रतलाम
रतलाम में पटवारी आत्महत्या मामला अब बेहद गंभीर मोड़ ले चुका है, जहां प्रशासनिक कार्रवाई, राजनीतिक दबाव और कर्मचारी संगठनों के विरोध ने पूरे घटनाक्रम को गरमा दिया है। आलोट क्षेत्र में पदस्थ पटवारी रविशंकर खराड़ी (हल्का खजुरी देवड़ा) द्वारा 21 अप्रैल 2026 को आत्महत्या किए जाने के बाद से लगातार नए खुलासे और कार्रवाई सामने आ रही हैं।
प्रशासन ने प्रारंभिक जांच के आधार पर बड़ा कदम उठाते हुए तत्कालीन नायब तहसीलदार सविता राठौर को पहले रतलाम अटैच किया और अब कलेक्टर मिशा सिंह के आदेश पर उन्हें निलंबित कर दिया गया है। जारी आदेश (क्रमांक 198/स्थापना/2026) के अनुसार, मृतक पटवारी द्वारा छोड़े गए नोट और संबंधित प्रकरणों की जांच में प्रथम दृष्टया मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की प्रक्रियाओं का पालन नहीं पाया गया। साथ ही कोर्ट प्रक्रिया में भी गंभीर खामियां सामने आई हैं।
जांच में यह भी उल्लेख हुआ कि प्रकरण क्रमांक 16/अ-3/2025-26 एवं उससे जुड़े चार नामांतरण मामलों (1163/अ-6/2025-26, 1409/अ-6/2025-26, 1888/अ-6/2025-26, 1416/अ-6/2025-26) में अनियमितताएं पाई गईं। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि सविता राठौर का कृत्य मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 के तहत कदाचार की श्रेणी में आता है, जिसके चलते उन्हें एमपी सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय एसडीएम कार्यालय रतलाम शहर रहेगा।
इधर, सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने इस मामले में पुलिस अधीक्षक अमित कुमार को पत्र लिखकर धारा 108 (आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण) के तहत एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मृतक पटवारी पर मानसिक प्रताड़ना, रिकॉर्ड में बदलाव और अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा था।
मृतक के परिजनों ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं और न्याय की मांग को लेकर डटे हुए हैं। इस पूरे मामले में पटवारी संघ भी खुलकर सामने आ गया है। जिला अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण पाटीदार, जिला सचिव दीपक राठौड़, सहसरक्षक ध्रुवलाल निनामा सहित जिलेभर के पटवारियों ने कार्रवाई का समर्थन करते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
इसके अलावा, जनपद उपाध्यक्ष केशु निनामा, करणी सेना प्रदेश अध्यक्ष जीवन सिंह शेरपुर और जनपद प्रतिनिधि चंदू मईड़ा भी परिजनों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। बावजूद इसके, परिजन और पटवारी संघ अब भी एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर अड़े हुए हैं।
यह मामला अब केवल आत्महत्या तक सीमित नहीं रहकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। पूरे जिले की नजर अब आगे की कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर टिकी हुई है।
रिपोर्टर - जितेन्द्र कुमावत