भोपाल शहर के हमीदिया अस्पताल की नई बिल्डिंग में संचालित सुल्तानिया अस्पताल में आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद नवजात के परिजनों से महंगे इंजेक्शन बाहर से क्रय करने के लिये कहा गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नवजात के जन्म होने के बाद उसका हार्ट काम नहीं कर रहा था, जिसके चलते नवजात को आठ दिन तक वेंटिलेटर पर रखा गया था। नवजात के इलाज के लिए डॉक्टरों/स्टॉफ ने परिजनों को उसे विशेष इंजेक्शन लगाने की सलाह दी। जिसके बाद नवजात के परिजनों द्वारा बाजार से हजारों रुपये के इंजेक्शन क्रय करवाकर नवजात को लगाए गये। जबकि आयुष्मान योजना के तहत इलाज पूरी तरह मुफ्त होना चाहिए। मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं(म.प्र.), संचालनालय, भोपाल से मामले की जांच कराकर की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन तीन सप्ताह में मांगा है।
शहर : आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद नवजात के लिये बाहर से मंगाए इंजेक्शन
भोपाल शहर के हमीदिया अस्पताल की नई बिल्डिंग में संचालित सुल्तानिया अस्पताल में आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद नवजात के परिजनों से महंगे इंजेक्शन बाहर से क्रय करने के लिये कहा गया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार नवजात के जन्म होने के बाद उसका हार्ट काम नहीं कर रहा था, जिसके चलते नवजात को आठ दिन तक वेंटिलेटर पर रखा गया था। नवजात के इलाज के लिए डॉक्टरों/स्टॉफ ने परिजनों को उसे विशेष इंजेक्शन लगाने की सलाह दी। जिसके बाद नवजात के परिजनों द्वारा बाजार से हजारों रुपये के इंजेक्शन क्रय करवाकर नवजात को लगाए गये। जबकि आयुष्मान योजना के तहत इलाज पूरी तरह मुफ्त होना चाहिए। मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं(म.प्र.), संचालनालय, भोपाल से मामले की जांच कराकर की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन तीन सप्ताह में मांगा है।