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चीताखेड़ा । मध्यप्रदेश में दो दशकों से सत्ता के वनवास का सामना कर रही कांग्रेस के लिए संगठन सृजन अभियान अब सुधार के बजाय मजाक बनता नजर आ रहा है। पार्टी आलाकमान ने माना था कि बिना मजबूत संगठन के सत्ता की सीढ़ी चढ़ना असंभव है, लेकिन नीमच जिले की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जिले में इस अभियान का एक साल से भी अधिक समय हो गया है, लेकिन संगठन की नई इमारत खड़ी होने के बाद भी गुटबाजी की दीमक इसे खोखला करने में कमी नहीं हो रही है। खुद ने अपने अंधभक्तों के दम पर विधानसभा चुनाव का दावेदार मान लिया है। हैरानी की बात यह है कि संगठन के मुख्य सेनापति ही दिन दुगनी और रात चौगुनी की तर्ज पर गुटबाजी की चादर ओढ़कर कांग्रेस संगठन को रसातल में ले जाने पर पूरी तरह उतारू हैं। जिला अध्यक्ष के खिलाफ प्रारंभ से ही विरोध के सुर थमे नहीं हैं, बढ़ता ही जा रहा है। आलम यह है कि जो कार्यकर्ता पार्टी की रीढ़ होते हैं, वे लगातार साथ छोड़ रहे हैं। नेतृत्व परिवर्तन और नई व्यवस्था की बातें केवल बंद कमरों तक सीमित हैं, जबकि धरातल पर पुरानी रंजिशें और गुटों की खींचतान हावी है। हाल ही में जिला कांग्रेस स्तर पर आयोजित धरना प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं की संख्या नगण्य इसका जीता-जागता प्रमाण बनी। जनहित के मुद्दों पर हुंकार भरने के बजाय, यह आयोजन चंद इने-गिने खासमखास कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में सिमट कर रह गया। गांव की चौपालों पर यह प्रदर्शन चर्चा का विषय कम और हंसी का पात्र ज्यादा बन रहा। सवाल यह उठता है कि क्या केवल फोटो खिंचवाने और औपचारिकता पूरी करने से सत्ता की वापसी संभव है? जिला अध्यक्ष को सिर्फ अखबारों और सोशल मीडिया में फोटो छपवाने का रोग लगा हुआ है। प्रदेश स्तर पर भले ही पीढ़ी परिवर्तन और संगठन विस्तार के दावे किए जाएं, लेकिन नीमच में हालात ढाक के तीन पात वाले हैं। एक तरफ कांग्रेस का सिरमौर राहुल गांधी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष, देशहित और जनहित, सत्य की लड़ाई सड़कों पर लड़ रहे हैं। तो दूसरी तरफ जिला स्तर पर अध्यक्ष अपने तलवे चाट अंधभक्तों को लेकर संगठन की माला जप रहे हैं। साल भर बीत जाने के बाद भी एक बार भी कभी संगठन की मजबूती की बात नहीं करना नेतृत्व की विफलता को दर्शाता है। विधानसभा चुनाव में अभी करीब ढाई वर्ष का समय शेष है। ऐसे में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा कामकाज के मूल्यांकन की बात कही जा रही है। अब देखना यह है कि क्या निष्क्रियता के आधार पर नीमच जिला और जीरन ब्लॉक के बड़े चेहरों की छुट्टी होगी या फिर इसी खानापूर्ति के सहारे कांग्रेस एक और चुनावी हार की पटकथा लिखेगी। अगर कांग्रेस को वास्तव में मजबूत होना है, तो उसे संगठन सृजन के नाम पर चल रहे इस ड्रामे को बंद कर धरातल पर एकजुटता दिखानी होगी, वरना गुटबाजी की यह चादर जल्द ही कफन में बदल सकती है। |