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  • राज्य : मानसरोवर झील प्रकरण NGT में संयुक्त समिति की रिपोर्ट पर परिवादी संस्था ने 3.24 वर्ग किमी कैचमेंट की अनदेखी पर जताई आपत्ति संयुक्त समिति की रिपोर्ट खारिज करने की मांग

    SSE NEWS NETWORK   - भीलवाड़ा
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    राज्य   - भीलवाड़ा[29-06-2026]
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  • भीलवाड़ा : राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), केंद्रीय क्षेत्र, भोपाल में विचाराधीन Original Application No. 15/2026 में आवेदक संस्था Public Power and Awareness Society Bhilwara  के प्रदेश अध्यक्ष गोटू सिंह राजपूत की ओर से संयुक्त समिति (Joint Committee) की रिपोर्ट के विरुद्ध 19 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत आपत्तियां प्रस्तुत की गई हैं। आवेदन में कहा गया है कि समिति की रिपोर्ट तथ्यात्मक, वैज्ञानिक एवं कानूनी दृष्टि से गंभीर त्रुटियों से ग्रसित है तथा इसे स्वीकार किया जाना प्राकृतिक न्याय एवं पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांतों के विपरीत होगा।

    आवेदन में कहा गया है कि जल संसाधन विभाग के मूल अभिलेखों के अनुसार किशनावतों की खेड़ी तालाब (वर्तमान मानसरोवर झील) का मूल कैचमेंट क्षेत्र 3.24 वर्ग किलोमीटर (लगभग 1300 बीघा) है। इसके अतिरिक्त तालाब का जल फैलाव क्षेत्र 5.20 हेक्टेयर तथा सिंचित क्षेत्र 28 हेक्टेयर दर्ज है। इसके बावजूद संयुक्त समिति ने केवल वर्तमान कृत्रिम झील को आधार बनाया और मूल तालाब, उसके प्राकृतिक जलग्रहण क्षेत्र, जल आगमन मार्गों तथा ऐतिहासिक स्वरूप की जांच ही नहीं की।

    आपत्ति में यह गंभीर प्रश्न भी उठाया गया है कि जब जल संसाधन विभाग के रिकॉर्ड में 3.24 वर्ग किलोमीटर का कैचमेंट दर्ज है तो वही क्षेत्र UIT के रिकॉर्ड में घटकर लगभग 54 बीघा कैसे रह गया। संयुक्त समिति ने इस महत्वपूर्ण तथ्य की न तो जांच की और न ही इसका कोई स्पष्टीकरण दिया। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि समिति ने जल संसाधन विभाग के मूल अभिलेखों की अनदेखी कर केवल वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड पर भरोसा किया, जबकि उसी राजस्व रिकॉर्ड की वैधता विवादित है।

    आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि समिति की अपनी रिपोर्ट के अनुसार संवत 2033 से 2036 के दौरान खसरा संख्या 93 94 95 96 एवं 142 को पेटा और पाल के रूप में दर्ज किया गया था जो मूल तालाब का अभिन्न हिस्सा थे। बाद में इन्हीं भूमि खंडों को गैर मुमकिन आबादी में परिवर्तित कर दिया गया, लेकिन समिति ने यह जांच नहीं की कि यह परिवर्तन किस कानूनी अधिकार से किया गया तथा क्या यह पर्यावरण एवं राजस्व कानूनों के अनुरूप था।

    आवेदन में आरोप लगाया गया है कि संयुक्त समिति ने यह भी नहीं देखा कि मूल कैचमेंट क्षेत्र में अवैध कॉलोनियां व्यावसायिक निर्माण सड़कें एवं अन्य निर्माण कार्य किए गए हैं या नहीं तथा क्या इन निर्माणों से प्राकृतिक जल निकासी एवं वर्षा जल का प्रवाह बाधित हुआ है। DGPS सर्वे GIS मैपिंग वैज्ञानिक सत्यापन तथा मूल जलग्रहण क्षेत्र का सीमांकन कराए बिना रिपोर्ट तैयार करना पर्यावरणीय दृष्टि से गंभीर लापरवाही बताया गया है।

    आवेदन में संयुक्त समिति की निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि जब मूल आवेदन में स्वयं UIT की भूमिका पर प्रश्न उठाए गए थे तब जिला कलेक्टर द्वारा UIT सचिव को ही संयुक्त समिति का सदस्य नामित कर दिया गया। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत कोई व्यक्ति अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता का स्पष्ट उल्लंघन है।

    आवेदन में यह भी कहा गया है कि संयुक्त समिति के नामित सदस्यों ने स्वयं स्थल निरीक्षण नहीं किया। वास्तविक निरीक्षण अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा किया गया, जबकि बाद में वरिष्ठ अधिकारियों ने बिना स्वयं निरीक्षण किए रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कर दिए। GPS युक्त फोटोग्राफ भी यही दर्शाते हैं कि मौके पर अधीनस्थ अधिकारी ही उपस्थित थे।

    आवेदक ने यह भी आरोप लगाया है कि निरीक्षण के दौरान उसकी उपस्थिति के बावजूद जल के नमूने उसके सामने सील नहीं किए गए, उसके द्वारा मौके पर दिए गए तथ्यों एवं आपत्तियों को निरीक्षण पंचनामे में दर्ज नहीं किया गया तथा निरीक्षण कार्यवाही पर उसके हस्ताक्षर तक नहीं लिए गए। इससे संपूर्ण निरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

    आवेदन में सर्वोच्च न्यायालय एवं राष्ट्रीय हरित अधिकरण के महत्वपूर्ण निर्णयों जैसे हिंच लाल तिवारी जगपाल सिंह एवं कमला देवी मामलों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इन निर्णयों के अनुसार प्राकृतिक जलाशयों एवं उनके कैचमेंट क्षेत्र का संरक्षण अनिवार्य है लेकिन संयुक्त समिति ने इन बाध्यकारी निर्णयों की भी अनदेखी की है। साथ ही Public Trust Doctrine Precautionary Principle Sustainable Development Principle तथा Polluter Pays Principle जैसे मूल पर्यावरणीय सिद्धांतों को भी लागू नहीं किया गया।

    आवेदन में यह भी कहा गया है कि लगभग 20 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि DMFT योजना के अंतर्गत मानसरोवर झील क्षेत्र में खर्च की जा रही है जबकि यह सत्यापित ही नहीं किया गया कि ये कार्य मूल 3.24 वर्ग किलोमीटर कैचमेंट क्षेत्र के भीतर तो नहीं हो रहे हैं। यदि ऐसा है तो इससे प्राकृतिक जलाशय को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।

    इन सभी तथ्यों के आधार पर NGT से संयुक्त समिति की वर्तमान रिपोर्ट को निरस्त कर एक नई स्वतंत्र संयुक्त समिति गठित करने मूल 3.24 वर्ग किलोमीटर कैचमेंट क्षेत्र का DGPS सर्वे कराने राजस्व रिकॉर्ड में आवश्यक संशोधन करने अवैध निर्माण एवं अतिक्रमण हटाने पर्यावरणीय क्षति का आकलन कर जिम्मेदार अधिकारियों से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलने तथा अंतिम निर्णय तक मूल कैचमेंट क्षेत्र में किसी भी प्रकार के नए निर्माण, विकास बिक्री अथवा हस्तांतरण पर रोक लगाने की मांग की गई है।

    रिपोर्ट : राजकुमार जी गोयल 







  • राज्य : मानसरोवर झील प्रकरण NGT में संयुक्त समिति की रिपोर्ट पर परिवादी संस्था ने 3.24 वर्ग किमी कैचमेंट की अनदेखी पर जताई आपत्ति संयुक्त समिति की रिपोर्ट खारिज करने की मांग

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    भीलवाड़ा : राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), केंद्रीय क्षेत्र, भोपाल में विचाराधीन Original Application No. 15/2026 में आवेदक संस्था Public Power and Awareness Society Bhilwara  के प्रदेश अध्यक्ष गोटू सिंह राजपूत की ओर से संयुक्त समिति (Joint Committee) की रिपोर्ट के विरुद्ध 19 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तृत आपत्तियां प्रस्तुत की गई हैं। आवेदन में कहा गया है कि समिति की रिपोर्ट तथ्यात्मक, वैज्ञानिक एवं कानूनी दृष्टि से गंभीर त्रुटियों से ग्रसित है तथा इसे स्वीकार किया जाना प्राकृतिक न्याय एवं पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांतों के विपरीत होगा।

    आवेदन में कहा गया है कि जल संसाधन विभाग के मूल अभिलेखों के अनुसार किशनावतों की खेड़ी तालाब (वर्तमान मानसरोवर झील) का मूल कैचमेंट क्षेत्र 3.24 वर्ग किलोमीटर (लगभग 1300 बीघा) है। इसके अतिरिक्त तालाब का जल फैलाव क्षेत्र 5.20 हेक्टेयर तथा सिंचित क्षेत्र 28 हेक्टेयर दर्ज है। इसके बावजूद संयुक्त समिति ने केवल वर्तमान कृत्रिम झील को आधार बनाया और मूल तालाब, उसके प्राकृतिक जलग्रहण क्षेत्र, जल आगमन मार्गों तथा ऐतिहासिक स्वरूप की जांच ही नहीं की।

    आपत्ति में यह गंभीर प्रश्न भी उठाया गया है कि जब जल संसाधन विभाग के रिकॉर्ड में 3.24 वर्ग किलोमीटर का कैचमेंट दर्ज है तो वही क्षेत्र UIT के रिकॉर्ड में घटकर लगभग 54 बीघा कैसे रह गया। संयुक्त समिति ने इस महत्वपूर्ण तथ्य की न तो जांच की और न ही इसका कोई स्पष्टीकरण दिया। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि समिति ने जल संसाधन विभाग के मूल अभिलेखों की अनदेखी कर केवल वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड पर भरोसा किया, जबकि उसी राजस्व रिकॉर्ड की वैधता विवादित है।

    आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि समिति की अपनी रिपोर्ट के अनुसार संवत 2033 से 2036 के दौरान खसरा संख्या 93 94 95 96 एवं 142 को पेटा और पाल के रूप में दर्ज किया गया था जो मूल तालाब का अभिन्न हिस्सा थे। बाद में इन्हीं भूमि खंडों को गैर मुमकिन आबादी में परिवर्तित कर दिया गया, लेकिन समिति ने यह जांच नहीं की कि यह परिवर्तन किस कानूनी अधिकार से किया गया तथा क्या यह पर्यावरण एवं राजस्व कानूनों के अनुरूप था।

    आवेदन में आरोप लगाया गया है कि संयुक्त समिति ने यह भी नहीं देखा कि मूल कैचमेंट क्षेत्र में अवैध कॉलोनियां व्यावसायिक निर्माण सड़कें एवं अन्य निर्माण कार्य किए गए हैं या नहीं तथा क्या इन निर्माणों से प्राकृतिक जल निकासी एवं वर्षा जल का प्रवाह बाधित हुआ है। DGPS सर्वे GIS मैपिंग वैज्ञानिक सत्यापन तथा मूल जलग्रहण क्षेत्र का सीमांकन कराए बिना रिपोर्ट तैयार करना पर्यावरणीय दृष्टि से गंभीर लापरवाही बताया गया है।

    आवेदन में संयुक्त समिति की निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं। इसमें कहा गया है कि जब मूल आवेदन में स्वयं UIT की भूमिका पर प्रश्न उठाए गए थे तब जिला कलेक्टर द्वारा UIT सचिव को ही संयुक्त समिति का सदस्य नामित कर दिया गया। यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत कोई व्यक्ति अपने ही मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता का स्पष्ट उल्लंघन है।

    आवेदन में यह भी कहा गया है कि संयुक्त समिति के नामित सदस्यों ने स्वयं स्थल निरीक्षण नहीं किया। वास्तविक निरीक्षण अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा किया गया, जबकि बाद में वरिष्ठ अधिकारियों ने बिना स्वयं निरीक्षण किए रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कर दिए। GPS युक्त फोटोग्राफ भी यही दर्शाते हैं कि मौके पर अधीनस्थ अधिकारी ही उपस्थित थे।

    आवेदक ने यह भी आरोप लगाया है कि निरीक्षण के दौरान उसकी उपस्थिति के बावजूद जल के नमूने उसके सामने सील नहीं किए गए, उसके द्वारा मौके पर दिए गए तथ्यों एवं आपत्तियों को निरीक्षण पंचनामे में दर्ज नहीं किया गया तथा निरीक्षण कार्यवाही पर उसके हस्ताक्षर तक नहीं लिए गए। इससे संपूर्ण निरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

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    आवेदन में यह भी कहा गया है कि लगभग 20 करोड़ रुपये की सार्वजनिक धनराशि DMFT योजना के अंतर्गत मानसरोवर झील क्षेत्र में खर्च की जा रही है जबकि यह सत्यापित ही नहीं किया गया कि ये कार्य मूल 3.24 वर्ग किलोमीटर कैचमेंट क्षेत्र के भीतर तो नहीं हो रहे हैं। यदि ऐसा है तो इससे प्राकृतिक जलाशय को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।

    इन सभी तथ्यों के आधार पर NGT से संयुक्त समिति की वर्तमान रिपोर्ट को निरस्त कर एक नई स्वतंत्र संयुक्त समिति गठित करने मूल 3.24 वर्ग किलोमीटर कैचमेंट क्षेत्र का DGPS सर्वे कराने राजस्व रिकॉर्ड में आवश्यक संशोधन करने अवैध निर्माण एवं अतिक्रमण हटाने पर्यावरणीय क्षति का आकलन कर जिम्मेदार अधिकारियों से पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूलने तथा अंतिम निर्णय तक मूल कैचमेंट क्षेत्र में किसी भी प्रकार के नए निर्माण, विकास बिक्री अथवा हस्तांतरण पर रोक लगाने की मांग की गई है।

    रिपोर्ट : राजकुमार जी गोयल 





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  • राज्य: भीलवाड़ा में एक शाम छात्रों की गूंज कार्यक्रम में छात्रों ने रखी बेबाक राय....शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए दिए सुझाव

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  • राज्य: भीषण गर्मी में बेजुबानों के लिए जीवनदान बना 90 दिवसीय गौ-सेवा संकल्प, निर्जला ग्यारस पर 2000 किलो हरा चारा किया समर्पित

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  • वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के अनुभव संगठन की अमूल्य धरोहर: सांसद अग्रवाल

    वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के अनुभव संगठन की अमूल्य धरोहर:
    राज्य   - भीलवाड़ा[26-06-2026]
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  • वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के अनुभव संगठन की अमूल्य धरोहर: सांसद अग्रवाल

     सांसद अग्रवाल
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  • राज्य: NEET पेपर लीक पर कांग्रेस का केंद्र सरकार पर हमला भीलवाड़ा में एक शाम छात्रों की गूंज संवाद कार्यक्रम कल....

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    राज्य   - भीलवाड़ा[26-06-2026]
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  • राज्य: शिक्षा और रोजगार संकट पर कांग्रेस की पहल, प्रतापगढ़ में 25 जून को प्रेस वार्ता

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    राज्य   - प्रतापगढ[23-06-2026]
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  • राज्य: शिक्षा और रोजगार संकट पर कांग्रेस की पहल, प्रतापगढ़ में 25 जून को प्रेस वार्ता

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  • राज्य: भीलवाड़ा में होगा तैलिक साहू समाज का राष्ट्रीय शक्ति प्रदर्शन, 20 हजार समाजबंधुओं के जुटने की तैयारी

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    राज्य   - भीलवाड़ा[23-06-2026]
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  • राज्य: वरघोड़े में गूंजे तीर्थंकरों के जयकारे, श्रद्धा एवं भक्ति के माहौल में मंदिर पर चढ़ाई वार्षिक ध्वजा

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    राज्य   - भीलवाड़ा[19-06-2026]
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  • राज्य: नगर निगम ने दाई हलीमा हॉस्पिटल ट्रस्ट की फायर एनओसी की निरस्त

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    राज्य   - भीलवाड़ा[18-06-2026]
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  • राज्य: प्रो. राजकुमार चतुर्वेदी बने संगम विश्वविद्यालय के कला एवं मानविकी संकाय के अधिष्ठाता

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  • राज्य: उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ाने हेतु संगम विश्वविद्यालय ने महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर के साथ किया ऐतिहासिक समझौता

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    राज्य   - भीलवाड़ा[17-06-2026]
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  • राज्य: भीलवाड़ा में एमडी ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़, 36 करोड़ की तैयार ड्रग्स और करोड़ों का रॉ मटेरियल जब्त

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    राज्य   - नीमच[16-06-2026]
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    भीलवाड़ा में एमडी ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़, 36 करोड़ की तैयार ड्रग्स और करोड़ों का रॉ मटेरियल जब्त
    राज्य   - नीमच[16-06-2026]
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  • राज्य: शारीरिक शिक्षक भर्ती में 5000 से अधिक पदों की मांग, अभ्यर्थियों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

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    राज्य   - भीलवाड़ा[15-06-2026]
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  • राज्य: श्री निम्बार्क पारमार्थिक सेवा ट्रस्ट की ओर से हुआ सेवा कार्य....501 जरूरतमंद महिलाओं को साड़ियों का वितरण

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    राज्य   - भीलवाड़ा[14-06-2026]
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  • राज्य: अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) एवं रीको अध्यक्ष शिखर अग्रवाल (आईएएस) ने किया संगम समूह का दौरा

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    राज्य   - भीलवाड़ा[13-06-2026]
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