रतलाम। इंसान अपने जीवन में समाज के लिए बहुत कुछ करता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा करने का संकल्प लेकर दूसरों के लिए प्रेरणा बन जाते हैं। रतलाम के जवाहर नगर निवासी श्रीमती निर्मला देवी ने देहदान का संकल्प लेकर ऐसी ही अनुकरणीय मिसाल पेश की है। वर्षों से देहदान का संकल्प पत्र भरने की इच्छा मन में संजोए बैठीं निर्मला देवी की यह मनोकामना आखिरकार पूरी हुई। उनकी इस पहल का प्रभाव इतना गहरा रहा कि दादी के निर्णय से प्रेरित होकर पोती कीर्ति तोमर ने भी भविष्य में देहदान करने का संकल्प ले लिया।
दादी का संकल्प बना पोती की प्रेरणा, एक परिवार ने दिया समाज को बड़ा संदेश
निर्मला देवी के लिए यह केवल एक संकल्प पत्र भरने की औपचारिकता नहीं, बल्कि वर्षों से मन में संजोई इच्छा की पूर्ति का भावुक क्षण था। घर पर ही देहदान संकल्प पत्र भरने की प्रक्रिया पूरी हुई तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए अपनी वर्षों पुरानी मनोकामना पूरी होने पर संतोष जताया।
इस प्रेरणादायी पहल में काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सचिव एवं समाजसेवी गोविंद काकानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
रेलवे कर्मचारी संजय सिंखेड़कर के आग्रह पर गोविंद काकानी तत्काल देहदान का संकल्प पत्र लेकर निर्मला देवी के जवाहर नगर स्थित निवास पहुंचे। यहां सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी जितेंद्र सिंह तोमर, विजयता जितेंद्र सिंह तोमर और पोती कीर्ति तोमर की सहमति एवं उपस्थिति में संकल्प पत्र भरने की प्रक्रिया पूरी की गई।
इस अवसर ने परिवार के सामने सेवा और समर्पण का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जिसने अगली पीढ़ी को भी प्रेरित किया। दादी के निर्णय से प्रभावित होकर कीर्ति तोमर ने भी भविष्य में देहदान करने का संकल्प लिया। यह पहल बताती है कि जब परिवार में सेवा और परोपकार के संस्कार जीवित रहते हैं, तो उनका प्रभाव पीढ़ियों तक पहुंचता है।
रेलवे विभाग ने किया सम्मान, मेडिकल कॉलेज ने जारी किया परिचय पत्र
निर्मला देवी के इस पुनीत निर्णय के लिए मंडल रेल प्रबंधक अश्विनी कुमार की उपस्थिति में रेलवे विभाग द्वारा उनका सम्मान कर उत्साहवर्धन किया गया। इसके बाद डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे मेडिकल कॉलेज के मानव संरचना विभाग के प्रभारी डॉ. राजेंद्र सिंगरौले और डीन डॉ. अनीता मुथा के सहयोग से परिचय पत्र बनवाकर परिवार को सौंपा गया।
देहदान चिकित्सा शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान है। इससे मेडिकल विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना का व्यावहारिक अध्ययन करने का अवसर मिलता है। चिकित्सा शिक्षा में इस तरह का योगदान भविष्य के चिकित्सकों के प्रशिक्षण में सहायक बन सकता है।
मृत्यु के बाद भी किसी के काम आएगा जीवन का अंतिम उपहार
निर्मला देवी का देहदान संकल्प समाज को सोचने और समझने का अवसर देता है कि मानवता की सेवा के लिए उम्र या परिस्थितियां बाधा नहीं हैं। जहां अधिकांश लोग मृत्यु के बाद की रस्मों तक सीमित रहते हैं, वहीं निर्मला देवी ने अपने शरीर को चिकित्सा शिक्षा के लिए समर्पित करने का संकल्प लेकर समाजहित की एक नई राह दिखाई है।
निर्मला देवी एवं उनके परिवार ने इस पुनीत कार्य को पूरा कराने में सहयोग देने के लिए काकानी सोशल वेलफेयर फाउंडेशन के सचिव गोविंद काकानी और रेलवे कर्मचारी संजय सिंखेड़कर के प्रति आभार व्यक्त किया।
निर्मला देवी का संकल्प एक सशक्त संदेश है—जीवन समाप्त हो सकता है, लेकिन मानवता की सेवा का संकल्प मृत्यु के बाद भी दूसरों के काम आ सकता है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत