|
|
सफलता की कहानी आगर-मालवा : पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन महिलाओं के जीवन को बदलने का सशक्त माध्यम बन रहा है। मिशन से जुड़कर आत्मनिर्भर बनी महिलाओं में आगर विकासखंड की ग्राम लाखाखेड़ी, पंचायत फतेहपुर मेढ़की निवासी आशा बैरागी का नाम प्रेरणादायी उदाहरण के रूप में सामने आया है। एक समय आशा बैरागी आंगनबाड़ी और स्कूलों में स्वच्छता का कार्यकर परिवार का भरण-पोषण करती थीं। आर्थिक तंगी के कारण जीवन बेहद संघर्षपूर्ण था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद स्व-सहायता समूह के माध्यम से उन्होंने 10 हजार रुपए का ऋण लेकर साड़ी की दुकान शुरू की। मेहनत और लगन के साथ परिवार को भी आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा। बच्चों को डेकोरेशन का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया। आज परिणाम यह है कि आशा का परिवार 10 लाख रुपए से अधिक के कारोबार से जुड़ा हुआ है। आशा के दोनों बच्चे शादी-विवाह एवं सामाजिक समारोहों में डेकोरेशन का कार्य करते हैं। वर-वधु की आकर्षक एंट्री के लिए विशेष डेकोरेशन भी तैयार किया जाता है। आशा स्वयं सेनेटरी नेपकिन की रिपैकेजिंग एवं बिक्री कर परिवार की आय में योगदान दे रही हैं। आशा कहती हैं, _"आजीविका मिशन से मिले सहयोग ने हमारी जिंदगी बदल दी। 10 हजार से शुरू किया कारोबार आज लाखों में पहुंच गया है। पहले दूसरों के यहां काम करना पड़ता था, आज हम स्वयं का व्यवसाय कर रहे हैं।"_ आशा बच्चों की शिक्षा को भी प्राथमिकता देती हैं। उनका मानना है कि आर्थिक मजबूती के साथ शिक्षा ही आने वाली पीढ़ी का भविष्य तय करती है। आजीविका मिशन आगर से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले 2 वर्षों में आजीविका मिशन के माध्यम से जिले की 15,269 से अधिक महिलाएं विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर लखपति दीदी बनी हैं। जिले में मिशन के तहत 4,667 स्व-सहायता समूहों से 49,140 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने, प्रशिक्षण एवं आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर उनकी आय में वृद्धि कर _लखपति दीदी_ बनाने का अभियान निरंतर जारी है। आशा बैरागी जैसी सफलता की कहानियां इस अभियान की सार्थकता को सिद्ध करती हैं और ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने की नई राह दिखाती हैं। यह जानकारी जिला पंचायत आगर के आजीविका मिशन से प्राप्त हुई है। |