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चीताखेड़ा । विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विगत कई दिनों से बिना सुचना के दिन और रात में कभी लोड सेंटिंग तो कभी मेंटेनेंस तो कभी तार तो कभी खंभा टूटने के नाम पर कभी घोषित तो कभी अघोषित रूप से बेवजह अंधाधुंध बिजली कटौती की जा रही है। और अधिक तर कटौती भी ऐसे समय की जा रही है कि दिन भर किसान, मजदूर खेतों से अपने नित्य कार्य से थक-हारकर जब घर आता है तो गुप अंधेरा छाया रहता है। विद्युत वितरण कंपनी के प्रति किसान, मजदूर और हर आमजन में भारी आक्रोश है, ग्रामीणों का कभी भी फुट सकता है सब्र का बांध। उल्लेखनीय है कि विद्युत वितरण कंपनी द्वारा इन दिनों विद्युत कटौती करने की सारी सीमाएं पार कर चुकी है। बिजली कटौती भी ऐसे समय की जा रही है किसान खरिफ सीजन की फसलों को समेटकर रबी सीजन की फसलों की बुवाई का कार्य में अतिव्यस्त है। कमरतोड़ मेहनत कर थक-हार कर जब घर आता है तो गांव घर में बिजली बंद रहती हैं। अंधेरे में जानलेवा जहरीले जानवर इधर -उधर रेंगते हुए दिखाई देते हैं। जिससे ग्रामीणों में जहरीले जानवरों का भय और बिजली कंपनी के चलते रवैए की खिलाफ आक्रोश पनप रहा है। *किसान रतनलाल माली का कहना है कि अभी किसान खेत खाली करने में लगा हुआ है बिजली की खपत भी इतनी नहीं है फिर भी इतनी कटौती। अगर किसान अपने खेतों में रबी सीजन की फसलों की सिंचाई शुरू कर देगा तो क्या होगा। बिजली कंपनी को चाहिए कि शीघ्र सुधार कर सभी वर्गों को राहत दे। गृहणी श्रीमती लक्ष्मी बाई जावरिया का कहना है कि दिनभर खेतों में किसानी कार्य कर थक-हार कर जब शाम ढलने पर घर आते हैं तो बिजली बंद मिलती है ऐसे समय घर में कैसे भोजन बनाएं और कैसे पशुओं का दूध निकाले। नीमच जिला डिवीजन कार्यालय कार्यपालन यंत्री महित सोनी का कहना है कि ऊपर से जैसे हमें निर्देश प्राप्त होते हैं हमें पालन करना पड़ता है। पर्याप्त बिजली सप्लाई हेतु हम भी चिंतन-मनन कर रहे हैं, हम बहुत जल्दी व्यवस्था को सामान्य कर लेंगे। ऐसे वक्त राजनीतिक दल चाहे सत्ता धारी हो या विपक्ष सभी धृतराष्ट्र बने बैठे हैं। बिजली कंपनी जब मन चाहा बिजली दर बढ़ा देती है पर व्यवस्था में कोई सुधार नहीं।अगर शीघ्र ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आंदोलन की राह अपनानी पड़ेगी। रिपोर्ट : दशरथ जी माली |