रतलाम / सैलना : वाग्धारा संस्था के मार्गदर्शन में सैलाना ब्लॉक के ग्राम अंबाकुडी में खरीफ बीज उत्सव 2026 का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य देशी एवं परंपरागत बीजों के संरक्षण जैव विविधता संवर्धन किसानों में आत्मनिर्भर खेती की भावना जगाना तथा बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण के लिए सामुदायिक जागरूकता फैलाना था।
कार्यक्रम की शुरुआत जागरूकता रैली से हुई जिसमें गांव के महिलाएं पुरुष युवा और बच्चे बड़े उत्साह के साथ शामिल हुए। रैली के दौरान प्रतिभागियों ने देशी बीजों के संरक्षण पर्यावरण संतुलन प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और हर बच्चा स्कूल जाए बाल श्रम से दूर रहे जैसे महत्वपूर्ण संदेश वाले बैनर और पोस्टर प्रदर्शित किए। रैली के बाद आयोजित संवाद सत्र में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों सूखा अनियमित वर्षा और स्थानीय स्तर पर अपनाए जा सकने वाले अनुकूलन उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर विशेष संवाद का आयोजन किया गया। इसमें बाल श्रम के कारणों, इसके दीर्घकालिक दुष्प्रभावों और बच्चों के शिक्षा स्वास्थ्य तथा समग्र विकास के अधिकारों पर गहन चर्चा हुई।
समुदाय को बताया गया कि बाल श्रम न केवल बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन है बल्कि पूरे समाज के भविष्य को प्रभावित करता है। बच्चों को स्कूल से जोड़ना उन्हें सुरक्षित बचपन प्रदान करना तथा बाल श्रम अधिनियम के प्रावधानों और दंड की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम में व्यावहारिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं।
किसानों को बीज उपचार की पारंपरिक विधियां सिखाई गईं मिट्टी परीक्षण के महत्व पर चर्चा की गई और सीड बॉल (बीज गोले) निर्माण कार्यशाला का आयोजन किया गया। देशी बीजों की प्रदर्शनी में स्थानीय किसानों ने अपनी फसलों के विभिन्न पारंपरिक बीज प्रदर्शित किए जिससे बीजों की विविधता और उनके महत्व को समझा जा सका।
ब्लॉक समन्वयक पिंकी टेलर ने कहा देशी बीज केवल खेती का साधन नहीं बल्कि हमारी संस्कृति परंपरा और खाद्य सुरक्षा का आधार हैं। बदलते मौसम में ये बीज स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल होने के कारण किसानों को आत्मनिर्भर बनाते हैं। हमें बीज संरक्षण के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा और बाल श्रम के विरुद्ध निरंतर संघर्ष करना चाहिए।
सामुदायिक सहजकर्ता राकेश पारगी मनोज डामर दिव्या शर्मा अमृत राम परिहार और कांतिलाल गहलोत ने भी अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा कि बाजार आधारित हाइब्रिड बीजों पर बढ़ती निर्भरता किसानों को आर्थिक रूप से कमजोर बना रही है। देशी बीज कम लागत कम पानी और कम रसायनों में भी अच्छी पैदावार देते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे परंपरागत ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर टिकाऊ कृषि को बढ़ावा दें और बाल अधिकारों की रक्षा करें।
परंपरागत बीज बैंक बीज आदान-प्रदान प्रथा और समुदाय आधारित संरक्षण मॉडल पर चर्चा के दौरान किसानों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि देशी बीज कम संसाधनों में भी बेहतर परिणाम देते हैं और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हैं।
कार्यक्रम के दौरान परंपरागत ढोल-कुंडी की धुन पर गांव भ्रमण किया गया। अंत में ग्राम स्वराज समूह सक्षम समूह बाल स्वराज समूह और समुदाय के सदस्यों ने सामूहिक संकल्प लिया। संकल्प में देशी बीजों के संरक्षण प्राकृतिक खेती को बढ़ावा रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने पर्यावरण संरक्षण और बाल श्रम मुक्त गांव बनाने का संदेश शामिल था।
समापन सत्र में देशी बीजों की सुरक्षा प्रकृति की सुरक्षा जैव विविधता का सम्मान आत्मनिर्भर किसान की पहचान परंपरागत बीजों से समृद्ध खेती और सुरक्षित भविष्य तथा हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार बाल श्रम मुक्त हो हर परिवार जैसे प्रेरक नारों के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।
रिपोर्टर : जितेन्द्र कुमावत