रतलाम/उज्जैन। मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ के प्रांतीय आह्वान पर 29 सितंबर 2026 को उज्जैन संभागीय मुख्यालय पर कर्मचारियों ने अपनी 23 सूत्रीय मांगों को लेकर धरना दिया और मुख्यमंत्री के नाम संभागीय आयुक्त को ज्ञापन सौंपा। इस कार्यक्रम में रतलाम जिला कार्यकारिणी ने भी उज्जैन पहुंचकर सहभागिता की।
संघ ने प्रदेश के अधिकारियों कर्मचारियों एवं पेंशनरों की लंबित समस्याओं के निराकरण और पूर्व में की गई घोषणाओं को लागू करने की मांग की। ज्ञापन में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया।
कर्मचारियों की 23 सूत्रीय प्रमुख मांगें
1. पुरानी पेंशन योजना बहाल करना: प्रदेश में वरिष्ठता के साथ पुरानी पेंशन योजना पुनः लागू की जाए। ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा केंद्र के समान 25 लाख रुपये की जाए।
2. सेवा अवधि की गणना: शिक्षा विभाग एवं आदिम जाति कल्याण विभाग के नवीन शैक्षणिक संवर्ग की सेवा अवधि की गणना प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए।
3. महंगाई भत्ता: प्रदेश के अधिकारियों कर्मचारियों एवं पेंशनरों को केंद्र सरकार के समान तिथि से महंगाई भत्ता दिया जाए।
4. लिपिक संवर्ग को लाभ: लिपिक संवर्ग को मंत्रालय के समान समयमान वेतनमान का लाभ प्रदान किया जाए।
5. दो संतान संबंधी बाध्यता समाप्त करना: सेवा नियमों में दो से अधिक संतान संबंधी प्रतिबंधात्मक आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए।
6. नियमितीकरण एवं आउटसोर्स कर्मचारियों का मुद्दा: दैनिक वेतनभोगी संविदा एवं स्थाई कर्मचारियों को रिक्त पदों के विरुद्ध नियमित किया जाए। नियमितीकरण के बाद ही शेष पदों पर सीधी भर्ती हो। विभागाध्यक्षों को नियमितीकरण के अधिकार दिए जाएं। तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के आउटसोर्स कर्मचारियों को शासकीय सेवक का दर्जा दिया जाए। कार्यभारित कर्मचारियों को अवकाश नकदीकरण का लाभ भी मिले।
7. स्थाई कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का लाभ: स्थाई कर्मचारियों को सातवें वेतनमान का पूर्ण लाभ दिया जाए।
8. पंचायत सचिवों का संविलियन: समस्त पंचायत सचिवों का विधिवत संविलियन पंचायत विभाग में किया जाए।
9. स्टाइपेंड व्यवस्था समाप्त करना: नवीन नियुक्तियों में 70%-80%-90% स्टाइपेंड व्यवस्था समाप्त कर पूर्ववर्ती दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि के नियम बहाल किए जाएं।
10. कृषि विस्तार अधिकारियों की वेतन विसंगति: कृषि विस्तार अधिकारियों की लंबित वेतन विसंगति का निराकरण उच्च न्यायालय के निर्देशानुसार किया जाए।
11. शिक्षकों की पदोन्नति: सहायक शिक्षक उच्च श्रेणी शिक्षक तथा प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षकों को योग्यता और विषयवार वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति दी जाए। पदोन्नति में D.El.Ed./B.Ed. की अनिवार्यता के स्थान पर पदोन्नति के बाद विभागीय प्रशिक्षण का प्रावधान किया जाए।
12. स्वास्थ्य विभाग की वेतन विसंगतियां दूर करना: स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों का निराकरण किया जाए। कुष्ठ कर्मचारियों को नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता एवं महंगाई भत्ता दिया जाए। नेत्र चिकित्सा सहायकों का पदनाम बदलकर नेत्र चिकित्सा अधिकारी किया जाए।
13. स्वास्थ्य कार्यकर्ता संवर्ग में पदोन्नति: बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता के पदोन्नति पद स्वास्थ्य सुपरवाइजर को डाइंग कैडर से बाहर कर पदोन्नति बहाल की जाए। ANM को छत्तीसगढ़ की तर्ज पर बिना अतिरिक्त प्रशिक्षण के पदोन्नति दी जाए।
14. आयुष विभाग के कर्मचारियों को लाभ: वर्ष 2002-03 में संविदा पर नियुक्त कर्मचारियों को प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता दी जाए। विभाग के सभी संवर्गों को प्रथम एवं द्वितीय समयमान वेतनमान का लाभ मिले।
15. महिला एवं बाल विकास विभाग: विभाग की संविदा पर्यवेक्षकों का नियमितीकरण किया जाए। पर्यवेक्षकों की वेतन विसंगति समाप्त की जाए।
16. फार्मासिस्ट सेवा नियम लागू करना: फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा जारी फार्मासिस्ट भर्ती पदोन्नति एवं सेवा विनियम 2025 को मध्यप्रदेश में यथावत लागू किया जाए।
17. वन विभाग में पदोन्नति: मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 के नियम 6(2) एवं 6(4) के तहत चयन वर्ष 2026 की प्रक्रिया में वनक्षेत्रपाल से सहायक वनसंरक्षक पद के लिए वर्ष 2026 एवं 2027 की संभावित रिक्तियों तथा प्रतिनियुक्ति पदों को शामिल किया जाए।
18. पटवारियों की पदोन्नति एवं वेतन विसंगति: पटवारियों को अन्य शासकीय कर्मचारियों की तरह वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति दी जाए। पद रिक्त नहीं होने पर उच्च पद का वेतनमान दिया जाए। प्रथम समयमान वेतनमान को वर्ष 2016 से 2800 ग्रेड पे पर निर्धारित किया जाए। रजिस्ट्री संबंधी कार्य के लिए मोबाइल प्रिंटर स्कैनर ई-साइन सुविधायुक्त कार्यालय और कम से कम 10 हजार रुपये अतिरिक्त मानदेय दिया जाए।
19. स्वतंत्र वेतन आयोग का गठन: विभिन्न विभागों के संवर्गों की वेतन विसंगतियों के स्थायी निराकरण के लिए राज्य स्तर पर स्वतंत्र वेतन आयोग गठित किया जाए।
20. चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति: सामान्य प्रशासन विभाग के 31 अगस्त 2010 के परिपत्र के प्रावधानों के अनुसार प्रदेश के सभी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति के अवसर प्रदान किए जाएं।
21. पारिवारिक पेंशन की पात्रता: पारिवारिक पेंशन के लिए पूर्ण सेवा अर्हता 33 वर्ष से घटाकर 25 वर्ष की जाए।
22. अनुकंपा नियुक्ति नियमों का सरलीकरण: अनुकंपा नियुक्ति के नियम सरल किए जाएं। तीन वर्ष में CPCT परीक्षा उत्तीर्ण करने की बाध्यता के कारण सेवा समाप्ति के आदेश निरस्त किए जाएं। पूर्व नियमानुसार परीक्षा के बाद वेतनवृद्धि दी जाए। शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्रता परीक्षा एवं प्रशिक्षण की अनिवार्यता समाप्त की जाए।
23. परामर्शदात्री समिति की बैठक: मुख्य सचिव स्तरीय स्थायी परामर्शदात्री समिति की बैठक तत्काल आयोजित की जाए।
शासन से शीघ्र निर्णय की मांग
मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ ने शासन से आग्रह किया कि कर्मचारियों की सभी 23 सूत्रीय मांगों पर समय-सीमा निर्धारित कर सकारात्मक निर्णय लिया जाए और शीघ्र आदेश जारी किए जाएं ताकि प्रदेश के कर्मचारियों में व्याप्त असंतोष का निराकरण हो सके।
रतलाम जिला कार्यकारिणी की सहभागिता के साथ उज्जैन में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से संघ ने शासन से पुरानी पेंशन योजना बहाल करने केंद्र के समान महंगाई भत्ता देने ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये करने कर्मचारी आयोग एवं स्वतंत्र वेतन आयोग का गठन करने तथा कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों का निराकरण करने की मांग की।
ज्ञापन में संविदा दैनिक वेतनभोगी एवं स्थाई कर्मचारियों के नियमितीकरण आउटसोर्स कर्मचारियों को शासकीय सेवक का दर्जा देने पंचायत सचिवों के संविलियन और शिक्षकों की पदोन्नति से जुड़े मुद्दे भी शामिल रहे।
इसके अलावा स्वास्थ्य शिक्षा वन आयुष और महिला एवं बाल विकास विभाग के कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान की मांग की गई।
पटवारियों के पदोन्नति नियमों में संशोधन समयमान वेतनमान की विसंगति दूर करने तथा अतिरिक्त कार्यों के लिए संसाधन और मानदेय देने की मांग भी उठाई गई।
संघ ने मुख्यमंत्री की पूर्व घोषणाओं के क्रियान्वयन कर्मचारियों एवं पेंशनरों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने तथा अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को सरल बनाने की मांग करते हुए शासन से सभी लंबित मांगों पर समय-सीमा तय कर आदेश जारी करने का आग्रह किया।
कार्यक्रम के माध्यम से कर्मचारियों ने अपनी लंबित समस्याओं के समाधान के लिए शासन का ध्यान आकर्षित किया।
रिपोर्टर जीतेन्द्र कुमावत