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मंदसौर। जिला चिकित्सालय मंदसौर में प्रसव के दौरान नवजात शिशु को गंभीर चिकित्सकीय चोट पहुंचने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, मध्यप्रदेश ने इस मामले में तीन डॉक्टरों को दोषी मानते हुए प्रत्येक से 50-50 हजार रुपये की वसूली तथा दो-दो वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने के आदेश जारी किए हैं। यह कार्रवाई 6 मई 2026 को भोपाल से जारी आदेशों में की गई। जानकारी के अनुसार, 24 फरवरी 2024 को श्रीमती सीमा पत्नी दशरथलाल को प्रसव के लिए जिला चिकित्सालय मंदसौर में भर्ती कराया गया था। प्रसव के दौरान सिजेरियन ऑपरेशन किया गया, लेकिन ऑपरेशन के दौरान नवजात शिशु को पेरीनियल टियर/कट लग गया। इससे शिशु की स्थिति गंभीर हो गई और उसे तत्काल आगे के उपचार के लिए पहले निजी अस्पताल रतलाम तथा बाद में शासकीय मेडिकल कॉलेज रतलाम में जटिल सर्जरी से गुजरना पड़ा। इस पूरी घटना से परिजनों को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी। जांच में सामने आया कि डॉ. मीना वर्मा जो इमरजेंसी ऑब्सट्रैट्रिक केयर (EMOC) में विधिवत प्रशिक्षित नहीं थीं, उन्होंने उच्च जोखिम वाली प्रसूता का सिजेरियन ऑपरेशन किया। इतना ही नहीं रिकॉर्ड में गलत तरीके से स्वयं को सहायक चिकित्सक के रूप में दर्ज किया गया। विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही और चिकित्सा दस्तावेजों में भ्रामक जानकारी दर्ज करने का मामला माना। वहीं डॉ. संगीता पाटीदार, तत्कालीन महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ पर आरोप है कि उन्होंने एक गैर-प्रशिक्षित चिकित्सक को ऑपरेशन के लिए निर्देशित किया और पूरी प्रक्रिया में निर्धारित चिकित्सा मानकों का पालन नहीं किया। इसके अलावा शिशु की चोट के बाद उचित चिकित्सकीय प्रबंधन का रिकॉर्ड भी नहीं रखा गया। तीसरे डॉक्टर डॉ. सिद्धार्थ शिंदे जो उस समय ऑन-कॉल शल्यक्रिया विशेषज्ञ थे उन्हें फोन पर तत्काल अस्पताल बुलाया गया था, लेकिन गंभीर स्थिति की जानकारी होने के बावजूद वे अस्पताल नहीं पहुंचे। जांच में माना गया कि उनकी अनुपस्थिति के कारण नवजात को समय पर विशेषज्ञ उपचार नहीं मिल पाया और बाद में उसे बड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा। इस पूरे मामले का संज्ञान राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) नई दिल्ली और मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने भी लिया था। आयोगों की कड़ी टिप्पणियों और मीडिया में खबरों के प्रकाशन से शासन की छवि धूमिल होने का उल्लेख आदेश में किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने तीनों चिकित्सकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए स्पष्ट किया कि चिकित्सा सेवा में लापरवाही और नियम विरुद्ध कार्यवाही को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मंदसौर जिला अस्पताल का यह मामला अब प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। |