रतलाम/ सैलाना
सैलाना नगर की राजनीति में उस समय बड़ा भूचाल आ गया जब जिला कांग्रेस कमेटी रतलाम के जिलाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक हर्षविजय गेहलोत ने सख्त कार्रवाई करते हुए पूर्व पार्षद जितेंद्र सिंह राठौर और वर्तमान पार्षद सलोनी प्रशांत मांडोत को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से 6 वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया। यह कार्रवाई पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोपों के तहत की गई है, जिससे स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
जिलाध्यक्ष द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि दोनों नेताओं ने लगातार संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन किया, वरिष्ठ नेतृत्व के निर्देशों की अवहेलना की और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया। इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
हालांकि, इस कार्रवाई के बाद दोनों निष्कासित नेताओं ने भी खुलकर मोर्चा खोल दिया है और कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
पूर्व पार्षद जितेंद्र सिंह राठौर ने कहा कि वर्तमान राजनीति में चाटुकारिता हावी हो गई है और ईमानदारी से जनहित की आवाज उठाने वालों को साजिश के तहत बाहर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सैलाना नगर परिषद द्वारा जनता पर नियम विरुद्ध भारी टैक्स थोपे गए, जिसका उन्होंने विरोध किया। यही विरोध उनके निष्कासन का कारण बना।
राठौर ने तीखे शब्दों में कहा, हम वर्षों से जनता की सेवा करते आए हैं। आज हमें इसलिए निकाला गया क्योंकि हमने गलत के खिलाफ आवाज उठाई। पद रहे या न रहे, जनता की लड़ाई लड़ते रहेंगे। पार्टी की इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे निष्कासन से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा की :
हम हार पहनकर सत्यनारायण भगवान की कथा कराने वाले चालबाज़ लोगों की साजिशों का शिकार हुए हैं, लेकिन हमारा संकल्प अडिग है। पद रहे न रहे, हम जनता की लड़ाई लड़ते रहेंगे और वर्तमान में गौ-सेवा और जन-सेवा ही हमारा मुख्य लक्ष्य है।
वहीं पार्षद सलोनी प्रशांत मांडोत ने भी नगर परिषद अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके वार्ड क्रमांक 2 के साथ लगातार भेदभाव किया गया और विकास कार्यों में जानबूझकर बाधा डाली गई। पिछले 3-4 वर्षों से उनके वार्ड के विकास कार्यों को जानबूझकर अनदेखी के बाद उन्होंने अब न्यायालय का सहारा लिया है और अध्यक्ष के खिलाफ केस दर्ज कराया है।
मांडोत ने स्पष्ट कहा, मैं अपने वार्ड की जनता के अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हूं। अगर इसके लिए पार्टी से बाहर होना पड़े तो भी मुझे मंजूर है, लेकिन जनता के साथ अन्याय नहीं होने दूंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्ड के विकास कार्यों को जानबूझकर रोका गया और बार-बार हस्तक्षेप कर कार्य बाधित किए गए।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सैलाना की राजनीति गरमा गई है। एक ओर कांग्रेस संगठन इसे अनुशासन बनाए रखने की कार्रवाई बता रहा है, वहीं दूसरी ओर निष्कासित नेता इसे जनहित की आवाज दबाने की साजिश करार दे रहे हैं। आगामी चुनावों से पहले यह विवाद नए राजनीतिक समीकरण खड़े कर सकता है और इसका असर स्थानीय राजनीति पर दूरगामी होने की संभावना है।
रिपोर्टर जितेंद्र कुमावत