|
|
तेल सप्लाई पर असर, कीमतें उछलीं.....युद्ध जल्द खत्म होने के दावों के बीच जमीनी हालात गंभीर नई दिल्ली : अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध लगातार तेज होता जा रहा है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिका ने ईरान के अहम इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे पुलों और बिजली संयंत्रों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में हमले और तेज किए जा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, युद्ध की शुरुआत फरवरी 2026 में बड़े एयरस्ट्राइक के साथ हुई थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच लगातार जवाबी कार्रवाई जारी है। ईरान की ओर से ड्रोन और मिसाइल हमले किए जा रहे हैं, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देश भी जवाबी कार्रवाई में सक्रिय हैं। क्षेत्र के कई हिस्सों में हवाई हमले और एयर डिफेंस सिस्टम के बीच टकराव की खबरें सामने आ रही हैं। इस संघर्ष का असर वैश्विक स्तर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। दुनिया की प्रमुख तेल आपूर्ति का मार्ग माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट पर दबाव बढ़ गया है, जिससे कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है। मानवीय दृष्टिकोण से भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, हजारों लोगों की जान जा चुकी है और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं। अस्पतालों और राहत संसाधनों पर भी भारी दबाव देखा जा रहा है। हालांकि अमेरिकी पक्ष की ओर से यह दावा किया गया है कि युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है, लेकिन जमीनी स्तर पर लगातार हो रहे हमले इस दावे पर सवाल खड़े कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है। ईरान-अमेरिका के बीच जारी यह संघर्ष फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। बढ़ते हमले, तेल संकट और मानवीय नुकसान के बीच पूरी दुनिया की नजरें इस युद्ध के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। |