रतलाम / जावरा। हुसैन टेकरी स्थित बड़े रोजे के पास से 4 अगस्त को लापता हुए तीन नाबालिग बालक-बालिकाओं को खोजने में औद्योगिक क्षेत्र जावरा पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस की टीम ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी विश्लेषण और सोशल मीडिया पर फोटोयुक्त पोस्टर-पेम्पलेट के व्यापक प्रचार-प्रसार के जरिए लगातार सुराग जुटाए और आखिरकार तीनों बच्चों को मुंबई के माटुंगा स्थित डेविड ससून चिल्ड्रन्स होम/बाल कल्याण समिति की अभिरक्षा से सकुशल दस्तयाब कर जावरा लाया।
पुलिस थाना औद्योगिक क्षेत्र जावरा में अपराध क्रमांक 431/2026, धारा 137(2) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज कर बच्चों की तलाश शुरू की गई थी। लापता बच्चों में 14 वर्षीय बालिका, 12 वर्षीय बालक और 3 वर्षीय बालिका शामिल थे। बच्चों की तलाश पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन टीम ने संभावित मार्गों की कड़ियां जोड़ते हुए जांच को लगातार आगे बढ़ाया।
विवेचना के दौरान पुलिस टीम ने जावरा सहित आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इसके साथ ही जावरा, ढोढर, नामली, रतलाम, इंदौर, दलौदा, मंदसौर, नीमच, शंभूपुरा और चित्तौड़गढ़ सहित राजस्थान क्षेत्र के विभिन्न रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से अवलोकन किया गया। फुटेज से पता चला कि तीनों बच्चे जावरा से पैदल ढोढर पहुंचे और वहां से नामली, नीमच, शंभूपुरा तथा चित्तौड़गढ़ होते हुए अजमेर की ओर जाने वाली ट्रेन में सवार हुए थे।
पुलिस ने बच्चों के संभावित ठिकानों और आवागमन के रास्तों पर लगातार निगरानी बनाए रखी। दूसरी ओर बच्चों के फोटोयुक्त पोस्टर एवं पेम्पलेट तैयार कर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से व्यापक स्तर पर प्रसारित किए गए। पुलिस की इसी सतत मेहनत और प्रचार-प्रसार के परिणामस्वरूप 20 अगस्त 2026 को सूचना मिली कि तीनों बच्चे मुंबई के माटुंगा रोड स्थित डेविड ससून चिल्ड्रन्स होम/बाल कल्याण समिति की सुरक्षित अभिरक्षा में हैं।
सूचना मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में पुलिस टीम को फरियादिया के साथ मुंबई भेजा गया। टीम ने आवश्यक वैधानिक एवं दस्तावेजी कार्रवाई पूर्ण करने के बाद तीनों बच्चों को माटुंगा, मुंबई से सकुशल दस्तयाब किया और सुरक्षित अभिरक्षा में जावरा लेकर आई। बच्चों के लापता होने के कारणों और पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस द्वारा तीनों से पृथक-पृथक पूछताछ की जा रही है तथा मामले में अग्रिम विवेचना जारी है।
तीनों नाबालिगों की सकुशल दस्तयाबी में डीएसपी प्रकाश, उप निरीक्षक कन्हैया अवास्या, सहायक उप निरीक्षक नरेश पाण्डे, प्रधान आरक्षक विदेश, प्रधान आरक्षक बद्रीलाल, आरक्षक कमलेश, आरक्षक गोविंद, आरक्षक मनोज एवं महिला आरक्षक रिंकू की महत्वपूर्ण एवं सराहनीय भूमिका रही।
पुलिस टीम की तकनीकी सूझबूझ, सीसीटीवी फुटेज के लगातार विश्लेषण, संभावित मार्गों की कड़ियां जोड़ने और व्यापक प्रचार-प्रसार के चलते आखिरकार तीनों बच्चों को हजारों किलोमीटर दूर मुंबई से सुरक्षित वापस लाने में सफलता मिली।
रिपोर्टर जितेन्द्र कुमावत