अर्पिता श्रीजी म.सा., पूज्य रश्मिता श्रीजी म.सा., पूज्य समर्पिता श्रीजी म.सा. एवं पूज्य पंथ श्रीजी म.सा. द्वारा वोसराने की क्रिया विधिवत संपन्न करवाई गई। इसके बाद पार्थिव देह श्री संघ को सौंपी गई।
श्री संघ द्वारा पूज्य गुरुमाता की डोली जैन मंदिर से प्रारंभ होकर मेन सदर बाजार, अम्बे चौक प्रांगण, बस स्टैंड, राजपूत मोहल्ला, कर्नाटक चौराहा होते हुए बालाजी मंदिर के पीछे कुशलगढ़ रोड स्थित सतीश चोरड़िया के फार्म हाउस तक निकाली गई। बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और भक्ति धुनों के बीच निकली पालकी यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
फार्म हाउस पर विधिवत अग्नि संस्कार संपन्न हुआ। अग्नि संस्कार के लाभार्थी पूज्य गुरुमाता के सांसारिक पिता बाबूलाल मगनलाल मंडोवरा परिवार, देपालपुर रहे। परिवार की ओर से ₹6,66,600 (छह लाख छाछठ हजार छह सौ रुपये) की अंतिम बोल लगाकर दाह संस्कार का लाभ लिया गया। वहीं अंतिम संस्कार के लिए भूमि सतीश चोरड़िया द्वारा दान में दी गई।
अंतिम संस्कार के दौरान सभी ने नवकार मंत्र का जाप किया तथा पूज्य गुरुमाता के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए क्षमा याचना कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। अन्य विधियों के लाभार्थी परिवारों की भी अनुमोदना की गई।
पूज्य गुरुमाता की अंतिम यात्रा ने बाजना में यह संदेश दिया कि संतों का जीवन शरीर तक सीमित नहीं होता, बल्कि उनके तप, त्याग, संयम और संस्कार समाज को सदैव दिशा देते रहते हैं। गुरु भक्ति से ओतप्रोत इस अंतिम यात्रा ने बाजना की धार्मिक और सामाजिक एकजुटता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
रिपोर्ट ईश्वर टांक ( बाजना )