रतलाम/बाजना : एक्सिस बैंक फाउंडेशन के सहयोग से वाग्धारा संस्था के तत्वावधान में बाजना ब्लॉक के ग्राम ठिकरिया में एक दिवसीय स्वराज समागम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्थानीय महिला-पुरुष ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी। सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण परंपरागत खेती देशी बीज संरक्षण स्थानीय उद्यम पोषण सुरक्षा तथा आदिवासी स्वराज जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत संवाद किया।
कार्यक्रम की शुरुआत ब्लॉक सहजकर्ता रेणुका पोरवाल ने की। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों की जानकारी दी और वाग्धारा संस्था द्वारा क्षेत्रीय समुदाय के सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों का उल्लेख किया।
इसके बाद सामुदायिक सहजकर्ता बालाराम चरपोटा ने पर्यावरण अनुकूल परंपरागत कृषि पद्धतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परंपरागत खेती न केवल मिट्टी पानी और जैव विविधता की रक्षा करती है बल्कि किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आजीविका सुनिश्चित करने का सबसे मजबूत आधार भी है। उन्होंने रासायनिक खाद-कीटनाशकों के दुष्प्रभावों से बचने और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की।
कृषि एवं आदिवासी स्वराज संगठन के कॉर्डिनेटर मोहनलाल भूरिया ने आदिवासी स्वराज की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने जल जमीन जंगल जानवर और बीज को आदिवासी जीवन-संस्कृति के पांच प्रमुख स्तंभ बताते हुए इनके संरक्षण एवं संवर्धन पर जोर दिया।
शंकरलाल मईडा ने संगठन के विभिन्न कार्यों की जानकारी देते हुए समुदाय को एकजुट होकर स्थानीय संसाधनों के संरक्षण के लिए आगे आने का आह्वान किया।
माही मध्यप्रदेश के इकाई प्रबंधक ने स्थानीय खेती आधारित उद्यमों आय के स्रोतों स्वास्थ्य एवं पोषण पर विस्तृत संवाद किया। उन्होंने पोषण वाटिका संतुलित आहार और पारंपरिक खाद्य पदार्थों (जैसे रागी कोदो कुटकी महुए आदि) को दैनिक जीवन में शामिल करने की सलाह दी। उन्होंने स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर पोषण संबंधी समस्याओं से निपटने का मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण कड़ी आभा चरपोटा द्वारा दी गई देशी बीज संरक्षण एवं बीज उपचार की पारंपरिक जैविक विधियों की कार्यशाला रही। उन्होंने विभिन्न प्राकृतिक तरीकों से बीजों को मजबूत बनाने उनकी अंकुरण क्षमता बढ़ाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने की जानकारी साझा की।
समागम के दौरान विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर विशेष चर्चा का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा सुरक्षा और सम्मानजनक बचपन का अधिकार है। बाल श्रम बच्चों के शारीरिक मानसिक और शैक्षणिक विकास में बड़ी बाधा है। इस अवसर पर सभी उपस्थित ग्रामीणों ने बाल श्रम मुक्त गांव बनाने और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की शपथ ली।
समागम में शामिल ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से देशी बीज संरक्षण प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने और आदिवासी स्वराज की भावना को मजबूत करने का संकल्प लिया।
अंत में रमेश चरपोटा ने सभी अतिथियों वक्ताओं प्रतिभागियों और सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम की सफलता में वाग्धारा संस्था की टीम के काली भूरिया प्रवीण चरपोटा बालचंद डामोर अनिल कटारा मगन डोडियार कपिल वसुनिया शंकर मुनिया सहित ग्राम स्तरीय संगठन के सदस्यों और पूरे ग्रामीण समुदाय का सक्रिय योगदान रहा।