रतलाम। करीब छह वर्ष पहले छोटी दीपावली की रात रतलाम के राजीव नगर में हुए बहुचर्चित तिहरे हत्याकांड में आखिरकार न्यायालय का फैसला आ गया। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश राजेश नामदेव ने मामले के तीन जीवित आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को तीन-तीन आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। लूट की नीयत से पति-पत्नी और उनकी पुत्री की निर्मम हत्या करने वाले इस गिरोह का मुख्य सरगना दिलीप देवल पुलिस मुठभेड़ में पहले ही मारा जा चुका है।
अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता समरथ पाटीदार ने बताया कि 25 नवंबर 2020 को छोटी दीपावली की रात राजीव नगर निवासी गोविंद सोलंकी, उनकी पत्नी शारदा सोलंकी और पुत्री दिव्या सोलंकी की सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोपियों ने वारदात को अंजाम देने के लिए छोटी दीपावली का दिन इसलिए चुना था, ताकि पटाखों की आवाज में गोलियों की गूंज दब जाए और किसी को संदेह न हो। हत्या का उद्देश्य घर में रखी नकदी और सोने-चांदी के आभूषणों की लूट था।
घटना का खुलासा अगले दिन तब हुआ, जब मकान के निचले हिस्से में रहने वाली किरायेदार नर्स की एक्टिवा स्कूटी गायब मिली। पूछताछ के लिए ऊपर पहुंचने पर उसने कमरे में तीनों के खून से लथपथ शव देखे। इसके बाद ज्वेलिका की रिपोर्ट पर पुलिस ने हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
न्यायालय ने अनुराग उर्फ बॉबी (33) निवासी विनोबा नगर रतलाम, गोलू उर्फ गौरव (29) निवासी रेलवे कॉलोनी रतलाम और लाला भाबोर (27) निवासी दाहोद, गुजरात को दोषी मानते हुए तीन-तीन आजीवन कारावास की सजा सुनाई। तीनों आरोपी 2 दिसंबर 2020 से जेल में बंद हैं।
जांच के दौरान तत्कालीन पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी के नेतृत्व में पुलिस टीम मुख्य आरोपी दिलीप देवल को पकड़ने दाहोद पहुंची थी। इस दौरान दिलीप ने पुलिस दल पर देसी पिस्टल से फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया।
मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य निर्णायक साबित हुए। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में 111 भौतिक वस्तुएं, 210 दस्तावेज और 33 गवाहों के बयान प्रस्तुत किए। आरोपियों के कपड़ों, चप्पलों और रुमाल पर मृतकों का डीएनए मिला, जबकि लूटी गई स्कूटी के हैंडल पर आरोपी लाला भाबोर का डीएनए पाया गया। फॉरेंसिक जांच में यह भी सिद्ध हुआ कि घटनास्थल से मिले कारतूस के खोखे उसी देसी पिस्टल से दागे गए थे, जो मुठभेड़ के बाद दिलीप देवल के कब्जे और उसके घर से बरामद हुई थी। वारदात से पहले और बाद में आरोपी सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हुए थे, जिससे उनकी पहचान और भूमिका प्रमाणित हुई।
जांच में यह तथ्य भी सामने आया था कि दाहोद निवासी दिलीप देवल हत्या के एक अन्य मामले में जमानत पर छूटने के बाद फर्जी दस्तावेजों के सहारे रतलाम में रह रहा था। उसने अपने साथियों के साथ मिलकर 18 मई 2020 को कस्तूरबा नगर में प्रेमकुवर सिसोदिया की भी लूट के इरादे से हत्या की थी।
करीब छह वर्ष तक चले इस बहुचर्चित मामले में आए फैसले को न्याय व्यवस्था और वैज्ञानिक जांच की बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिसने एक सनसनीखेज तिहरे हत्याकांड का कानूनी पटाक्षेप कर दिया।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत