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  • धर्म : विश्व प्रसिद्ध 51 शक्तिपीठों में शामिल है कानड़ का माँ हिंगलाज देवी मठ, तंत्र साधना और जनआस्था का अद्वितीय संगम

    JAGDISH CHANDRA MALVIYA   - आगर मालवा
    धर्म
    धर्म   - आगर मालवा[17-10-2026]
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  • शारदीय नवरात्रि पर विशेष 



     आगर-मालवा जिले के विकासखण्ड कानड़ मुख्यालय के नलखेड़ा रोड पर स्थित माँ हिंगलाज देवी मठ जिले की धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण केन्द्र है। नगर के मध्य में स्थित यह मठ लोगों की अटूट आस्था का प्रतीक है और इसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

    इतिहास एवं पौराणिक प्रसंग

    पौराणिक मान्यता के अनुसार जब भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर ब्रह्माण्ड में भ्रमण कर रहे थे, तब भगवान विष्णु द्वारा सुदर्शन चक्र से माता के शरीर के 51 भाग पृथ्वी पर गिरे थे। जहाँ-जहाँ यह भाग गिरे, वहाँ शक्तिपीठों की स्थापना हुई। मान्यता है कि इस क्रम में माता का ब्रह्मरंध्र पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हिंगोल नदी के समीप गिरा था, जहाँ विश्व प्रसिद्ध प्रथम हिंगलाज माता शक्तिपीठ स्थित है। उसी आद्य शक्तिपीठ की परम्परा से जुड़ा द्वितीय मठ मध्यप्रदेश के *आगर-मालवा जिले के कानड़ नगर में स्थित है।* यही तथ्य इस मठ की प्राचीनता एवं विश्व प्रसिद्धि का प्रमाण है।

    पुरातात्विक महत्व एवं किंवदंती 

    कानड़ का हिंगलाज देवी मठ पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत प्राचीन माना जाता है। मठ के गर्भगृह में विराजित माँ हिंगलाज देवी की प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार मठ का निर्माण सैकड़ों वर्ष पूर्व हुआ था। मठ परिसर में स्थित कई प्राचीन समाधियाँ यहाँ दीर्घकाल से चली आ रही साधु-संत परम्परा एवं तपस्या की साक्षी हैं। मठ की संरचना भले ही वर्तमान में चद्दर की छत्रछाया में है। तथापि इसकी नींव एवं पूजा परम्परा मालवा की प्राचीन मठ संस्कृति से जुड़ी हुई है।

     किंवदंती है कि इस स्थान पर सिद्ध साधकों द्वारा तंत्र साधना की जाती थी और माता ने स्वयं प्रकट होकर इस स्थान को सिद्धपीठ के रूप में प्रतिष्ठित किया है ऐसी जनश्रुति और मान्यता है।

    जन आस्था एवं मान्यता 

    माँ हिंगलाज देवी मठ के प्रति जन-आस्था अत्यंत गहरी है। इसे नगर की रक्षिका एवं मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूर्ण होती है। जिस प्रकार माँ पीतांबरा पीठ नलखेड़ा की माँ बगलामुखी का प्रथम मंदिर नेपाल, द्वितीय दतिया और तृतीय नलखेड़ा में स्थित होने की मान्यता है, उसी प्रकार हिंगलाज माता के दो प्रमुख मठों में एक बलूचिस्तान और दूसरा कानड़ में होना इसे विशिष्ट बनाता है। नगर में किसी भी शुभ कार्य से पूर्व माता के दर्शन की परम्परा है।

    पूजा परम्परा एवं विशेष अनुष्ठान 

    मठ में तंत्र साधना एवं गायत्री पाठ का विशेष महत्व है। नवरात्रि पर्व पर यहाँ विशेष पूजा परम्परा का निर्वहन किया जाता है। मठ के पुजारी प. श्री आशीष चतुर्वेदी के अनुसार वर्षों पुरानी परम्परा के अनुसार शारदीय नवरात्रि में अश्विन शुक्ल प्रतिपदा को माँ की अखंड ज्योत प्रज्वलित की जाती है।

    नौ दिनों तक मठ के अंदर हवन-पूजन, दुर्गा सप्तशती एवं सरस्वती पाठ, गायत्री मंत्र जाप तथा तंत्रोक्त साधना की जाती  है। शारदीय नवरात्रि में प्रतिदिन सायंकालीन आरती के पश्चात बालिकाओं द्वारा गरबा की प्रस्तुति देकर माँ की आराधना की जाती है। नौ दिनों तक माँ हिंगलाज देवी का अलग-अलग स्वरूपों में विशेष श्रृंगार किया जाता है। सामान्य दिनों में भी प्रातः एवं सायं आरती एवं भोग की परम्परा नियमित रूप से जारी है।

    नवरात्रि के दौरान कानड़ नगर सहित आगर-मालवा, शाजापुर, राजगढ़, उज्जैन एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन हेतु पहुँचते हैं।

    मंदिर के पुजारी श्री आशीष चतुर्वेदी ने बताया कि वर्तमान में मंदिर मठ में विराजमान माता चद्दर की छत्रछाया में है। और वर्तमान में स्थायी मंदिर निर्माण एवं संरक्षण की आवश्यकता है।
     
    मठ परिसर तंत्र साधना,

     गायत्री उपासना एवं शाक्त परम्परा के साधकों के लिए विशेष साधना स्थल के रूप में मान्य है।
    यह प्राचीन मठ केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि मालवा की लोक आस्था, संस्कृति एवं इतिहास का जीवंत प्रतीक है।
    कानड़ के श्री हिंगलाज माता मठ शक्तिपीठ के पुजारी पंडित आशीष आचार्य एवं श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि इस मंदिर की जमीन अतिक्रमण मुक्त करवाकर उससे होने वाली आय को
    मठ के विकास, भव्य निर्माण जन सुविधाओं के विस्तार के लिए यदि उपयोग किया जाता है। तो इस प्राचीन मठ का भव्य एवं विशाल स्वरूप नजर आएगा और यह एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा। जैसा कि श्री हिंगलाज माता मठ कानड़ के के पुजारी पंडित श्री आशीष चतुर्वेदी एवं कानड़ निवासी पत्रकार श्री दारा सिंह ने बताया है।

    जय हो मां हिंगलाज श्रद्धालुओं पर अपना आशीर्वाद हमेशा बनाए रखना। 

    जय माता दी। 


    …..✍️जगदीश चंद्र मालवीय
    आर जी -3-टीलर कॉलोनी बड़ोद रोड
     आगर मालवा (मध्य प्रदेश)







  • धर्म : विश्व प्रसिद्ध 51 शक्तिपीठों में शामिल है कानड़ का माँ हिंगलाज देवी मठ, तंत्र साधना और जनआस्था का अद्वितीय संगम

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    शारदीय नवरात्रि पर विशेष 



     आगर-मालवा जिले के विकासखण्ड कानड़ मुख्यालय के नलखेड़ा रोड पर स्थित माँ हिंगलाज देवी मठ जिले की धार्मिक, ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर का महत्वपूर्ण केन्द्र है। नगर के मध्य में स्थित यह मठ लोगों की अटूट आस्था का प्रतीक है और इसे 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

    इतिहास एवं पौराणिक प्रसंग

    पौराणिक मान्यता के अनुसार जब भगवान शिव माता सती के पार्थिव शरीर को लेकर ब्रह्माण्ड में भ्रमण कर रहे थे, तब भगवान विष्णु द्वारा सुदर्शन चक्र से माता के शरीर के 51 भाग पृथ्वी पर गिरे थे। जहाँ-जहाँ यह भाग गिरे, वहाँ शक्तिपीठों की स्थापना हुई। मान्यता है कि इस क्रम में माता का ब्रह्मरंध्र पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हिंगोल नदी के समीप गिरा था, जहाँ विश्व प्रसिद्ध प्रथम हिंगलाज माता शक्तिपीठ स्थित है। उसी आद्य शक्तिपीठ की परम्परा से जुड़ा द्वितीय मठ मध्यप्रदेश के *आगर-मालवा जिले के कानड़ नगर में स्थित है।* यही तथ्य इस मठ की प्राचीनता एवं विश्व प्रसिद्धि का प्रमाण है।

    पुरातात्विक महत्व एवं किंवदंती 

    कानड़ का हिंगलाज देवी मठ पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत प्राचीन माना जाता है। मठ के गर्भगृह में विराजित माँ हिंगलाज देवी की प्रतिमा स्वयंभू मानी जाती है। स्थानीय जनश्रुति के अनुसार मठ का निर्माण सैकड़ों वर्ष पूर्व हुआ था। मठ परिसर में स्थित कई प्राचीन समाधियाँ यहाँ दीर्घकाल से चली आ रही साधु-संत परम्परा एवं तपस्या की साक्षी हैं। मठ की संरचना भले ही वर्तमान में चद्दर की छत्रछाया में है। तथापि इसकी नींव एवं पूजा परम्परा मालवा की प्राचीन मठ संस्कृति से जुड़ी हुई है।

     किंवदंती है कि इस स्थान पर सिद्ध साधकों द्वारा तंत्र साधना की जाती थी और माता ने स्वयं प्रकट होकर इस स्थान को सिद्धपीठ के रूप में प्रतिष्ठित किया है ऐसी जनश्रुति और मान्यता है।

    जन आस्था एवं मान्यता 

    माँ हिंगलाज देवी मठ के प्रति जन-आस्था अत्यंत गहरी है। इसे नगर की रक्षिका एवं मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूर्ण होती है। जिस प्रकार माँ पीतांबरा पीठ नलखेड़ा की माँ बगलामुखी का प्रथम मंदिर नेपाल, द्वितीय दतिया और तृतीय नलखेड़ा में स्थित होने की मान्यता है, उसी प्रकार हिंगलाज माता के दो प्रमुख मठों में एक बलूचिस्तान और दूसरा कानड़ में होना इसे विशिष्ट बनाता है। नगर में किसी भी शुभ कार्य से पूर्व माता के दर्शन की परम्परा है।

    पूजा परम्परा एवं विशेष अनुष्ठान 

    मठ में तंत्र साधना एवं गायत्री पाठ का विशेष महत्व है। नवरात्रि पर्व पर यहाँ विशेष पूजा परम्परा का निर्वहन किया जाता है। मठ के पुजारी प. श्री आशीष चतुर्वेदी के अनुसार वर्षों पुरानी परम्परा के अनुसार शारदीय नवरात्रि में अश्विन शुक्ल प्रतिपदा को माँ की अखंड ज्योत प्रज्वलित की जाती है।

    नौ दिनों तक मठ के अंदर हवन-पूजन, दुर्गा सप्तशती एवं सरस्वती पाठ, गायत्री मंत्र जाप तथा तंत्रोक्त साधना की जाती  है। शारदीय नवरात्रि में प्रतिदिन सायंकालीन आरती के पश्चात बालिकाओं द्वारा गरबा की प्रस्तुति देकर माँ की आराधना की जाती है। नौ दिनों तक माँ हिंगलाज देवी का अलग-अलग स्वरूपों में विशेष श्रृंगार किया जाता है। सामान्य दिनों में भी प्रातः एवं सायं आरती एवं भोग की परम्परा नियमित रूप से जारी है।

    नवरात्रि के दौरान कानड़ नगर सहित आगर-मालवा, शाजापुर, राजगढ़, उज्जैन एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन हेतु पहुँचते हैं।

    मंदिर के पुजारी श्री आशीष चतुर्वेदी ने बताया कि वर्तमान में मंदिर मठ में विराजमान माता चद्दर की छत्रछाया में है। और वर्तमान में स्थायी मंदिर निर्माण एवं संरक्षण की आवश्यकता है।
     
    मठ परिसर तंत्र साधना,

     गायत्री उपासना एवं शाक्त परम्परा के साधकों के लिए विशेष साधना स्थल के रूप में मान्य है।
    यह प्राचीन मठ केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि मालवा की लोक आस्था, संस्कृति एवं इतिहास का जीवंत प्रतीक है।
    कानड़ के श्री हिंगलाज माता मठ शक्तिपीठ के पुजारी पंडित आशीष आचार्य एवं श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि इस मंदिर की जमीन अतिक्रमण मुक्त करवाकर उससे होने वाली आय को
    मठ के विकास, भव्य निर्माण जन सुविधाओं के विस्तार के लिए यदि उपयोग किया जाता है। तो इस प्राचीन मठ का भव्य एवं विशाल स्वरूप नजर आएगा और यह एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा। जैसा कि श्री हिंगलाज माता मठ कानड़ के के पुजारी पंडित श्री आशीष चतुर्वेदी एवं कानड़ निवासी पत्रकार श्री दारा सिंह ने बताया है।

    जय हो मां हिंगलाज श्रद्धालुओं पर अपना आशीर्वाद हमेशा बनाए रखना। 

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  • धर्म: इन दिनों पूरा अंचल शक्ति की भक्ति में डूबा हुआ है, कोई गरबा नृत्य तो कोई निराहार तो कोई चप्पल- जुते छोड़कर मां को रिझाने में मशगूल हैं....आवरी माताजी मंदिर पर नवमी सोमवार को होगा हवन पूजन

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    धर्म   - नीमच[17-10-2026]
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    इन दिनों पूरा अंचल शक्ति की भक्ति में डूबा हुआ है, कोई गरबा नृत्य तो कोई निराहार तो कोई चप्पल- जुते छोड़कर मां को रिझाने में मशगूल हैं....आवरी माताजी मंदिर पर नवमी सोमवार को होगा हवन पूजन
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  • धर्म: विश्व प्रसिद्ध 51 शक्तिपीठों में शामिल है कानड़ का माँ हिंगलाज देवी मठ, तंत्र साधना और जनआस्था का अद्वितीय संगम

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    विश्व प्रसिद्ध 51 शक्तिपीठों में शामिल है कानड़ का माँ हिंगलाज देवी मठ, तंत्र साधना और जनआस्था का अद्वितीय संगम
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  • धर्म: छोटीसादड़ी के गोमाना से चीताखेडा के आवरी माता जी तक 8 घंटे में 15 किलोमीटर दूरी तय कर पहुंची 351फिट लंबी पैदल चुनरी यात्रा

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  • धर्म: छोटीसादड़ी के गोमाना से चीताखेडा के आवरी माता जी तक 8 घंटे में 15 किलोमीटर दूरी तय कर पहुंची 351फिट लंबी पैदल चुनरी यात्रा

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  • धर्म: जनआस्था और विश्वास की अनूठी झलक देखने को मिलती है श्री बाड़ी माता मंदिर, पचेटी मे....पचेटी के बाडी माता मंदिर में हर एक शुभ कार्य से पूर्व पट्टा लेने की है परंपरा

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    जनआस्था और विश्वास की अनूठी झलक देखने को मिलती है श्री बाड़ी माता मंदिर, पचेटी मे....पचेटी के बाडी माता मंदिर में हर एक शुभ कार्य से पूर्व पट्टा लेने की है परंपरा
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  • धर्म: 600 साल पुराने श्री लालमाता मंदिर से जुड़ी हैं, जनआस्‍था और विश्‍वास की अनेकों कहानियाँ....तनोड़िया के पास है मंदिर, नवरात्रि में भक्तों का लगता है तांता... !

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    धर्म   - आगर मालवा[14-10-2026]
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  • धर्म: बीजा नगरी में प्राचीनकाल से प्रज्वलित है आस्था की अखंड ज्योत - श्री हरसिद्धि माता मंदिर

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    धर्म   - आगर मालवा[13-10-2026]
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  • धर्म: बीजा नगरी में प्राचीनकाल से प्रज्वलित है आस्था की अखंड ज्योत - श्री हरसिद्धि माता मंदिर

    बीजा नगरी में प्राचीनकाल से प्रज्वलित है आस्था की अखंड ज्योत - श्री हरसिद्धि माता मंदिर
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  • धर्म: आगर-मालवा की आस्था का केंद्र है, माँ तुलजा भवानी मंदिर गुफा बर्डा ...आगर मालवा की पहाड़ियों में छुपा आस्था का चमत्कार....दिन में तीन रूप बदलने वाली माँ तुलजा भवानी.....उज्जैन तक जाती रहस्यमयी गुफा की गाथा

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    धर्म   - आगर मालवा[12-10-2026]
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  • धर्म: आगर-मालवा की आस्था का केंद्र है, माँ तुलजा भवानी मंदिर गुफा बर्डा ...आगर मालवा की पहाड़ियों में छुपा आस्था का चमत्कार....दिन में तीन रूप बदलने वाली माँ तुलजा भवानी.....उज्जैन तक जाती रहस्यमयी गुफा की गाथा

    आगर-मालवा की आस्था का केंद्र है, माँ तुलजा भवानी मंदिर गुफा बर्डा ...आगर मालवा की पहाड़ियों में छुपा आस्था का चमत्कार....दिन में तीन रूप बदलने वाली माँ तुलजा भवानी.....उज्जैन तक जाती रहस्यमयी गुफा की गाथा
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  • शारदीय नवरात्रि विशेष : माँ पीताम्बरा की सिद्धस्थली: विश्वविख्यात माँ बगलामुखी धाम, नलखेड़ा

    शारदीय नवरात्रि विशेष :
    धर्म   - आगर मालवा[09-10-2026]
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  • शारदीय नवरात्रि विशेष : माँ पीताम्बरा की सिद्धस्थली: विश्वविख्यात माँ बगलामुखी धाम, नलखेड़ा

       माँ पीताम्बरा की सिद्धस्थली: विश्वविख्यात माँ बगलामुखी धाम, नलखेड़ा
    धर्म   - आगर मालवा[09-10-2026]
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  • धर्म: व्हीलचेयर पर आते हैं लकवा पीड़ित, मां भादवा की कृपा से पैदल लौटने की आस्था.....धर्म, आस्था और विश्वास की त्रिवेणी है महामाया मां भादवा माता धाम

    धर्म:
    धर्म   - नीमच[08-10-2026]
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  • धर्म: व्हीलचेयर पर आते हैं लकवा पीड़ित, मां भादवा की कृपा से पैदल लौटने की आस्था.....धर्म, आस्था और विश्वास की त्रिवेणी है महामाया मां भादवा माता धाम

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    धर्म   - नीमच[08-10-2026]
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  • आगर : चमत्कारों की नगरी - जहाँ स्वयं बाबा बैजनाथ ने लड़ा भक्त का मुकदमा.......बाबा बैजनाथ धाम की पावन धरा पर घटित अलौकिक घटना आज भी है आस्था का जीवंत प्रमाण

    आगर :
    धर्म   - आगर मालवा[04-10-2026]
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  • आगर : चमत्कारों की नगरी - जहाँ स्वयं बाबा बैजनाथ ने लड़ा भक्त का मुकदमा.......बाबा बैजनाथ धाम की पावन धरा पर घटित अलौकिक घटना आज भी है आस्था का जीवंत प्रमाण

     चमत्कारों की नगरी - जहाँ स्वयं बाबा बैजनाथ ने लड़ा भक्त का मुकदमा.......बाबा बैजनाथ धाम की पावन धरा पर घटित अलौकिक घटना आज भी है आस्था का जीवंत प्रमाण
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  • धर्म: 10 दिनों बाद गौरी पुत्र गणेश कुछ स्थानों से आज लोटें तो कुछ स्थानों से कल शनिवार को लोटेंगे अपने धाम

    धर्म:
    धर्म   - नीमच[25-09-2026]
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  • धर्म: 10 दिनों बाद गौरी पुत्र गणेश कुछ स्थानों से आज लोटें तो कुछ स्थानों से कल शनिवार को लोटेंगे अपने धाम

    10 दिनों बाद गौरी पुत्र गणेश कुछ स्थानों से आज लोटें तो कुछ स्थानों से कल शनिवार को लोटेंगे अपने धाम
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  • धर्म: लोकदेवता भगवान वीर तेजाजी के जन्मोत्सव पर भड़क सनावदा गांव में उमड़ी भक्ति.....सुख समृद्धि की प्रार्थना की

    धर्म:
    धर्म   - नीमच[20-09-2026]
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    लोकदेवता भगवान वीर तेजाजी के जन्मोत्सव पर भड़क सनावदा गांव में उमड़ी भक्ति.....सुख समृद्धि की प्रार्थना की
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  • धर्म: हरवार में गूंजा जय श्री देवनारायण का जयघोष

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    धर्म   - नीमच[17-09-2026]
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  • धर्म: हरवार में गूंजा जय श्री देवनारायण का जयघोष

    हरवार में गूंजा जय श्री देवनारायण का जयघोष
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  • धर्म: हरतालिका तीज पर चीताखेड़ा में उमड़ा आस्था का सैलाब, पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली की मांगी मन्नत

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    धर्म   - नीमच[15-09-2026]
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  • धर्म: जन्मोत्सव......त्रिशला नंदन वीर की जय बोलो महावीर की, जयकारों से गूंजी चीताखेड़ा की गलियां, बैण्ड बाजों से निकाला प्रभु का वरघोड़ा

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    धर्म   - नीमच[12-09-2026]
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  • धर्म: जन्मोत्सव......त्रिशला नंदन वीर की जय बोलो महावीर की, जयकारों से गूंजी चीताखेड़ा की गलियां, बैण्ड बाजों से निकाला प्रभु का वरघोड़ा

    जन्मोत्सव......त्रिशला नंदन  वीर की जय बोलो महावीर की, जयकारों से गूंजी चीताखेड़ा की गलियां, बैण्ड बाजों से निकाला प्रभु का वरघोड़ा
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