सैलाना/रतलाम
वार्ड क्रमांक 09 में 81.65 लाख रुपये की लागत से बनने वाली सड़क को लेकर विवाद अब राजनीतिक और सामाजिक रूप से गरमाता जा रहा है। सड़क के प्रस्तावित मार्ग को लेकर उठे विवाद के बीच आदिवासी हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कई जनप्रतिनिधियों ने खुलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
मामले में आरोप लगाए जा रहे हैं कि केवल एक व्यक्ति, मनीष धबाई, को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सड़क का मार्ग शासकीय भूमि के बजाय निजी खेत से निकालने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो एकलव्य आदिवासी कॉलोनी सहित आसपास के हजारों परिवार सड़क सुविधा से वंचित रह जाएंगे, जिससे वर्षों से चली आ रही उनकी मांग अधूरी रह जाएगी।
इस मुद्दे पर पूर्व विधायक संगीता चारेल और पूर्व मंडी अध्यक्ष विजय चारेल ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि सैलाना नगर में आदिवासी समाज के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकास कार्यों के नाम पर यदि आदिवासी बस्तियों के हितों की अनदेखी की गई तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
बुधवार 10 जून को आयोजित सड़क भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान भी यह मामला सामने आया। कार्यक्रम में मौजूद सांसद अनीता नागर सिंह चौहान के समक्ष विधायक कमलेश्वर डोडियार ने नगर परिषद के सीएमओ को स्पष्ट निर्देश दिए कि सड़क का निर्माण केवल राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज 22 फीट चौड़े शासकीय मार्ग पर ही किया जाए। विधायक डोडियार ने सांसद अनीता नागर सिंह चौहान और पूर्व विधायक संगीता चारेल से भी आदिवासी हितों को ध्यान में रखते हुए इस मामले में हस्तक्षेप करने का आग्रह किया।
इसके बाद विधायक डोडियार ने संयुक्त संचालक नगरीय विकास एवं आवास उज्जैन, कलेक्टर रतलाम तथा एसडीएम एवं तहसीलदार सैलाना को अलग-अलग पत्र भेजकर मौके पर सीमांकन कराने और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।
विधायक कमलेश्वर डोडियार मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि सड़क निर्माण केवल राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज शासकीय भूमि पर ही होना चाहिए। किसी भी व्यक्ति विशेष के हित में आदिवासी समाज और हजारों परिवारों के अधिकारों से समझौता नहीं किया जाएगा। यदि आवश्यकता पड़ी तो ग्रामीण स्वयं भूमि देने को तैयार हैं, लेकिन निजी भूमि से अवैध रूप से रास्ता निकालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। आदिवासी हितों की रक्षा हमारी प्राथमिकता है और प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की अपेक्षा है।
अब 81.65 लाख की इस सड़क को लेकर यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर विकास का लाभ हजारों आदिवासी परिवारों तक पहुंचेगा या फिर पूरा मामला एक व्यक्ति को फायदा पहुंचाने के आरोपों के बीच उलझकर रह जाएगा। फिलहाल प्रशासनिक कार्रवाई और जनप्रतिनिधियों के अगले कदम पर पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी हुई हैं।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत