रतलाम / सैलाना। एक ओर जल संरक्षण का संदेश और दूसरी ओर सड़क की सफाई के लिए टैंकर से पानी का इस्तेमाल! सैलाना नगर परिषद की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आए इस घटनाक्रम ने शहर में चर्चा छेड़ दी है। विजयादशमी पर रावण दहन कार्यक्रम के दौरान नागरिकों को पानी बचाने की शपथ दिलाई गई थी। इसी बीच सड़क की धुलाई में टैंकर से पानी के उपयोग का मामला सामने आने पर नगर परिषद की प्राथमिकताओं और जल संरक्षण के व्यावहारिक पालन को लेकर सवाल उठने लगे। मामले में विधायक कमलेश्वर डोडियार ने भी परिषद की जवाबदेही का मुद्दा उठाया। वहीं, नगर परिषद की सीएमओ नीतू सिंह ने सड़क की धुलाई के पीछे धार्मिक यात्रा के मार्ग पर जमा गंदगी और कीचड़ को कारण बताया है।
मंच पर जल संरक्षण का संकल्प, सड़क पर पानी का इस्तेमाल
विजयादशमी के अवसर पर आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करते हुए पानी बचाने की शपथ दिलाई गई। ऐसे आयोजनों का उद्देश्य नागरिकों को जल के महत्व के प्रति सजग करना और पानी के अनावश्यक उपयोग को रोकने के लिए प्रेरित करना है। लेकिन जब इसी दौरान सड़क की सफाई के लिए टैंकर से पानी इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आती है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जल संरक्षण के संदेश को नगर परिषद अपनी कार्यप्रणाली में किस तरह लागू कर रही है।
विधायक कमलेश्वर डोडियार ने उठाया जवाबदेही का मुद्दा
सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब लोगों को पानी बचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, तो जिम्मेदार संस्थाओं को भी अपने कामकाज में पानी के विवेकपूर्ण उपयोग का ध्यान रखना चाहिए। जल संरक्षण का संदेश तभी प्रभावी होगा, जब उसका पालन व्यवहार में भी दिखाई दे।
विधायक की आपत्ति के बाद सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग और नगर परिषद की जिम्मेदारी को लेकर चर्चा तेज हुई है। हालांकि, सड़क की धुलाई में पानी की कितनी मात्रा इस्तेमाल हुई और कम पानी में सफाई के दूसरे विकल्पों पर विचार किया गया था या नहीं, इसकी जानकारी सामने आना बाकी है।
सीएमओ नीतू सिंह का पक्ष: राम रथ यात्रा के मार्ग की सफाई जरूरी थी
वहीं, नगर परिषद की सीएमओ नीतू सिंह ने इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए बताया कि भगवान श्रीराम की यात्रा और रथ निकलने वाले मार्ग पर अत्यधिक गंदगी एवं कीचड़ जमा था। धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की सुविधा, स्वच्छता और सुरक्षित आवागमन को ध्यान में रखते हुए मार्ग की सफाई कराना आवश्यक था। इसी उद्देश्य से टैंकर के माध्यम से सड़क की धुलाई कराई गई।
नगर परिषद के इस स्पष्टीकरण के अनुसार, सड़क की धुलाई का उद्देश्य पानी का अनावश्यक उपयोग करना नहीं, बल्कि धार्मिक यात्रा के मार्ग को साफ-सुथरा बनाना था। यदि मार्ग पर वास्तव में कीचड़ और गंदगी की स्थिति थी, तो श्रद्धालुओं को परेशानी से बचाने के लिए सफाई कराना भी परिषद की जिम्मेदारी का हिस्सा है।
स्वच्छता और जल संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी
पूरे मामले में दोनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं। धार्मिक यात्रा के मार्ग की सफाई जरूरी हो सकती है, लेकिन इसके साथ पानी के विवेकपूर्ण उपयोग का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सड़क की धुलाई में कितना पानी खर्च हुआ, क्या सीमित मात्रा में पानी इस्तेमाल किया गया और क्या कम पानी वाले विकल्प उपलब्ध थे—इन सवालों पर स्पष्ट जानकारी सामने आने से स्थिति और बेहतर तरीके से समझी जा सकेगी।
बहरहाल, सैलाना में यह मामला केवल सड़क की धुलाई तक सीमित नहीं है, बल्कि जनजागरूकता के संदेश और प्रशासनिक व्यवहार के बीच तालमेल से भी जुड़ा है। नगर परिषद का स्पष्टीकरण सामने आने के बाद अब जरूरत इस बात की है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान स्वच्छता और नागरिकों की सुविधा सुनिश्चित करते हुए जल संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाए। पानी बचाने की शपथ तभी सार्थक होगी, जब उसका संदेश आम नागरिकों के साथ-साथ सरकारी संस्थाओं के कामकाज में भी दिखाई दे।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत