रतलाम /धामनोद। नगर परिषद धामनोद के उपाध्यक्ष एवं निर्वाचित पार्षद लोकेन्द्रसिंह सिसोदिया की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कलेक्टर अजय कटेसरिया द्वारा 28 सितंबर 2026 को पद के दुरुपयोग और नगर परिषद के टेंडर में संलिप्तता संबंधी मामले में उन्हें निर्वाचित पार्षद पद से पृथक किए जाने के आदेश के बाद अब शासकीय भूमि पर अतिक्रमण के मामले में भी बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। नायब तहसीलदार टप्पा नामली ने लोकेन्द्रसिंह पर एक लाख रुपए का अर्थदंड लगाते हुए शासकीय भूमि से बेदखल करने का आदेश पारित किया है।
महेन्द्र उर्फ मोनू शर्मा ने की थी शिकायत
मामला प्रकरण क्रमांक 0008/अ-68/2025-26 से जुड़ा है। तहसीलदार तहसील ग्रामीण के जावक क्रमांक 1806 दिनांक 21 नवंबर 2025 के माध्यम से महेन्द्र उर्फ मोनू शर्मा निवासी सैलाना जिला रतलाम की शिकायत नायब तहसीलदार न्यायालय टप्पा नामली को भेजी गई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ग्राम धामनोद की सर्वे क्रमांक 1420, रकबा 0.2400 हेक्टेयर भूमि राजस्व रिकॉर्ड में श्री राधाकृष्ण मंदिर के नाम दर्ज है और इसके व्यवस्थापक कलेक्टर जिला रतलाम हैं। शिकायत के अनुसार इस भूमि पर लोकेन्द्रसिंह सिसोदिया द्वारा कृष्णा गार्डन संचालित कर शादी समारोह एवं सामाजिक कार्यक्रमों से राशि अर्जित की जा रही थी।
पटवारी रिपोर्ट में भी अतिक्रमण का उल्लेख
शिकायत के बाद मौजा पटवारी ग्राम धामनोद से रिपोर्ट प्राप्त की गई। रिपोर्ट में सर्वे नंबर 1420 की 0.2400 हेक्टेयर भूमि को शासकीय बताते हुए यह उल्लेख किया गया कि मौके पर लोकेन्द्रसिंह पिता चतरसिंह द्वारा गार्डन और गोदाम बनाकर सामाजिक एवं सामुदायिक कार्यक्रम तथा टेंट हाउस व्यवसाय संचालित किया जा रहा है।
वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में भूमि “श्री राधाकृष्ण वाके देह व्यवस्थापक कलेक्टर महोदय जिला रतलाम, मध्यप्रदेश शासन” के नाम दर्ज होना बताया गया है।
लोकेन्द्रसिंह ने बताया था निजी मंदिर की भूमि
प्रकरण की सुनवाई में लोकेन्द्रसिंह की ओर से शिकायत को असत्य एवं निराधार बताते हुए जवाब प्रस्तुत किया गया। उनके पक्ष में कहा गया कि भूमि निजी मंदिर की है तथा पूर्व के राजस्व आदेशों के आधार पर उनके पूर्वजों एवं बाद में उनका नाम व्यवस्थापक के रूप में दर्ज रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि भूमि पर कोई गार्डन संचालित नहीं किया जा रहा और सामाजिक एवं धार्मिक कार्यक्रम निशुल्क आयोजित किए जाते हैं।
लेकिन नायब तहसीलदार ने वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड एवं पटवारी रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद उनका पक्ष स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि वर्तमान में भूमि शासकीय मद में दर्ज है और लोकेन्द्रसिंह की ओर से ऐसा कोई प्रभावी सिविल न्यायालयीन आदेश प्रस्तुत नहीं किया गया जिससे उक्त भूमि पर उनका वैधानिक कब्जा प्रमाणित हो।
एक लाख रुपए अर्थदंड, 7 दिन का अल्टीमेटम
नायब तहसीलदार द्वारा 21 जुलाई 2026 को पारित आदेश में मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के तहत एक लाख रुपए अर्थदंड लगाया गया। साथ ही लोकेन्द्रसिंह को 7 दिवस में स्वयं अतिक्रमण हटाकर कब्जा खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित अवधि में कब्जा नहीं हटाया गया तो प्रशासन द्वारा बलपूर्वक अतिक्रमण हटाया जाएगा और कार्रवाई में आने वाला खर्च भी भू-भाटक की तरह वसूल किया जाएगा।
राजस्व और पुलिस टीम को कार्रवाई के निर्देश
नायब तहसीलदार ने राजस्व निरीक्षक को दल गठित कर आवश्यक पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने तथा पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। थाना प्रभारी सैलाना एवं चौकी प्रभारी धामनोद को भी कार्रवाई के दौरान आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
अब एक ओर कलेक्टर के आदेश से लोकेन्द्रसिंह सिसोदिया नगर परिषद के निर्वाचित पार्षद पद से पृथक हो चुके हैं, वहीं दूसरी ओर शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने का यह आदेश सामने आया है। ऐसे में धामनोद की राजनीति और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत