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वे सच्चे अर्थों में आजीवन अनुशासित सैनिक रहे। भारतीय सेना की मिलिट्री इंजीनियरिंग कोर से सेवानिवृत्त होने के पश्चात श्री शांतिलाल जी मालवीय ने मध्यप्रदेश वित्त विकास निगम, इंदौर में वाहन चालक के रूप में अपनी सेवाएँ दीं और वहाँ से भी सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हुए। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने इंदौर जैसे महानगर को छोड़कर अपने पैतृक गाँव बैगदा, जिला धार में परिवारजनों के साथ निवास करना चुना। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी उन्होंने एक अनुशासित सैनिक की तरह अपना जीवन जिया और अपने आदर्शों पर सदैव अडिग रहे। उन्होंने शासकीय सेवा पूर्ण निष्ठा, समर्पण और सेवा-भाव से निभाई। साथ ही अपने पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्वों का भी आदर्श रूप से निर्वहन किया। उन्होंने अपनी एकमात्र पुत्री को उत्तम संस्कार दिए, उसे उच्च शिक्षा दिलाई, चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ाया और एक योग्य चिकित्सक बनने का अवसर प्रदान किया। बाद में उनका विवाह भी एक योग्य चिकित्सक के साथ कराया। आज उनकी पुत्री अपने पति के साथ चिकित्सा सेवा के साथ-साथ पारिवारिक दायित्वों का भी सफलतापूर्वक निर्वहन कर रही हैं। उन्होंने अपने दोनों पुत्रों को भी श्रेष्ठ संस्कार दिए, उन्हें शिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाया। आज दोनों पुत्र अपने पैरों पर खड़े हैं और उनके आदर्शों को आगे बढ़ा रहे हैं। मैं उम्र में उनसे काफी छोटा था, किंतु उन्होंने मुझे कभी छोटा भाई नहीं माना; वे मुझे अपना मित्र ही समझते थे। मैं अपने जीवन की छोटी-बड़ी बातें, सुख-दुःख उनसे निस्संकोच साझा कर लिया करता था। आज वे हमारे बीच नहीं हैं। उनके आकस्मिक निधन का समाचार सुनकर मन अत्यंत व्यथित और विचलित हो गया। वे प्रतिदिन व्हाट्सऐप पर धार्मिक भजन, प्रेरणादायक वीडियो और आध्यात्मिक संदेश साझा किया करते थे, जो उनकी ईश्वर के प्रति अटूट आस्था का परिचायक था। आदरणीय भाई साहब स्वर्गीय श्री शांतिलाल जी मालवीय को शत-शत नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि। ईश्वर दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहने की शक्ति दें। ॐ शांति। अनुज जगदीश मालवीय आगर मालवा |