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डाक्टर सम्पत स्वरूप जाजू ने अफ़ीम उत्पादक क्षेत्र के सांसदो और किसान संगठनों अफ़ीम नीति और तथाकथित अफ़ीम उत्पादक क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और सत्ता रूढ़ दल से जुड़े किसान संगठनों का अफ़ीम उत्पादक किसानो को भ्रमित कर राजनीतिक लाभ लेने का नाटक बताया ? नीमच के पूर्व विधायक डाक्टर सम्पत स्वरूप जाजू ने बयान में कहा कि अफ़ीम उत्पादक किसानों को अफ़ीम उत्पादक क्षेत्र के जिम्मेदार प्रतिनिधि जिस तरह से विगत एक दशक से झूठे वादों और जुमलो के माध्यम से भ्रमित कर राजनीतिक रोटियां सेकते हुए भ्रमित कर उनका शोषण कर रहे हैं वह दुर्भाग्य पूर्ण है ! डाक्टर जाजू के अनुसार विगत कई वर्षों से प्रत्येक वर्ष जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और किसान संघटन अफ़ीम नीति की घोषणा के पूर्व नाटक करते हुए अफ़ीम सलाहकार समिति की मीटिंगों से लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी से व्यक्ति गत मुलाक़ात करते हुए जो प्रमुख माँग रखते है उनका अफ़ीम नीति से दूर दूर तक कोई सम्बन्ध नहीं है ! डाक्टर जाजू ने कहा कि निम्न प्रमुख मांगे 1-ऐनडीपीएस की धारा 7/29 में संशोधन की , उसका अफ़ीम नीति से कोई सम्बन्ध नहीं है इस धारा को संसद ही समाप्त/ संशोधित कर सकती है ! * सबसे बड़ा प्रश्न है कि अफ़ीम उत्पादक क्षेत्र के जिम्मेदार सांसदो ने धारा 8/29 के समाप्त करने या उसमे संशोधन के बारे में कितनी बार संसद के समक्ष रखा? * अफ़ीम उत्पादक क्षेत्र के किसानो की कई बार से लगातार चुने जाने वाले सांसदो से अपेक्षा है कि वे इस बारे में विगत एक दशक की जानकारी तथ्यों के साथ प्रस्तुत करें ! 2- अफ़ीम और डोडा चूरी के मूल्यों में वृद्धि का भी अफ़ीम नीति से कोई संबंध नहीं है ! मूल्यों की वृद्धि केंद्रीय राजस्व मंत्रालय जो वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आता है जिसकी मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी हैं ! दस वर्ष पूर्व केंद्रीय राजस्व विभाग ने अफ़ीम के मूल्य निर्धारण करने के लिए एक समिति का गठन किया था और उस समिति ने सम्पूर्ण अफ़ीम उत्पादक करने की गहनता से जाँच कर सन् 2016 में ही 87% मूल्य बढ़ाने की सिफारिश थी ! लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि वित्त मंत्रीजी जिनके पास मूल्य बढ़ाने का अधिकार है उस समिति की सिफारिशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया ! अफ़ीम उत्पादक क्षेत्र के चुने हुए सांसदो ने आज तक समिति की अनुशंसा को गंभीरता से वित्त मंत्री से स्वीकृत करने की पहल की ! वित्त मंत्री जी कभी भी मूल्य वृद्धि के आदेश दे सकती है ! मूल्य वृद्धि का अफ़ीम नीति से कोई लेना ना देना है ! 3-अफ़ीम को फ़सल बीमा योजना में शामिल करने की मांग भी अफ़ीम नीति का हिस्सा नहीं है ! अफ़ीम की फसल को फ़सल बीमा में सम्मिलित करने का काम केंद्रीय कृषि मंत्रालय के तहत है ! केंद्रीय फसल बीमा योजना (प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना - PMFBY) [केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आती है और इसके वर्तमान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह है शिवराजजी चौहान स्वयं एक किसान है और वे अफ़ीम उत्पादक किसानों की समस्या को भली भाती समझते है लेकिन उन्होंने ने भी अफ़ीम फ़सल को फ़सल बीमा में शामिल करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए ! डाक्टर जाजू ने अफ़ीम उत्पादक क्षेत्र के सांसदो की तथाकथित कार्यशैली पर आरोप लगाते हुए अनुरोध किया कि यह अफ़ीम उत्पादक क्षेत्र के ज़िम्मेदार जनप्रतिनिधियों का दायित्व और कर्तव्य है कि वे उपरोक्त माँगो को उचित सक्षम मंत्री के सम्मुख रख कर राहत प्रदान करवाते लेकिन वे प्रत्येक वर्ष अफ़ीम नीति आने के पूर्व संसदीय क्षेत्र में मीडिया (प्रिंट, इलेक्ट्रानिक और सोशल) के माध्यम से किसानो को भ्रमित करने वाले बयान देकर उनका शोषण करते हैं ! |