रतलाम। रविवार सुबह मथुरी गांव के पास ऐसी घटना सामने आई जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। रिंग रोड चौराहे के समीप एक सुनसान पुलिया के नीचे पड़े पानी के पाइप से आती मासूम की रोने की आवाज ने एक किसान को रोक लिया। जब उसने साहस जुटाकर पाइप के भीतर झांका तो वहां बोरे और प्लास्टिक की थैली में लिपटा एक नवजात बालक जीवित अवस्था में मिला। यदि कुछ देर और हो जाती तो मासूम की जान पर बन सकती थी।
जानकारी के अनुसार मथुरी गांव निवासी किसान अंबाराम पाटीदार रविवार सुबह घोड़ाखेड़ा रोड स्थित अपने खेत की ओर जा रहे थे। पुलिया से गुजरते समय उन्हें बच्चे के रोने की हल्की आवाज सुनाई दी। पहले तो उन्हें लगा कि शायद कोई भ्रम हो, लेकिन आवाज लगातार आती रही। उन्होंने पाइप के पास जाकर देखा तो भीतर एक बोरा रखा हुआ था। बोरा खोलते ही वे सन्न रह गए। उसके अंदर प्लास्टिक की थैली में एक नवजात बालक तड़प रहा था।
ग्रामीणों के मुताबिक नवजात की नाल और आंत तक नहीं कटी थी, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि उसका जन्म कुछ ही समय पहले हुआ था और जन्म के तुरंत बाद उसे सुनसान स्थान पर छोड़ दिया गया। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं और क्षेत्र में आक्रोश भी फैल गया।
अंबाराम पाटीदार ने बिना देर किए गांव के लोगों को सूचना दी। कुछ ही देर में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और डायल-112 को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही डीडी नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और नवजात को सुरक्षित अपने संरक्षण में लेकर तत्काल मदर एंड चाइल्ड हेल्थ (एमसीएच) यूनिट पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसका उपचार शुरू किया। फिलहाल मासूम की हालत स्थिर बताई जा रही है।
डीडी नगर थाना प्रभारी अनुराग यादव ने बताया कि पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। इसके अलावा क्षेत्र के अस्पतालों, निजी प्रसूति केंद्रों और दाइयों से भी जानकारी जुटाई जा रही है ताकि बच्चे को इस हालत में छोड़ने वाले व्यक्ति या लोगों तक पहुंचा जा सके।
एक ओर जहां किसी ने जन्म लेते ही मासूम को मौत के मुंह में धकेलने की कोशिश की, वहीं किसान अंबाराम पाटीदार की सतर्कता और संवेदनशीलता ने उसकी जिंदगी बचा ली। यह घटना समाज के सामने कई सवाल खड़े करती है, लेकिन साथ ही यह संदेश भी देती है कि इंसानियत आज भी जिंदा है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत