रतलाम। राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की दिशा में कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया ने शनिवार को अधिवक्ताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में राजस्व न्यायालयों से जुड़ी व्यवहारिक परेशानियों, लंबित प्रक्रियाओं, प्रकरणों के निराकरण में होने वाले विलंब तथा न्यायालयीन व्यवस्था में सुधार को लेकर खुलकर चर्चा हुई। कलेक्टर ने अधिवक्ताओं द्वारा रखे गए प्रत्येक बिंदु को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
बैठक में अधिवक्ताओं ने प्रकरण दर्ज होने में देरी, नियमित कॉज लिस्ट जारी नहीं होने, पीठासीन अधिकारियों के बैठने का समय निर्धारित नहीं होने, सुनवाई के दौरान फाइल तैयार नहीं रखने तथा आदेश जारी करने में अनावश्यक विलंब जैसी समस्याएं प्रमुखता से उठाईं। अधिवक्ताओं ने बताया कि कुछ मामलों में प्रकरण दर्ज होने में ही एक माह तक लग जाता है, जबकि कार्रवाई पूरी होने के बाद भी आदेश जारी होने में दो-तीन माह तक का समय लगने से पक्षकारों को परेशानी होती है।
कॉज लिस्ट को लेकर भी उठी अहम बात
अधिवक्ताओं ने न्यायालयों में नियमित रूप से वाद सूची यानी कॉज लिस्ट जारी करने की आवश्यकता बताई। उनका कहना था कि लंबे समय तक कॉज लिस्ट जारी नहीं होने से प्रकरण की वास्तविक स्थिति जानना कठिन हो जाता है। हालांकि वर्तमान में लगभग एक सप्ताह से नियमित रूप से कॉज लिस्ट जारी होना प्रारंभ हुआ है, जिसे सकारात्मक कदम बताया गया।
जावरा की चार टप्पा तहसीलों में एक साथ न्यायालय लगने से परेशानी
बैठक में जावरा क्षेत्र की चार टप्पा तहसीलों में न्यायालयों के समय निर्धारण का मुद्दा भी सामने आया। अधिवक्ताओं ने बताया कि कई बार एक ही समय पर अलग-अलग न्यायालय लगने के कारण उन्हें एक साथ विभिन्न न्यायालयों में उपस्थित होना पड़ता है। इससे अधिवक्ताओं के साथ-साथ पक्षकारों को भी व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा रीडर द्वारा पेशी के समय फाइल पूर्व से तैयार नहीं रखने, वेब जीआईएस पोर्टल पर प्रकरण अपलोड नहीं होने तथा नकल प्राप्त करने में होने वाली देरी का मुद्दा भी उठाया गया। अधिवक्ताओं ने बताया कि कई मामलों में नकल मिलने में विलंब के कारण अपील की निर्धारित अवधि भी प्रभावित होने की स्थिति बनती है।
न्याय दृष्टांतों और आदेशों को लेकर भी सुझाव
अधिवक्ताओं ने कहा कि कई राजस्व न्यायालयों के आदेशों में सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं द्वारा प्रस्तुत उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण न्याय दृष्टांतों का उल्लेख नहीं किया जाता। उन्होंने आदेशों में प्रस्तुत न्यायिक दृष्टांतों पर उचित विचार एवं उल्लेख किए जाने की मांग रखी।
अपर कलेक्टर स्तर पर प्रकरणों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सुझाव दिए गए। अधिवक्ताओं ने कहा कि निगरानी सीमित शक्ति है, इसलिए इसका उपयोग विशेष और आवश्यक मामलों में ही किया जाना चाहिए। निजी भूमि पर बेजा कब्जे से जुड़े कुछ पुराने मामलों में अनावश्यक निगरानी के कारण विलंब की स्थिति बनने का उदाहरण भी सामने रखा गया।
लोक सेवा गारंटी और खसरा सुधार के मामले भी उठे
लोक सेवा गारंटी से जुड़े मामलों में भी अधिवक्ताओं ने व्यावहारिक कठिनाइयों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुछ राजस्व प्रकरण नकारात्मक रूप से निष्पादित किए जाते हैं और कई बार लोक सेवा केंद्रों पर पोर्टल काम नहीं करने का हवाला देकर अपील दर्ज करने से मना कर दिया जाता है।
वहीं निजी भूमि के खसरा सुधार से संबंधित मामलों में मूल फाइल सीधे पटवारी के पास भेजे जाने की प्रक्रिया पर भी अधिवक्ताओं ने सवाल उठाते हुए व्यवस्था में सुधार के सुझाव दिए।
कलेक्टर बोले—व्यवस्था सुधारना प्रशासन की प्राथमिकता
कलेक्टर श्री अजय कटेसरिया ने कहा कि राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को पारदर्शी, समयबद्ध और व्यवस्थित बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिवक्ताओं द्वारा बताए गए सभी व्यवहारिक मुद्दों पर संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।
कलेक्टर ने कहा कि अधिवक्ताओं का न्यायालयीन एवं मैदानी अनुभव प्रशासन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उनके सुझावों से राजस्व न्यायालयों की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है तथा आम नागरिकों को समय पर न्याय और राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
बैठक को राजस्व न्यायालयों की लंबित प्रक्रियाओं में तेजी लाने और पक्षकारों को अनावश्यक चक्कर एवं देरी से राहत दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत